इस साल अब और कम नहीं होंगी ब्याज दरें, RBI के लिए महंगाई बनी सबसे बड़ी चुनौती

भारतीय रिज़र्व बैंक
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खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) में इजाफे का मतलब है कि पैसे बचाने से लेकर खर्च करने वाले, सभी को परेशानी होगी. अर्थशास्त्रियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि बचत करने वाले लोगों के लिए ब्याज दर लाभप्रद साबित नहीं हो रहा है. उम्मीद है कि फरवरी की बैठक में ब्याज दरों 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 9:06 PM IST
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नई दिल्ली. इस साल अक्टूबर लगातर नौंवा महीना रहा, जब महंगाई दर RBI द्वारा तय किए गए 2-6 फीसदी के लक्ष्य से ज्यादा रहा. 2020 में अब तक केवल मार्च ही ऐसा महीना रहा है, जब महंगाई दर 6 फीसदी से कम रही है. किसी सामान्य वर्ष में RBI ने अब तक नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दिया होता, क्योंकि वैधानिक रूप से वह महंगाई दर को 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखने के लिए बाध्य होता. लेकिन, वित्त वर्ष 2021 सामान्य वर्ष नहीं है. अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यस्था में 10 फीसदी की संकुचन आएगी.

फरवरी में ब्याज दरें 50 आधार अंक कम किए जाने की उम्मीद
फलस्वरूप, अर्थशास्त्री (Economists) इस बात की उम्मीद लगा रहे हैं कि RBI फरवरी में एक बार फिर नीतिगत ब्याज दरों (Policy Rates) में कटौती करेगा. नोमूरा के एक एनलिस्ट का कहना है कि हमारा अनुमान है कि 5 दिसंबर को होने वाली बैठक में आबीआई मुद्रास्फिति को देखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. हालांकि, निगेटिव आउटपुट गैप की वजह से मुद्रास्फिति मध्यम स्तर पर आ सकती है. ऐसे में हम फरवरी की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद कर सकते हैं.

वर्तमान में रेपो रेट 4 फीसदी पर है. ऐसे में फरवरी में अगर इसमें 50 आधार अंक की कटौती होती है तो यह 3.5 फीसदी के स्तर पर आ जाएगा. लेकिन, एक बात यह भी ध्यान देना होगा कि अगर प्राइवेट खपत पटरी पर नहीं लौटता है तो मौद्रिक नीतियों में ढील की उम्मीद नहीं की जा सकती है.
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क्या है खुदरा महंगाई दर में इजाफे का अर्थ?
खुदरा महंगाई दर में इजाफे का मतलब है कि पैसे बचाने से लेकर खर्च करने वाले, सभी को परेशानी होगी. अर्थशास्त्रियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि बचत करने वाले लोगों के लिए ब्याज दर लाभप्रद साबित नहीं हो रहा है. मौजूदा महामारी में उन्हे नुकसान उठाना पड़ रहा है. सतर्कता बरतते हुए लोग अब हाउसहोल्ड सेविंग्स का उपाय कर रहे हैं. अप्रैल-जुलाई तिमाही में यह 21.6 फीसदी बढ़ा है.

नवंबर बुलेटिन में केंद्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था में रिकवरी के लिहाज से मुद्रास्फिति को एक विकट जोखिम करार दिया है. बुलेटिन में लिखा गया, 'कीमतों में दबाव का सामान्यीकरण एक गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. मुद्रास्फिति को काबू नहीं होने का अनुमान नीतिगत हस्तक्षेपों की विश्वसनीयता के लिए ठीक नहीं होगा. इसका असर ग्रोथ पर भी नजर आयेगा.

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वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के दुर्लभ स्थिति में है, जहां मंदी होने के बावजूद भी महंगाई में इजाफा हो रहा है. यह नीतियों को न​ सिर्फ ​जटिल बना रहा, बल्कि संभावित वृद्धि को भी खतरे में डाल रहा है.
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