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रियल एस्टेट सेक्टर के लिए खतरे की घंटी! होम लोन पर बढ़ता ब्याज बिगाड़ सकता है कंज्यूमर सेंटिमेंट

विशेषज्ञों ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो होम लोन सेगमेंट पर बुरा असर पड़ सकता है.

विशेषज्ञों ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो होम लोन सेगमेंट पर बुरा असर पड़ सकता है.

Home Loan get Expensive: मई 2020 में रेपो रेट की दर 4 प्रतिशत लेकिन अब यह दर 5.90 प्रतिशत तक पहुंच गई है. विशेषज्ञों का ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

एक्सपर्ट ने कहा- ब्याज में बढ़ोतरी से इकोनॉमिक रिवाइवल और कंज्यूमर सेंटिमेंट प्रभावित हो सकते हैं.
ब्याज दरों में तेज गिरावट से पिछले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर हाउसिंग डिमांड बढ़ी है.
लगातार बढ़ती ब्याज दरों से होम लोन सेंगमेंट पर तगड़ी मार पड़ सकती है.

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लगातार चार बार रेपो रेट में बढ़ोतरी से होम लोन पर ब्याज की दरें जून 2019 के स्तर पर पहुंच गई है. इसके साथ ही सभी कैटेगरी के लोन पर इंटरेस्ट रेट 3 साल के उच्च स्तर पर हैं. अगर आने वाले दिनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहता है तो होम लोन पर इंटरेस्ट भी बढ़ेगा और यह कंज्यूमर सेंटिमेंट को बिगाड़ सकता है. जानकारों का कहना है कि इससे होम लोन सेगमेंट पर बुरा असर पड़ सकता है.

दरअसल होम लोन सेगमेंट में अगस्त 2022 को समाप्त 12 महीने की अवधि के दौरान आउटस्टैंडिंग में 16.4 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली. जबकि एक साल पहले यह बढ़ोतरी 11.6 प्रतिशत पर थी. आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2022 को समाप्त 12 महीने की अवधि में आवास ऋण बकाया 2.51 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 17.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 1.85 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 15.34 लाख करोड़ रुपये हो गया था.

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3 साल के उच्च स्तर पर ब्याज दरें
मई 2020 में रेपो रेट की दर 4 प्रतिशत लेकिन अब यह दर 5.90 प्रतिशत तक पहुंच गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना है जिसकी वजह से होम लोन सेक्टर पर तगड़ी मार पड़ सकती है.

श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस के एमडी और सीईओ रवि सुब्रमण्यन ने कहा, ‘यहां से आगे इंटरेस्ट रेट में आक्रामक बढ़ोतरी से इकोनॉमिक रिवाइवल और कंज्यूमर सेंटिमेंट प्रभावित हो सकते हैं. एचडीएफसी ने पिछले हफ्ते आरबीआई के फैसले के तुरंत बाद रिटेल प्राइम लेंडिंग रेट में 50 बीपीएस की बढ़ोतरी की
थी, जिससे सभी श्रेणियों में होम लोन की दरें 8.10-9 प्रतिशत तक बढ़ गईं.

कंज्यूमर सेंटिमेंट बिगड़ने का डर
चीफ इकोनॉमिस्ट सामंतक दास के अनुसार, रेपो रेट में वृद्धि रियल एस्टेट सेक्टर, विशेष रूप से रेसिडेंशियल सेगमेंट के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि इससे मॉर्गरेज रेट में बढ़ोतरी होगी. अप्रैल 2022 से आरबीआई ने अब तक रेपो रेट में 190 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की है और इससे होम लोन की दरों
में औसतन 80 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि हुई है और आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी की जा रही है.

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पिछले वर्ष की तुलना में 2022 की पहली छमाही के दौरान आवासीय इकाइयों की बिक्री में दो गुना से अधिक की वृद्धि हुई है. सामंतक दास ने कहा कि पिछले हफ्ते रेपो दर में बढ़ोतरी से होम लोन ईएमआई में वृद्धि होगी. इसलिए, अगर लगातार ब्याज की दरें बढ़ती हैं तो होम लोन सेगमेंट के सेंटिमेंट खराब हो सकते हैं. हमारा मानना ​​है कि होम लोन पर ब्याज दरें 9 फीसदी या इससे अधिक होने से मध्यम अवधि में हाउसिंग सेल्स ग्रोथ में कमी आ सकती है. वहीं, अनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि ब्याज दरों में तेज गिरावट से पिछले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर हाउसिंग डिमांड बढ़ी है.

Tags: Home loan EMI, How to take a cheap home loan, RBI

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