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RBI ने रेपो रेट 0.25% घटाकर 5.15% किया, 9 साल में सबसे कम, आप पर होगा सीधा असर

News18Hindi
Updated: October 4, 2019, 3:17 PM IST
RBI ने रेपो रेट 0.25% घटाकर 5.15% किया, 9 साल में सबसे कम, आप पर होगा सीधा असर
MPC बैठक में रेपो रेट 0.25 फीसदी घटाकर 5.15 फीसदी करने का फैसला हुआ है.

RBI (Reserve Bank of India) ने ब्याज दरें (Repo Rate Cut) 0.25 फीसदी घटाने का ऐलान किया है. MPC बैठक में रेपो रेट 0.25 फीसदी घटाकर 5.15 फीसदी करने का फैसला हुआ है.

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  • Last Updated: October 4, 2019, 3:17 PM IST
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मुंबई. RBI (Reserve Bank of India) ने ब्याज दरें (Repo Rate Cut) 0.25 फीसदी घटाने का ऐलान किया है. MPC बैठक में रेपो रेट 0.25 फीसदी घटाकर 5.15 फीसदी करने का फैसला हुआ है. इस फैसले के बाद आम लोगों के लिए बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा. साथ ही, EMI घटने की उम्मीद भी बढ़ जाएगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि महंगाई दर आरबीआई के तय दायरे में है. ऐसे में अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए रेपो रेट घटाने की उम्मीद पहले से थी. आपको बता दें कि RBI ने अगस्त पॉलिसी में ब्याज दरें 0.35 फीसदी घटाई थी.

इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर पांच फीसदी पर आ गई थी. यह दर छह साल का सबसे निचला स्तर है. वहीं आरबीआई इस साल लगातार चार बार रेपो दर में कटौती कर चुका है. इन चार बार में कुल मिलाकर 1.10 फीसदी की कटौती रेपो रेट में हो चुकी है.



>> रेपो रेट (Repo Rate): 0.25 फीसदी घटाकर 5.15 फीसदी किया.

>>  रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) 0.25 फीसदी घटाकर 4.9 फीसदी किया.
>> सीआरआर (CRR) 4 फीसदी पर स्थिर है.


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क्या होता है रेपो रेट- जिस रेट यानी ब्याज दरों पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट कम होने का मतलब यह है कि बैंक से मिलने वाले लोन सस्ते हो जाएंगे. रेपो रेट कम हाने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं.

MPC क्या है- एमपीसी का गठन 2016 में हुआ था. इसके लिए वित्त विधेयक के जरिए आरबीआई एक्ट में संसोधन किया गया था. यह समिति आर्थिक विकास को देखते हुए नीतिगत दरें तय करती है. इसमें महंगाई की दर का खास ध्यान रखा जाता है.

>> मौद्रिक नीति समिति में आरबीआई के गवर्नर सहित 6 विशेषज्ञ होते हैं. इसमें तीन सदस्य केंद्र सरकार और तीन आरबीआई के होते है. समिति की अध्यक्षता गवर्नर करते हैं.

>> समिति के हर सदस्य की सदस्यता चार वर्षों के लिए होती है. इस समिति के लिए वर्ष में कम से कम चार बैठकें करना जरूरी है.

>> आरबीआई का मौद्रिक नीति विभाग मौद्रिक नीति तैयार करने में एमपीसी की मदद करता है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ आरबीआई अकेला ही मौद्रिक नीति समिति के जरिए अर्थव्यवस्था में बैंकिंग प्रणाली पर नजर रखता है.

>> दुनिया में ऐसे तमाम देश हैं जो किसी विशेष समिति के जरिए मौद्रिक नीति तैयार करते हैं. अगर आसान शब्दों में जानें तो अमेरीका में 'फेडरल ओपन मार्केट कमेटी' की मदद से यह काम फेडरल रिजर्व करता है. जापान और ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक भी मौद्रिक नीति समिति के जरिए ही मौद्रिक नीति बनाते हैं.

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First published: October 4, 2019, 11:45 AM IST
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