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लोन सस्‍ता होने की उम्‍मीदों को लग सकता है झटका, आज RBI करेगा प्रमुख दरों का ऐलान

सुरंग फोर्ट के आरबीआई कॉम्प्लेक्स से होकर गुजरती है. ऐसे में आरबीआई के अधिकारी चाहते हैं कि वह इस बात से आश्वस्त हो सकें कि सुरंग में और कोई निकलने का छिपा रास्ता तो नहीं है.
सुरंग फोर्ट के आरबीआई कॉम्प्लेक्स से होकर गुजरती है. ऐसे में आरबीआई के अधिकारी चाहते हैं कि वह इस बात से आश्वस्त हो सकें कि सुरंग में और कोई निकलने का छिपा रास्ता तो नहीं है.

एक्‍सपर्ट्स की मानें तो अधिक संभावना आरबीआई द्वारा दरों में कोई बदलाव नहीं करने की है, क्‍योंकि महंगाई के साथ ही तेल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 7, 2018, 10:24 AM IST
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लोगों के साथ ही बाजार के लिए भी आज का दिन खास है, क्‍योंकि रिजर्व बैंक दोपहर में मॉनिटरी पॉलिसी स्‍टेटमेंट जारी करेगा. एक्‍सपर्ट्स की मानें तो अधिक संभावना आरबीआई द्वारा दरों में कोई बदलाव नहीं करने की है, क्‍योंकि महंगाई के साथ ही तेल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं. बजट में ऐसे कई ऐलान हुए हैं, जिनसे महंगाई को हवा मिल सकती है. इन घोषणाओं से सरकार का फिस्‍कल डेफिसिट बढ़ने की भी संभावना है. ऐसे में प्रमुख दरों में कटौती की गुंजाइश बहुत कम रह गई है. इस तरह जिन लोगों ने ब्‍याज दरों में और कटौती की उम्‍मीदें पाल रखी हैं, उन्‍हें आज धक्‍का लग सकता है.

आक्रामक रह सकता है आरबीआई का रुख
माना जा रहा है कि आरबीआई भले ही दरें नहीं बढ़ाएगा, लेकिन उसका रुख आक्रामक रह सकता है, क्‍योंकि उस पर प्रमुख दरें बढ़ाने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है. ऐसे में लोगों को सस्‍ते कर्ज और ईएमआई में अभी राहत शायद ही मिल सकता है.

महंगाई और तेल कीमतों का दबाव
मॉनिटरी पॉलिसी रीव्‍यू में प्रमुख दरों में बदलाव की संभावना नहीं है. महंगाई 5.3 फीसदी के स्‍तर पर है और तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. बजटीय घोषणाओं का भी सरकार पर दबाव है. फिस्‍कल डेफिसिट बढ़ने के साथ ही महंगाई और बढ़ने की संभावना है. ऐसे में रेट कट की गुंजाइश नहीं के बराबर है.



चंद दिनों पहले कुछ सर्वे में जिन इकोनॉमिस्‍ट्स से इस संदर्भ में बातचीत की गई, उनमें से अधिकांश का यही मानना था कि अभी रेट कट के लिए उचित माहौल नहीं है. ऐसे में सरकार का दबाव भी शायद ही काम आएगा और आरबीआई की पहली प्राथमिकता महंगाई को नियंत्रित करना होगा. इन सबके बावजूद अगर रिजर्व बैंक रेट में कटौती करता है तो यह 0.25 फीसदी से ज्‍यादा नहीं हो सकती है.

अगस्‍त में हुई थी कटौती
पिछली बार रिजर्व बैंक ने अगस्‍त में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी. अभी रेपो रेट 6 फीसदी है, जो पिछले 6 साल में सबसे निचला स्‍तर है. इसके बाद की दो मॉनिटरी पॉलिसी में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया.

ग्रोथ में तेजी से महंगाई की आशंका
सरकार के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमणियन ने इकोनॉमिक सर्वे के बाद कहा था कि ग्रोथ में तेजी आ रही है और महंगाई बढ़ रही है. ऐसे में रिजर्व बैंक के पास दरों में कटौती की गुंजाइश बहुत कम है.

दिसंबर में महंगाई 5.21 फीसदी रही
खाद्य वस्‍तुओं की कीमतें बढ़ने के कारण दिसंबर माह में खुदरा महंगाई 5 फीसदी से ऊपर 5.21 फीसदी तक पहुंच गई थी.

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