लगातार हो रहे घोटालों पर RBI Governer से सवाल, 2018 के पहले क्यों सामने नहीं आए फाइनेंशियल फ्रॉड

लगातार हो रहे घोटालों पर RBI Governer से सवाल, 2018 के पहले क्यों सामने नहीं आए फाइनेंशियल फ्रॉड
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) से एक्सटर्नल डायरेक्टर्स (External Directors of RBI) ने देश में हो रहे घोटालों को लेकर सवाल पूछा है. पिछले सप्ताह दास से पूछा गया कि 2018 के बाद सामने आने वाले फ्रॉड कैसे इतने दिनों तक सामने नहीं आ सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2019, 5:31 PM IST
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नई दिल्ली. देश में लगातार बढ़ रहे बैंक फ्रॉड के बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) पर दबाव बढ़ने लगा है. पिछले सप्ताह दो एक्सटर्नल डायरेक्टर्स (External Directors of RBI) वाले आरबीआई बोर्ड (RBI Board) ने गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ बैठक की है. इस दौरान दास से पूछा गया कि 2018 के बाद सामने आने वाले फ्रॉड (Financial Frauds in India) कैसे इतने दिनों तक सामने नहीं आ सके. दोनों सदस्यों का इशारा पिछले साल फरवरी में सामने आए पंजाब नेशनल बैंक घोटाले को लेकर था.

इन मामलों को लेकर पूछा गया सवाल
अब तक के सबसे बड़े बैंकिंग स्कैम (PNB Scan) में हीरा कारोबारी ​नीरव मोदी (Nirav Modi) और उसके मामा मेहुल चोकसी (Mehul Choksi) शामिल थे. इसके बाद IL&FS में ​अनियमितता, पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) जैसे मामले की तरफ भी इन दोनों निदेशकों का इशारा था. इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में मामले से जुड़े जानकार के हवाले से लिखा है, 'ये सारे मामले एक दूसरे से अलग हैं, इनमें कोई समानता नहीं है, लेकिन कुछ सदस्यों ने इनके बारे में जिक्र किया. गवर्नर ने आरबीआई द्वारा डेटा कलेक्शन और डेटा शेयरिंग सिस्टम के बारे में विस्तृत जानकारी दी. कुछ मामलों में प्राप्त डेटा पर्याप्त नहीं थे.'

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इन स्कैम्स से वित्तीय हालात पर पड़ा असर


बता दें कि PNB स्कैम में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने बैंक को 14,000 करोड़ रुपये का झटका दिया है. इस मामले में आरबीआई द्वारा सोसाइटी ऑफ इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशंस (SWIFT) सिस्टम का फायदा उठाया गया था. इसके बाद पिछले साल ही IL&FS की ग्रुप कंपनियों ने लगातार कई शॉर्ट टर्म डिपॉजिट्स, इंटर कॉरपोरेट डिपॉजिट्स, कॉमर्शियल पेपर्स के डिफॉल्ट्स किए. इन डिफॉल्ट्स के बाद गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. रेटिंग डाउनग्रेड होने के बाद तो बाजार में तरलता की कमी भी हो गई थी.


पीएमसी बैंक के लोन बुक का एक तिहाई कर्ज HDIL का
पिछले माह ही पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर आरबीआई ने लेनदेन संबधित कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए. जांच के दौरान पता चला कि पीएमसी बैंक ने अपने एक्सपोजर लिमिट से अधिक लोन हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर (HDIL) को दिया. कुछ साल बाद बैंक ने HDIL द्वारा लोन न दिए जाने के बाद इसे फंसे कर्ज के तौर पर वर्गीकृत भी नहीं किया. ​31 मार्च तक कुल एक्सपोजर 8,400 करोड़ रुपये होने के साथ ही एचडीआईएल द्वारा लिया गया लोन, बैंक के लोन बुक का एक तिहाई है.

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