RBI के ब्याज दरें घटाते ही कम हो जाएगी आपकी EMI! 1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम

सोमवार से शुरू हुई RBI की बैठक ने अपना फैसला सुना दिया है. बैठक में ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं करने का फैसला हुआ है.

News18Hindi
Updated: December 5, 2018, 8:24 PM IST
RBI के ब्याज दरें घटाते ही कम हो जाएगी आपकी EMI! 1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया
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Updated: December 5, 2018, 8:24 PM IST
सोमवार से शुरू हुई RBI की बैठक ने अपना फैसला सुना दिया है. बैठक में ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं करने का फैसला हुआ है.  रेपो रेट रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार है. वहीं, रिवर्स रेपो रेट 6.25 फीसदी है. वहीं, आरबीआई ने होम, ऑटो और पर्सनल लोन को लेकर बड़ा फैसला किया है. अब आरबीआई के ब्याज दरों पर फैसला करते ही बैंकों को भी इस पर फैसला लेना होगा. अगर आसान शब्दों में समझें तो आरबीआई की दरें घटते ही बैंक आपकी EMI घटा देंगे. यह नया नियम एक अप्रैल 2019 से लागू होगा.

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RBI पॉलिसी पर एक नज़र
>> रिजर्व बैंक ने SLR में 0.25 फीसदी की कटौती की है. मौजूदा एसएलआर 19.5 फीसदी है.

>> कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में केंद्रीय बैंक ने कोई बदलाव नहीं किया है. अ
>> अक्टूबर में हुई पिछली समीक्षा बैठक में भी रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था. >> एमएसएफ बैंक रेट 6.75 फीसदी पर बनाए रखा है.
>> रिजर्व बैंक का कहना है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ग्रोथ को सपोर्ट करने और रिटेल महंगाई दर को 4 फीसदी (+/-2%) रखने के लिए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया.
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FY19 में 7.4% GDP ग्रोथ का अनुमान- बैंक ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.4 फीसदी रखा है. वहीं, वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 7.5 फीसदी है.

महंगाई दर का अनुमान घटाया- रिजर्व बैंक का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) के दौरान महंगाई का अनुमान 2.7-3.2 फीसदी रह सकती है. पहले यह अनुमान 3.9-4.5% था.(ये भी पढ़ें-RBI की 9 घंटे मैराथन बैठक, नई MSME स्कीम पर राजी, कैश रिजर्व पर बनेगी समिति)

जून और अगस्त बैठक में लगातार दो बार बढ़ाई थीं दरें- जून से आरबीआई ने ब्याज दरों में लगातार दो बार बढ़ोतरी की थी. उसके बाद अक्टूबर में अर्थशास्त्रियों के अनुमान के विपरीत रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरों को उसी स्थिति पर बरकरार रखा.  रुपये में गिरावट तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से मुद्रास्फीति दबाव के चलते उम्मीद की जा रही थी कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करेगा. उस समय रेपो दर को 6.50 फीसदी पर कायम रखा गया था. (ये भी पढ़ें-अब आप सिर्फ इस कोड से खोल सकेंगे बैंक अकाउंट, मोदी सरकार का नया प्लान)

क्या होता है SLR-जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं. नकदी की लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है.कॉमर्शियल बैंकों को रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार एक निश्चित राशि नकदी, सोना या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बॉन्डों में निवेश करना होता है. इस पर रिजर्व बैंक नजर रखता है, ताकि बैंकों के उधार देने पर नियंत्रण रखा जा सके.

 
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