RBI ने कम किया EMI का बोझ, जानें अब हर महीने कितना बचेगा आपका पैसा?

RBI ने कम किया EMI का बोझ, जानें अब हर महीने कितना बचेगा आपका पैसा?
RBI ने ब्‍याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की है. इससे होम और ऑटो लोन की EMI में कमी आने की उम्मीद बढ़ गई है.

RBI ने ब्‍याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की है. इससे होम और ऑटो लोन की EMI में कमी आने की उम्मीद बढ़ गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 7, 2019, 4:28 PM IST
  • Share this:
होम और ऑटो लोन की ईएमआई चुकाने वाले ग्राहकों के लिए RBI बड़ी खुशखबरी लेकर आया है. RBI ने ब्‍याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की है. इससे होम और ऑटो लोन की EMI में कमी आने की उम्मीद बढ़ गई है. रेपो रेट घटने से आपके लिए बैंकों से कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा और आपकी ईएमआई भी घट सकती हैं. आपकी ईएमआई कितनी घटेगी इसके लिए अपने लोन की मूल राशि, ब्याज दर, कितने साल के लिए लोन लिया है और फिलहाल ईएमआई कितनी है, इसके आधार पर कैलकुलेट हो सकता है. आइए जानें...

ये भी पढ़ें-52 दिन में बदल जाएगा होम-पर्सनल और ऑटो लोन का नियम, जानिए इसकी सभी बातें

होम लोन EMI का बोझ- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आपने 30 लाख रुपये का होम लोन लिया हुआ है. वहीं, इसकी अवधि 20 साल है. मौजूदा दर 8.95 फीसदी के हिसाब से आपकी ईएमआई 26,895 रुपये बैठती है. अब बैंक भी आरबीआई के बाद 0.25 फीसदी दरें घटाने का फैसला लेता है, तो आपकी नई ईएमआई 26416 रुपये होगी. इस तरह से आप हर महीने 479 रुपये की बचत कर पाएंगे.



ये भी पढ़ें-RBI का किसानों को तोहफा! बिना गिरवी रखे अब मिलेगा इतने लाख रुपये का लोन



ये भी पढ़ें-इस राज्य ने महिलाओं को दिया बड़ा तोहफा, शादी करने पर देगी 10 ग्राम सोना

रेपो रेट क्या है - जिस रेट पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट कम होने का मतलब यह है कि बैंक से मिलने वाले लोन सस्ते हो जाएंगे. रेपो रेट कम हाने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं.

रिवर्स रेपो रेट क्या होता है-जिस रेट पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आती है. बहुत ज्यादा नकदी होने पर आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देती है.

एसएलआर क्या है-जिस रेट पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे एसएलआर कहते हैं. नकदी को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है, जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है.

सीआरआर क्या है- बैंकिंग नियमों के तहत सभी बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित रकम रिजर्व बैंक के पास जमा करनी होती है, जिसे कैश रिजर्व रेशियो यानी सीआरआर कहते हैं.

एमएसएफ क्या है-आरबीआई ने इसकी शुरुआत साल 2011 में की थी. एमएसएफ के तहत कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1 फीसदी तक लोन ले सकते हैं.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading