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Real Estate Update: पुरानी हाउसिंग स्कीम का हवाला देकर बच नहीं पाएंगे बिल्डर, समझिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

Real Estate Update: पुरानी हाउसिंग स्कीम का हवाला देकर बच नहीं पाएंगे बिल्डर, समझिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

Real Estate Update: बिल्डर (Builder) घर खरीदारों (Home Buyers) को पैसे वापस नहीं कर रहा है तो मूलधन और ब्याज या जुर्माना दोनों की वसूली भू-राजस्व कानून के हिसाब से हो सकती है.

Real Estate Update: बिल्डर (Builder) घर खरीदारों (Home Buyers) को पैसे वापस नहीं कर रहा है तो मूलधन और ब्याज या जुर्माना दोनों की वसूली भू-राजस्व कानून के हिसाब से हो सकती है.

Real Estate Update: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने घर खरीदारों (Home Buyers) से जुड़े दो अलग-अलग फैसले देते हुए बिल्डरों पर नकेल कसी है. अब रेरा (RERA) के अस्तित्व में आने से पहले के निर्माणाधीन हाउसिंग प्रोजेक्ट (Housing Project) भी इसके दायरे में होंगे.

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    नई दिल्ली. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दो अलग-अलग फैसले देते हुए बिल्डरों (Builder) पर नकेल कसी है. कोर्ट ने घर खरीदारों (Home Buyers) के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए कानून रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 का क्षेत्राधिकार बरकरार रखा है.
    न्यूज18 ने कोर्ट के दोनों फैसलों पर रियल एस्टेट (Real Estate) के विशेषज्ञों से बात कर इसके असर और फायदें को जाना. कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में साफ किया कि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम के तहत बने रेरा (RERA) के अस्तित्व में आने से पहले के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट भी इसके दायरे में होंगे. यही नहीं, यदि बिल्डर घर खरीदारों को पैसे वापस नहीं कर रहा है तो मूलधन और ब्याज या जुर्माना दोनों की वसूली भू-राजस्व कानून के हिसाब से हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक अब यह उम्मीद बंधी है कि घर खरीदारों को बेवजह की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी और धोखधड़ी करने वाले डेवलपरों पर लीक पर चलने का दबाव बनेगा. कोर्ट ने यह फैसला न्यूटेक प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्रा लिमिटेड बनाम यूपी और अन्य राज्य मामले में दिया है.
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    राज्य के नियम केंद्रीय कानून की मौलिकता से नहीं कर पाएंगे छेडछाड़
    प्रॉपर्टी कंसल्टेंट वीरेंद्र पूर्विया कहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से अब इस अधिनियम के आधार पर राज्य विशेष के नियमों में बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है.  कुछ राज्यों ने रेरा नियमों में चालू परियोजनाओं को परिभाषित किया है और इसके दायरे में विस्तार किया है लेकिन अब केंद्रीय कानून की मौलिकता से छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी. चालू परियोजनाओं को निश्चित तौर पर रेरा की निगरानी में लाए जाने की जरूरत है ताकि घर खरीदारों के हितों को सुरक्षा की जा सके. देरी से चल रहीं और निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का यही एकमात्र तरीका है
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    रेरा के दायरे में आएंगे पुराने प्रोजेक्ट, नहीं होगी देरी
    एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले से अन्यथा ही ठगे जा रहे घर खरीदारों का विश्वास दोबारा से बहाल होगा. गौरतलब है कि कई राज्यों में रेरा के नियमों को उदार बनाया गया था जिसका कुछ डेवलपरों द्वारा दुरुपयोग किया गया. रेरा के लागू होने तक कई ऐसी परियोजनाएं थी जो पूरी नहीं हो पाई थी और वे रेरा के दायरे में नहीं आईं. अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से ये निर्माणाधीन हाउसिंग प्रोजेक्ट भी रेरा के दायरे में आएंगी और इस प्रकार लंबी अवधि में घर खरीदारों को फायदा होगा. अब चूंकि रेरा के दायरे में ऐसी सारी परियोजनाएं आएंगी ऐसे में उन्हें इन परियोजनाओं को पूरा करना होगा.
    6,29,000 घरों का निर्माण नहीं हुआ पुरा
    जुलाई में जारी किए गए एनारॉक के आंकड़ों के मुताबिक देश के शीर्ष सात शहरों में करीब 6,29,000 आवासीय इकाई निर्माण के अलग अलग चरण में थे. इनका निर्माण 2014 या उससे पहले शुरू हुआ था और इनके निर्माण में काफी देरी हो चुकी है या फिर निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप पड़ चुका है.

    Tags: Buying a home, House, Housing project groups, Indian real estate sector, Real Estate Regulation & Development Act

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