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RBI अगले महीने लेगा ब्याज दरों पर फैसला, इतनी घट सकती है आपकी EMI

News18Hindi
Updated: May 28, 2019, 5:45 PM IST
RBI अगले महीने लेगा ब्याज दरों पर फैसला, इतनी घट सकती है आपकी EMI
एसबीआई इकोरैप की रिपोर्ट के अनुसार, RBI जीडीपी की वृद्धि दर में तेजी लाने के लिए जून में होने वाली अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है.

एसबीआई इकोरैप की रिपोर्ट के अनुसार, RBI जीडीपी की वृद्धि दर में तेजी लाने के लिए जून में होने वाली अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है.

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जून में ब्याज दरों में एक बार और कटौती कर सकता है. एसबीआई इकोरैप की रिपोर्ट के अनुसार, RBI जीडीपी की वृद्धि दर में तेजी लाने के लिए जून में होने वाली अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है. बता दें कि इससे पहले RBI ने फरवरी और अप्रैल में इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी.

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0.50 फीसदी तक कटौती की उम्मीद
उंची ब्याज दरों को निवेश के लिए एक बाधा के रूप में देखते हुए SBI ने कहा कि रिजर्व बैंक अगली मॉनिटरी पॉलिसी में ब्याज दरों को 0.35-0.50 फीसदी तक घटा सकता है. लेकिन जब ट्रांसमिशन होता है, तभी ब्याज दरों में कटौती प्रभावी हो सकती है.

SBI का सुझाव
एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई को एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट को अपनाना चाहिए जो केंद्रीय बैंक की रेपो रेट के साथ मिलकर चलती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों के परिसंपत्ति-देयता पक्ष को भी सिंक में स्थानांतरित किया जाना चाहिए और रेपो दर को सीधे बाहरी बेंचमार्क या नॉन वोलेटाइल बैंक लायबिलिटीज या CASA के लिए निर्धारित किया जाता है, जो कि ज्यादातर लेनदेन उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है.

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GDP ग्रोथ घटने का अनुमान
देश की आर्थिक वृद्धि दर मार्च 2019 को समाप्त चौथी तिमाही में घटकर 6.1-5.9 फीसदी रहने का अनुमान है. अगर ऐसा होता है तो पूरे वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर कम होकर 7 फीसदी से नीचे जा सकती है. एसबीआई (SBI) की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.

क्या है रेपो रेट
जिस रेट पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट कम होने का मतलब यह है कि बैंक से मिलने वाले लोन सस्ते हो जाएंगे. रेपो रेट कम हाेने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं.

क्या होता है रिवर्स रेपो रेट
जिस रेट पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आती है. बहुत ज्यादा नकदी होने पर आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देती है.

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क्या है SLR
जिस रेट पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे एसएलआर कहते हैं. नकदी को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है, जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है.

क्या है CRR
बैंकिंग नियमों के तहत सभी बैंकों को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा करना होता है, जिसे कैश रिजर्व रेशियो यानी सीआरआर कहते हैं.

क्या है MSF
आरबीआई ने इसकी शुरुआत साल 2011 में की थी. एमएसएफ के तहत कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1 फीसदी तक लोन ले सकते हैं.

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First published: May 28, 2019, 5:10 PM IST
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