RBI ने FY22 में G-Secs बॉन्ड्स के जरिये जुटाये 2.7 लाख करोड़, जानिए क्या होता है G-Secs बॉन्ड

RBI ने 4025 करोड़ रुपये के 10 साल वाले बॉन्ड बेचे जिसका कट-ऑफ यील्ड 5.99% है।

FY22 में RBI ने G-Secs यानी गवर्मेंट सिक्योरिटीज के जरिये 2.70 लाख करोड़ रुपये जुटाये हैं। जबकि केंद्र सराकर ने FY22 में 12.05 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने का टार्गेट रखा है.

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    नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शुक्रवार को 9975 करोड़ रुपये के 10 साल वाले बॉन्ड को रिजेक्ट कर दिया, ताकि 10 साल में मैच्योर होने वाले बॉन्ड के मिनिमम बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) को 6% पर रखा जा सके. वित्त वर्ष 2021-22 में यह दूसरा मौका है जब RBI ने 5.85% के GS 2030 बॉन्ज के बिड को डिवॉल्व (devolved ) यानी ट्रांसफर किया है. आपको बता दें कि डिवॉल्वमेंट (devolvement) उस प्रक्रिया को कहते हैं, जिसमें बॉन्ड के अंडरराइटर्स खासकर प्राइमरी डीलर्स को बिना बिके हुए बॉन्ड (unsold bonds) को खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है. RBI ने डिवॉल्वमेंट के जरिये 32,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वह इसके जरिये 16,774 करोड़ रुपये ही जुटा पाई.


    FY22 में 12.05 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने का टार्गेट रखा है


    FY22 में RBI ने G-Secs यानी गवर्मेंट सिक्योरिटीज के जरिये 2.70 लाख करोड़ रुपये जुटाये हैं. जबकि केंद्र सरकार ने FY22 में 12.05 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने का टार्गेट रखा है. यह सरकार के कुल उधार (Borrowing Target) लेने के लक्ष्य का 22.6% है. RBI ने शुक्रवार को कुल 16,774 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे, जबकि योजना 32,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचने की थी.  


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    बचे हुए बॉन्ड RBI ने प्राइमरी डीलर्स को डिवॉल्व किया


    RBI ने 4025 करोड़ रुपये के 10 साल वाले बॉन्ड बेचे जिसका कट-ऑफ यील्ड 5.99% है. वहीं, 4.19% के ब्याज दर पर 3750 करोड़ रुपये के 2 साल वाले पेपर बेचे। जबकि, 6.96% इंटरेस्ट रेट पर 9000 करोड़ रुपये मूल्य के 40 साल वाले बॉन्ड बेचे. जबकि, बचे हुए बॉन्ड RBI ने प्राइमरी डीलर्स को डिवॉल्व किया.


    क्या होता है G-Sec


    सरकार आमतौर पर सरकारी प्रतिभूतियों यानी सिक्योरिटीज (G-Secs) के द्वारा कर्ज लेती है। मार्केट स्टेबिलाइजेशन बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, स्पेशल सिक्योरिटीज, गोल्ड बॉन्ड, स्माल सेविंग स्कीम, कैश मैनेजमेंट बिल आदि के द्वारा जो भी पैसा आता है, वह सरकार के लिए कर्ज होता है. जब कोई किसी G-Secs या सरकारी बॉन्ड में निवेश करता है तो वह सरकार को कर्ज दे रहा होता है. सरकार एक निश्चित समय के बाद यह कर्ज लौटाती है और एक निश्चित ब्याज देती है. आमतौर पर सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे कि सड़कें, स्कूल आदि बनाने के लिए G-Secs जारी करती है.

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