RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा- आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए तुरंत उठाने होंगे ये कदम

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Updated: August 20, 2019, 10:51 AM IST
RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा- आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए तुरंत उठाने होंगे ये कदम
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने PTI को इंटरव्यु दिया है.

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में जारी सुस्ती को दूर करने के लिए बड़े कदम उठाने जरूरी है. सरकार को तुरंत एनर्जी सेक्टर और NBFC (नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) की समस्याओं का हल निकालना होगा.

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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में जारी सुस्ती को दूर करने के लिए बड़े कदम उठाने जरूरी है. सरकार को तुरंत एनर्जी सेक्टर और NBFC (नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) की समस्याओं का हल निकालना होगा. उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में निवेश को बढ़ाने के लिए नए सुधारों की शुरुआत करनी होगी. आपको बता दें कि समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) को दिए इंटरव्यू में रघुराम राजन ने कहा कि इस बात के संकेत हैं कि मंदी गहरा सकती है, ऑटो सेक्टर (Auto Sector Crisis) 20 साल के सबसे सबसे खराब दौर से गुजर रहा है. इसका असर ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों पर भी है. इस सेक्टर में अभी तक हजारों नौकरियों (Layoff) जा चुकी है. वहीं, FMCG कंपनियों में वॉल्यूम ग्रोथ में कमी आई है. राजन ने कहा कि आप चारों तरफ कारोबारियों की चिंता सुन सकते हैं कि उन्हें राहत पैकेज की जरूरत है.

कौन है रघुराम राजन- आपको बता दें कि साल 2013 से 2016 तक रघुराम राजन भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे हैं. उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के लिए मना कर दिया था.

साल 2013 से 2016 तक रघुराम राजन भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे हैं.


रघुराम गोविंद राजन भारतीय रिजर्व बैंक के 23वें गवर्नर थे. उनका जन्म 3 फरवरी 1963 को भोपाल में हुआ था. 4 सितंबर  2013 को डी. सुब्बाराव के रिटायर होने के बाद उन्होंने यह पदभार ग्रहण किया और सितंबर 2016 तक इस पद पर रहे.

इससे पहले वह यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रमुख आर्थिक सलाहकार और शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में एरिक जे. ग्लीचर फाईनेंस के एमिनेंट सर्विस प्रोफेसर रह चुके हैं. 2003 से 2006 तक वे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख अर्थशास्त्री व रिसर्च डायरेक्टर रहे. भारत में वित्तीय सुधार के लिये योजना आयोग द्वारा नियुक्त समिति का नेतृत्व भी उन्होंने किया.

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1985 में उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री हासिल की. आईआईएम अहमदाबाद से उन्होंने 1987 में एमबीए किया और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से 1991 में उन्होंने अर्थशास्त्र विषय में पीएचडी की.
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रघुराम राजन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और विकास दर को बढ़ावा देने के लिए सुधारों का एक नया सेट जरूरी है.


तुरंत बड़े सुधार की जरुरत- रघुराम राजन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और विकास दर को बढ़ावा देने के लिए सुधारों का एक नया सेट जरूरी है. उन्होंने कहा है कि विदेशी बाजारों से उधार लेना वास्तव में सुधार नहीं है. बल्कि, ये फौरी कदम है.

>> सुधार करने वालों का इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि हम भारत के लोग भारत को कहां देखना चाहते हैं.

>> सरकार को यह तस्वीर साफ होनी चाहिए कि कैसी अर्थव्यवस्था हम बनाना चाहते हैं. जरूरत यह समझने की है कि विकास दर को किस तरह से दो-तीन फीसदी बढ़ाया जाए.

>> किस तरह से एनर्जी, नॉन- बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र की समस्या का तुरंत सधार किया जाए. यह तेजी से हो न कि छह महीने बाद हो. समस्या से तत्काल निपटने के लिए यह बहुत अहम है.

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>> रघुराम राजन ने कहा कि हमें ऐसे सुधारों की जरूरत है, जो निजी क्षेत्र को निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है. हमें कठोर कदम उठाने होंगे ताकि भारतीय बाजार, लोगों और कारोबार को प्रोत्साहित कर सकें.

>> हमें आज की जरूरत पर सोचना होगा. मौजूदा वैश्विक आर्थिक मंदी पर राजन ने कहा कि 2008 के वित्तीय संकट की तुलना में दुनिया भर के बैंक बेहतर स्थिति में हैं.

>> बैंक तब की तुलना में कम लाभान्वित होते हैं. राजन ने कहा कि वह एक और बड़ी वित्तीय संकट की भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं, लेकिन अगर यह आता है, तो यह विभिन्न स्रोतों से होगा.

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First published: August 20, 2019, 10:48 AM IST
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