डिजिटल पेमेंट में बड़े बदलाव की तैयारी में RBI, मार्च 2022 तक लागू करना होगा ये नियम

 QR Code के जरिए पेमेंट
QR Code के जरिए पेमेंट

RBI ने QR Code के जरिए पेमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है. डी बी पाठक की अध्यक्षता वाली कमेटी की सुझावों के आधार पर 31 मार्च 2022 तक इंटरऑपरेबल क्विक रिस्पॉन्स कोड (Interoperable QR Code) को अपनाना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 7:36 AM IST
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नई दिल्ली. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को कहा कि सभी पेमेंट ऑपरेटर्स को मार्च 2022 तक इंटरऑपरेबल क्विक रिस्पॉन्स कोड (Interoperable QR Code) को अपनाना होगा. RBI के इस आदेश का मतलब है कि पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स को एक ऐसे क्यूआर कोड सिस्टम में शिफ्ट करना होगा, जो दूसरे पेमेंट ऑपरेटर्स (Payment System Operators) द्वारा भी स्कैन हो सके. इस प्रोसेस को लागू करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2022 तय की गई है. प्रोफेसर दीपक पाठक की अगुवाई वाली एक कमेटी ने अगले दो साल में इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड्स में बदलाव को लेकर कई सुझाव दिए थे. वर्तमान में, देश में तीन तरह के QR कोड चलते हैं. ये Bharat QR, UPI QR और प्रोपराइटरी QR कोड हैं. UPI QR और Bharat QR पहले की तरह ही जारी रहेंगे.

पेमेंट ऑपरेटर्स की होगी जागरुकता की जिम्मेदारी
केंद्रीय बैंक की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि इंटरऑपरेबल QR कोड्स के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स को पहली करनी होगी. पाठक ​कमेटी के इस सुझाव से पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद मिलेगी. इंटरऑपरेबिलिटी की वजह से आम लोगों को सहूलियत होगी और पेमेंट ​सिस्टम भी पहले से बेहतर हो सकेगा.

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पिछले साल दिसंबर में बनी थी कमेटी


बता दें कि केंद्रीय बैंक ने 23 दिसंबर 2019 को एक कमेटी का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता डी बी पाठक को दी गई थी. इस कमेटी को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वो मौजूदा QR Code सिस्टम का रिव्यू करे और उचित सुझाव दे ताकि इंटरऑपरेबल QR कोड ​सिस्टम को लागू किया जा सके.

इसके बाद RBI को इस कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट को RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर पब्लिश किया ताकि पब्लिक कमेंट्स व फीडबैक प्राप्त किया जा सके. जुलाई में कमेटी ने सिफारिश की थी कि QR कोड के जरिए लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए इं​सेटिव्स दिया जाए.

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सेल्फ-रेगुलेटरी संस्था पर जोर
RBI ने इसके लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Framework) भी तैयार किया है ताकि देश में विभिन्न तरह के पेमेंट सिस्टम ऑपरेट किए जा सकें. केंद्रीय बैंक ने पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स के लिए सेल्फ-रेगुलेटरी संस्था (Self-Regulatory Organisation) के स्थापना को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया. सेल्फ-रेगुलेटरी संस्था एक गैर-सरकारी संस्था होती है जो अपनी सदस्य ईकाईयों के लिए इंडस्ट्री के आधार पर निमय व मानक तय करती है. यही संस्था ग्राहकों के हित की रक्षा भी करती है.
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