मुद्रास्फीति 4 फीसदी के आसपास रोकने की जिम्मेदारी 5 साल के लिए उपयुक्त: RBI रिपोर्ट

 एफआईटी से पहले मुद्रास्फीति दर नौ प्रतिशत की उच्चस्तर पर थी

एफआईटी से पहले मुद्रास्फीति दर नौ प्रतिशत की उच्चस्तर पर थी

कोविड के दाैरान आंकड़ों का संकलन गड़बड़ा गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि एफआईटी से पहले मुद्रास्फीति (Inflation)दर नौ प्रतिशत की उच्चस्तर पर थी जो कि एफआईटी आवधि में घटकर 3.8 से लेकर 4.3 प्रतिशत की दायरे में आ गई. इससे यह संकेत मिलता है कि देश में मुद्रास्फीति के लिए चार प्रतिशत उपयुक्त लक्ष्य है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 9:13 PM IST
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नई दिल्ली. मुद्रास्फीति (Inflation) 4 फीसदी के आप-पास रोकने की जिम्मेदारी 5 साल के लिए उपयुक्त है. शुक्रवार काे रिर्जव बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने यह बात कही. आरबीआई ने कहा मुद्रास्फीति के इस लक्ष्य को चार प्रतिशत रखा गया है जिसमें दो प्रतिशत नीचे और दो प्रतिशत ऊपर तक का दायरा तय किया गया है. देश में मुद्रास्फीति लक्ष्य का दायरा तय करने की व्यवस्था को 2016 में अपनाया गया था. इस व्यवस्था को लेकर 31 मार्च 2021 को इसकी समीक्षा की जानी है.



रिजर्व बैंक की मुद्रा और वित्त पर जारी 2020- 21 की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘मूल्य स्थिरता के लिए तय की गई मौजूदा आंकड़ागत व्यवस्था जिसमें मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत की घटबढ़ के दायरे के साथ चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य तय किया गया है.’’  रिजर्व बैंक ने कहा है कि रिपोर्ट में यह अध्ययन अक्ट्रबर 2016 से लेकर मार्च 2020 की अवधि का है। इस अवधि के दौरान ही देश में लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्य (एफआईटी) व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू किया गया.



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इसलिए चार प्रतिशत उपयुक्त लक्ष्य है


इसमें कोविड- 19 महामारी की अवधि को अलग रखा गया है क्योंकि इस दौरान आंकड़ों का संकलन गड़बड़ा गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि एफआईटी से पहले मुद्रास्फीति दर नौ प्रतिशत की उच्चस्तर पर थी जो कि एफआईटी आवधि में घटकर 3.8 से लेकर 4.3 प्रतिशत की दायरे में गई. इससे यह संकेत मिलता है कि देश में मुद्रास्फीति के लिए चार प्रतिशत उपयुक्त लक्ष्य है.



इसमें कहा गया है कि उंचे में 6 प्रतिशत मुद्रास्फीति लक्ष्य इसका उचित वहनीय दायरा है जबकि नीचे में दो प्रतिशत से ऊपर का इसका दायरा वास्तविक मुद्रास्फीति के इससे नीचे जाने वहनीय स्तर से नीचे जाने को प्रेरित कर सकता है. जबकि दो प्रतिशत से नीचे का दायरा वृद्धि को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे यह संकेत मिलता है कि नीचे में मुद्रास्फीति का दो प्रतिशत का दायरा उचित स्तर है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एफआईटी की इस अवधि में समूचे मुद्रा बाजार में मौद्रिक प्रसार पूरा और तार्किक तौर पर बेहतर रहा लेकिन बांड बाजार में यह पूर्णता से कुछ कम रहा.


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