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RBI के रेपो रेट घटाने और बढ़ाने से आम आदमी पर क्या होगा असर ? जानिए इससे जुड़ी सभी बातें

रिजर्व बैंक (RBI- Reserve Bank of India) के ब्याज दरें घटाने से क्या होता है? आइए जानें इससे जुड़ी सभी बातें
रिजर्व बैंक (RBI- Reserve Bank of India) के ब्याज दरें घटाने से क्या होता है? आइए जानें इससे जुड़ी सभी बातें

रिजर्व बैंक (RBI- Reserve Bank of India) के ब्याज दरें घटाने से क्या होता है? आइए जानें इससे जुड़ी सभी बातें

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 8:54 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार के साथ-साथ RBI भी लगातार कदम उठा रहा है. आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) तीन की बैठक के बाद अपना फैसला सुनाएगा. इस फैसले पर कारोबारियों के साथ-साथ आम आदमी की निगाहें भी रहती है. क्योंकि रेपो रेट घटने और बढ़ने के बाद बैंक ब्याज दरें घटा और बढ़ा देते है. ब्याज दरें घटाने का मतलब है कि अब बैंक जब भी RBI से फंड (पैसे) लेंगे, उन्हें नई दर पर फंड मिलेगा. सस्ती दर पर बैंकों को फंड मिलेगा तो इसका फायदा बैंक अपने उपभोक्ता को भी देंगे. यह राहत आपके साथ सस्ते कर्ज और कम हुई EMI के तौर पर बांटी जाती है. इसी वजह से जब भी रेपो रेट घटता है तो आपके लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है. साथ ही जो कर्ज फ्लोटिंग हैं उनकी ईएमआई भी घट जाती है.

आपने आरबीआई क्रेडिट पॉलिसी के दौरान रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर जैसे शब्द जरूर सुने होंगे. पर क्या आप इन शब्दों के मतलब जानते हैं. आज हम आपको इसका मतलब और मायने बता रहे हैं. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की आर्थिक समीक्षा नीतियों से जुड़े इन शब्दों के बारे में जानिए.

क्या होता है रेपो रेट-जिस रेट पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट कम होने का मतलब यह है कि बैंक से मिलने वाले लोन सस्ते हो जाएंगे. रेपो रेट कम हाेने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं.



क्या होता है रिवर्स रेपो रेट-जिस रेट पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आता है. बहुत ज्यादा नकदी होने पर आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देती है.
क्या है SLR-जिस रेट पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे एसएलआर कहते हैं. नकदी को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है, जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है.

क्या है CRR -बैंकिंग नियमों के तहत सभी बैंकों को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा करना होता है, जिसे कैश रिजर्व रेशियो यानी सीआरआर कहते हैं.

क्या है MSF -आरबीआई ने इसकी शुरुआत साल 2011 में की थी. एमएसएफ के तहत कमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1 फीसदी तक लोन ले सकते हैं.
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