अब देश के बैंकों में नियुक्त होगा Chief Compliance Officer, RBI ने बताया क्या होगा काम

अब देश के बैंकों में नियुक्त होगा Chief Compliance Officer, RBI ने बताया क्या होगा काम
भारतीय रिज़र्व बैंक

RBI ने शुक्रवार को बैंकों में मुख्य अनुपलान अधिकारी (CCO) नियुक्त किये जाने को लेकर एक गाइडलाइंस जारी की है. CCO की नियुक्ति उचित मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर होगी. CCO को न्यूनतम 3 साल के लिए नियुक्त किया जायेगा और यह पद जनरल मैनेजर की रैंक का होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 11, 2020, 4:08 PM IST
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मुंबई. भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) ने शुक्रवार को बैंकों में मुख्य अनुपालन अधिकारी (CCO- Chief Compliance Officer)  की नियुक्ति के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी है ताकि बैंकिंग इंडस्ट्री में अनुपालन और रिस्क मैनेजमेंट कल्चर में एकरुपता लाई जा सके. इस संबंध में RBI की एक सर्कुलर के मुताबिक, CCO को जनरल मैनेजर (General Manager) रैंक पर कम से कम 3 साल के लिए नियुक्त करना होगा. यह पद जनरल मैनेजर के रैंक का नहीं होता है तो भी CEO की रैंक के 2 लेवल के नीचे वाली रैंक का नहीं होना चाहिए.

सभी बैंकों में एक जैसा हो सकेगा अनुपालन प्रक्रिया
RBI ने कहा, 'स्वतंत्र अनुपालन प्रक्रिया को CCO के अंतर्गत ही पूरा करना होगा, जिन्हें उपयुक्त प्रक्रिया के तहत चुना जाएगा. बैंक में अनुपालन जोखिम को सही ढंग से सुनिश्चित करने के लिए इनका चयन फिट व उचित मूल्यांकन मानदंड के आधार पर होगा. RBI की गाइडलाइंस में कहा गया कि ऐसा पाया गया है कि बैंकों में अपने हिसाब से इसका पालन किया जाता है. लेकिन नया इसमें एकरुपता को सुनिश्चित करेगा.

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कैसे नियुक्त होंगे बैंकों में CCO


गाइडलाइंस के मुताबिक, CCO के कार्यकाल पूरा होने से पहले भी ट्रांसफर किया जा सकता है या हटाया जा सकता है. लेकिन यह अपवादी परिस्थितियों में बैंक बोर्ड की मंजूरी लेने और पारदर्शी रूप से आंतरिक मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत होगा. कहा गया कि CCO बैंक का सीनियर एग्जीक्युटिव होगा जिसका रैंक जनरल मैनेजर का होगा. यह सीईओ के पद की दो रैंक से ज्याद नीचे का नहीं होना चाहिए. CCO को मार्केट के जरिए भी नियु​क्त किया जा सकता है.

हितों के टकराव से बचने की कोशिश
इस गाइडलाइंस में यह भी कहा गया कि CCO को कोई ऐसी जिम्मेदारी नहीं देनी होगी जिससे हितों के टकराव की स्थिति पैदा होगा. खासतौर पर बिजनेस संबंधी किसी भूमिका को लेकर ऐसा नहीं होना चाहिए. जिन भूमिका से हितो के टकराव का खतरा नहीं है, उसकी जिम्मेदारी बैंकों को दी जा सकती है. जैसे एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग अधिकारी का पद. ऐसे पदों पर बैंक साइज, जटिलता, रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी के लिये मदद मिल सकती है.

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CCO को नहीं बनाया जा सकेगा कमेटी का सदस्य
इसमें यह भी कहा गया कि CCO कोई ऐसी कमेटी का भी सदस्य नहीं बन सकता है, जिससे कमेटी के सदस्य और उसके पद के बीच टकराव की स्थिति बन सके. इसमें पर्चेज या किसी सैंक्शन संबंधी कमे​टियां शामिल हैं. अगर कोई CCO ऐसी कमेटी का सदस्य बनता भी है तो उनकी भूमिका केवल सलाहकार के रूप में ही होगी.
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