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फिस्कल डेफिसिट पूरा करने के लिए अधिक नोट छापने की कोई योजना नहीं- RBI

भाषा
Updated: February 6, 2020, 5:42 PM IST
फिस्कल डेफिसिट पूरा करने के लिए अधिक नोट छापने की कोई योजना नहीं- RBI
अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6% रहने का अनुमान

बजट में राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है जबकि पिछले बजट में इसके 3.3 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी. वहीं अगले वित्त वर्ष 2020-21 के लिये राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि जुलाई 2019 में इसके 3 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी.

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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय बैंक की बढ़ते राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को पूरा करने के लिये अधिक रुपया छापने की कोई योजना नहीं है. यह लगातार तीसरा साल है जब सरकार ने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को संशोधित किया है. बजट (Budget 2020) में राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है जबकि पिछले बजट में इसके 3.3 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी. वहीं अगले वित्त वर्ष 2020-21 के लिये राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि जुलाई 2019 में इसके 3 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी. सरकार का राजकोषीय घाटा दिसंबर अंत में 132 प्रतिशत को पार कर गया है.

दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाताओं से कहा, राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिये अतिरिक्त नोट छापने की कोई योजना नहीं है. सरकार ने बजट में राजकोषीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून के तहत छूट उपबंध का उपयोग किया है. इसके अंतर्गत राजकोषीय घाटा रूपरेखा के लिये 0.5 प्रतिशत वृद्धि की गुंजाइश उपलब्ध है. ये भी पढ़ें: नए-पुराने टैक्स स्लैब में कितना लगेगा टैक्स, अब घर बैठे ऐसे लगाएं पता



अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6% रहने का अनुमान

रिजर्व बैंक ने अनिश्चित वैश्विक माहौल और घरेलू बाजार में मुद्रास्फीति तेज होने तथा बजट में राजकोषीय घाटे का अनुमान बढ़ाये जाने के बीच बृहस्पतिवार को चालू वित्त वर्ष की अंतिम मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो दर 5.15 प्रतिशत के स्तार ही बनाए रखने का निर्णय किया.

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की यह लगातार दूसरी बैठक है, जिसमें रेपो दर को स्थिर रखा गया है. नीतिगत दर को नरम न करने के बावजूद मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत झुकाव उदार बनाए रखा है. इसका तात्पय्र है कि वह आर्थिक वृद्धि दर तेज करने के लिए कर्ज सस्ता रखने के पक्ष में है. ये भी पढ़ें: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने किया सावधान! ये SMS खाली कर सकता हैं आपका बैंक खाता

 

रिजर्व बैंक ने 2019- 20 में आर्थिक वृद्धि दर के 5 प्रतिशत रहने के अनुमान को भी बनाये रखा. उसने कहा कि आर्थिक वृद्धि 2020-21 में सुधरकर छह प्रतिशत हो सकती है. आरबीआई का कहना है कि आर्थिक वृद्धि अभी अपनी संभावित क्षमता से कम है. मौद्रिक नीति समिति ने अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिये मुद्रास्फीति का अनुमान 0.30 प्रतिशत बढ़ाकर 5.4-5 प्रतिशत कर दिया. समिति ने कहा कि मुद्रास्फीति का परिदृश्य अभी बड़ा अनिश्चित है.

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें घटने के दिए संकेत
रिजर्व बैंक ने कहा कि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को समायोजित करने की जरूरत है. उसने कहा कि अक्टूबर से अपनायी गयी बाह्य मानक प्रणाली ने मौद्रिक नीति का लाभ बेहतर तरीके से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में मदद की है. सरकार अप्रैल से शुरू हो रही तिमाही में छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें घटा सकती है.

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First published: February 6, 2020, 5:37 PM IST
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