आम आदमी को जल्द मिल सकता है बड़ा फायदा, कम होगी आपके लोन की EMI

जहां पर नोट फेंके गए उसके पास ही कच्ची बस्ती मौजूद है. यहां पर बड़ी संख्या में मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं. ऐसे में यदि नोट सही में संक्रमित हुए तो लोगों में संक्रमण का खतरा है. ()
जहां पर नोट फेंके गए उसके पास ही कच्ची बस्ती मौजूद है. यहां पर बड़ी संख्या में मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं. ऐसे में यदि नोट सही में संक्रमित हुए तो लोगों में संक्रमण का खतरा है. ()

आरबीआई फेडरल रिजर्व के ग्लोबल स्वैप लाइन फैसिलिटी का हिस्सा नहीं है, लेकिन वित्तीय बाजार में फ्रीजिंग जैसी स्थिति से बचने के लिए उभरते देशों के केंद्रीय बैंक के साथ सहयोग करने के लिए वह दरों में कटौती कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 16, 2020, 1:38 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते प्रकोप से निवेशकों में खौफ का माहौल है, जिसके कारण पूरी दुनिया के शेयर बाजारों (Share Market) में गिरावट का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में यूएस फेडरल रिजर्व बैंक (फेड) ने बेंचमार्क ब्याज दर जो एक फीसदी से 1.25 फीसदी थी उसे घटाकर शून्य से 0.25 फीसदी कर दिया है. आरबीआई फेडरल रिजर्व के ग्लोबल स्वैप लाइन फैसिलिटी का हिस्सा नहीं है, लेकिन वित्तीय बाजार में फ्रीजिंग जैसी स्थिति से बचने के लिए उभरते देशों के केंद्रीय बैंक के साथ सहयोग करने के लिए वह दरों में कटौती कर सकता है.

RBI गवर्नर की शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाली है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरबीआई रेपो रेट में कटौती की घोषणा कर सकती है. रेपो रेट में कटौती की घोषणा होने के बाद बैंक ब्याज दरों में कटौती कर सकती हैं. ब्याज दरों में कटौती से आपके लोन की ईएमआई घट जाएगी और आपको बड़ी बचत हो सकती है.

ब्याज दरों को जीरो किया
वित्तीय बाजार के संकट को टालने के लिए बाकी उभरते देश के केंद्रीय बैंक की तरह भारत का बैंकिंग नियामक रिजर्व बैंक भी दरें कम करने की रणनीति में शामिल हो सकता है. कोरोना वायरस के प्रकोप से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने की दिशा में अमेरिका के केंद्रीय बैंक यूएस फेडरल रिज़र्व ने बड़ा कदम उठाया है. फेडरल रिज़र्व ने प्रमुख ब्याज दरों में कटौती की है. यूएस फेड ने ब्याज दरों को घटाकर लगभग जीरो कर दिया है.
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कोरोना वायरस के खतरे को कम करने के लिए लिया गया फैसला
कोरोना वायरस के खतरे को कम करने की दिशा में यूएस फेड का यह बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला है. इससे अमेरिका ने एसेट्स की खरीद में हजारों बिलियन डॉलर के सस्ते डॉलर फाइनेसिंग ऑफर से विदेशी अथॉरिटी को पीछे छोड़ दिया है.

विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए आरबीआई ने पिछले हफ्ते दो अरब डॉलर का स्वैप ऑप्शन कराया था. एक्सपर्ट्स की माने तो टूर ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट चेन का बिजनेस कोरोना की वजह से पटरी से उतर सकता है. अगर ग्राहक नहीं आते तो उनके पेमेंट में दिक्कत हो सकती है.

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