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जानिए आख़िर कितनी लागत आती है एक कार काे बनाने में..और आप तक पहुंचते-पहुंचते कैसे दुगनी हाे जाती है क़ीमत

सांकेतिक फाेटाे

सांकेतिक फाेटाे

कभी आपने यह साेचा है कि जाे कार आप काे ऑन राेड पांच लाख रुपए की मिल रही है उसे बनाने में वास्तविक कितना पैसा लगता हाेगा.और आप तक पहुँचते हुए वह कितनी महंगी हाे जाती है?

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    अमित देशमुख. नई दिल्ली. नई कार का ख़्याल आते ही सबसे पहले हमारे ज़हन में बजट बन जाता है कि कम से कम पांच लाख, वाे भी यदि हम शुरूआती स्तर पर यानि मारूती वैगनआर, हुंडई की सेंट्राे या आई 10 लेने का मन बना रहे हाेते है. हम शो रूम जाते है वहां हमें कुछ डिस्काउंट मिल जाता है ताे दिल और ज़्यादा खुश हाे जाता है. ऊपर से डीलर अपनी तरफ़ से काेई गिफ़्ट दे दें ताे फिर कहना ही क्या. लेकिन क्या आपकाे पता है आपकाे मिलने वाला एक्ट्रा डिस्काउंट, गिफ़्ट तक भी पैसा आपसे लिया जा चुका रहता है. यही नहीं कभी आपने यह साेचा है कि जाे कार आप काे ऑन राेड पांच लाख रुपए की मिल रही है उसे बनाने में वास्तविक कितना पैसा लगता हाेगा.और आप तक पहुँचते हुए वह कितनी महंगी हाे जाती है? चलिए आज यह भी जान लेते है कि एक कार काे बनने में कितनी लागत आती है और मार्केट तक आते-आते वह काैन-काैन से चार्ज है जाे उस पर लगते है जिसके चलते एक्स शाे रूम से ऑन राेड प्राइज (ON ROAD PRICE) तक आती है.

    कंपनी कितना कमाती है एक कार पर
    सबसे पहले शुरूआत करते है कार बनाने वाली कंपनी से. जानकार बताते है आम तौर पर किसी भी वाहन में कंपनी उत्पादन लागत (Manufacturing cost) से लगभग 75 से 125 प्रतिशत का लाभ मार्जिन रखती है, उदाहरण के ताैर पर यदि वाहन का उत्पादन लागत एक लाख रुपए की है ताे विक्रय मूल्य वैट को छोड़कर वाहन लगभग 1 लाख 75 हजार से 2 लाख 25 हजार के बीच का हाेगा। कुछ मामलों में यह मार्जिन 200 प्रतिशत भी हाे सकता है जाे कि इस बात पर निर्भर करता है कि मैन्युफैक्चिरंग प्लांट काे सरकार से क्या-क्या सब्सिडी मिल रही है. किसी को आश्चर्य होगा कि यह इतना लाभ क्यों है, लेकिन वास्तविक रूप से स्टील की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण अप्रत्यक्ष नुकसान भी उठाना पड़ता है एक कार काे तैयार करने में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा स्टील का हाेता है।

    सरकार कितना लेती है टैक्स
    अब बात करते है कि सरकार एक कार की लागत के ऊपर कितना टैक्स चार्ज करती है जिसे बाद में कार कंपनी उसे कार की क़ीमत में जाेड़ती है. ताे भारत में 1,200 सीसी और 1,500 सीसी के बीच इंजन क्षमता वाली मध्यम आकार की कारों पर 18 प्रतिशत जीएसटी से अधिक और 3 प्रतिशत उपकर (सेस )लगता है तो दूसरी ओर, 1,500 सीसी से बड़े इंजन वाली बड़ी काराें पर 28 प्रतिशत जीएसटी के ऊपर और ऊपर 15 प्रतिशत उपकर लगता है। क्याेंकि सरकार का ध्यान अब इलेक्ट्रिक वाहनाें काे बढ़ावा देना है इसलिए बजट में इन वाहनाें के पार्ट्र्स व अन्य ज़रूरी चीजाें पर जीएसटी और सेस कम किया गया। ऐसे में यदि मान ले कि छाेटी कार एक लाख की है ताे उसमे सरकार क़रीब 21 हज़ार रुपए टैक्स लेगी और बड़ी कार के ऊपर 40 हज़ार से ज़्यादा. यानि कंपनी ने वाहन पर 75 हज़ार का मुनाफ़ा भी जाेड़ा उस पर टैक्स जाे 21 हज़ार ले लेते है ताे अब एक लाख रुपए वाली कार की क़ीमत हाे गई दाे लाख. यहाँ से कार शाेरूम तक पहुँचाने का खर्चा, रास्ते के दाैरान भी इन काराें का बीमा करवाया जात है उसका खर्चा भी जुड़ता है.लेकिन कहानी अभी यही ख़त्म नहीं हाेती.

    अब बारी डीलर के मुनाफ़े की
    गाड़ी अब पहुँच गई डीलर के पास. अब डीलर काे एक कार पर कंपनी लगभग कितना मुनाफ़ा देती है वह भी जान लेते है. एंट्री लेवल की कार यानी आल्टाे, क्विड, सेंट्राे आदि पर डीलर काे 15 से 18 हज़ार के बीच मुनाफ़ा कंपनी देती है. इसके बाद एसयूवी सेग्मेंट की बात करे ताे यह राशि बढ़कर 32 से 36 हज़ार के बीच हाेती है, डीज़ल और पेट्राेल वाहनाें के अलग-अलग मुनाफ़ा कंपनी तय करती है. ताे ऐसे जाे कार कंपनी से बन कर टैक्स व अन्य खर्चे जाेड़कर दाे लाख से ऊपर की हाे गई वह डीलर तक आते-आते क़रीब 20 हज़ार और महंगी हाे गई। अब यहां एक लाख की कार की क़ीमत पहुँच गई 2 लाख 30 हज़ार के आसपास. इसके बाद आप शोरूम से कार के लिए जाे एसेसरीज लेते है उसमें भी डीलर 20 से 30 प्रतिशत तक मार्जिन निकाल लेते है. यानि यदि आपने दस हज़ार रुपए की एसेसरीज लगाई जिसमें म्यूज़िक सिस्टम, सीट कवर यह कुछ भी शामिल हाे उसके भी दाे से तीन हज़ार रुपए आपकाे ज़्यादा देने पड़े. बात भी भी यहां पर ख़त्म नहीं हुई.

    आरटीओ टैक्स भी अभी जुड़ना है
    कार के शाे-रूम प्राइज की कहानी ताे अब तक हाे गई. जिसमें सरकार काे टैक्स के साथ-साथ डीलर का प्रॉफिट भी निकल आया. अब बारी है राेड टैक्स व कार के रजिस्ट्रेशन चार्ज की जो आरटीओ काे देना हाेता है. कार के पंजीकरण पर शुल्क लगता है और वाहन के आधार पर शुल्क बदल जाता है। दिल्ली में, एक नई कार की कीमत रु 6 लाख को पेट्रोल के लिए 4% टैक्स देना पड़ता है, और एक डीजल कार खरीदार को 5% का भुगतान करना पड़ता है. 6 लाख से 10 लाख तक, पेट्रोल कारों पर 7% और डीजल कारों पर 8.75% शुल्क लिया जाता है। 10 लाख रुपये से ऊपर की कारों के लिए, पेट्रोल कार पर 10% और डीजल कार पर 12.5% ​​शुल्क लिया जाता है. अलग-अलग राज्याें के हिसाब से वहां आरटीओ नई गाड़ियाें पर राेड व अन्य टैक्स लगाता है, तो यदि अपनी एक लाख रुपए वाली कार की जब एक्स शाे रूम प्राइज़ हाे गई 2.30 हज़ार ताे उसमें न्यूनतम चार जाेड़े ताे क़रीब 10 हज़ार और आरटीओ के जाेड़ कर हाे गए 2 लाख 40 हजार. इसमें बीमा राशि भी और जाेड़ दे ताे अब यह कार हाे गई 2 हज़ार रुपए महंगी. यानि कुल मिलाकर जाे कार एक लाख में बन जाती है वाे हम तक आते-आते दाे गुनी से ज़्यादा महंगी हाे जाती है.

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