RBI की सख्‍ती! वित्‍तीय अनियमितता रोकने को गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों और शहरी सहकारी बैंकों का होगा इंटरनल ऑडिट

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि जोखिम के दायरे में आने वाले शहरी सहकारी बैंक वरिष्‍ठ कार्यकारियों की समिति बनाएं.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आदेश दिया है कि जोखिम के दायरे में आने वाली गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों (NBFCs) और शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) का इंटरनल ऑडिट किया जाए. जोखिम के दायरे (Under Risk) में वो सभी एनबीएफसी आएंगी, जिनका आकार (NBFC Size) 5,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा है.

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    नई दिल्‍ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आदेश दिया है कि जोखिम के दायरे में आने वाली गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों (NBFCs) और शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) का इंटरनल ऑडिट किया जाए. साथ ही स्‍पष्‍ट किया कि जोखिम के दायरे (Under Risk) में वो सभी एनबीएफसी आएंगी, जिनका आकार (NBFC Size) 5,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा है. वहीं, 500 करोड़ रुपये ज्‍यादा के आकार वाले शहरी सरकारी बैंकों का भी ऑडिट किया जाएगा. दूसरे शब्‍दों में कहें तो इससे कम आकार वाले शहरी सहकारी बैंक और एनबीएफसी ऑडिट के दायरे से बाहर रहेंगे.

    RBI ने वरिष्‍ठ कार्यकारियों की समिति बनाने का आदेश दिया
    रिजर्व बैंक की ओर से जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक, इस ऑडिट में कंपनी की स्वतंत्रता, अधिकार, स्रोत और पेशेवर क्षमता पर फोकस रहेगा. माना जा रहा है कि आरबीआई के इस कदम से गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों की वित्‍तीय गड़बड़ियों पर अंकुश लगेगा. बता दें कि हाल के दिनों में एनबीएफसी में वित्‍तीय अनियमितताओं के कई मामले सामने आए हैं. आरबीआई ने कहा है कि एनबीएफसी और शहरी सहकारी बैंक वरिष्‍ठ कार्यकारियों की एक समिति बनाएं. ये समिति बोर्ड और सीनियर मैनेजमेंट के मुद्दों की प्रगति रिपोर्ट देखेंगे. किसी तरह की समस्‍या होने पर यही समिति समाधान भी तलाशेगी.

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    एनबीएफसी औ यूसीबी का बोर्ड ही करेगा इंटरनल ऑडिट
    आरबीआई के निर्देश के मुताबिक, एनबीएफसी और यूसीबी का बोर्ड इंटरनल ऑडिट करेगा. बोर्ड ही यह भी सुनिश्चित करेगा कि इंटरनल ऑडिट पर तय समय में कार्रवाई की जाए. साथ ही सीनियर मैनेजमेंट इंडिपेंडेंट ऑडिट फंक्शन को बनाने के लिए जिम्मेदार होंगे. इसमें अकाउंटबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी को भी बढ़ावा देना शामिल होगा. इंटरनल ऑडिट फंक्शन को यह देखना होगा कि वह गवर्नेंस को सुधारे और इसे बिजनेस के फैसलों के लिए लागू करे. आरबीआई ने कहा है कि इंटरनल ऑडिट फंक्शन के पास पूरे अधिकार होने चाहिए.