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देसी गाय पालने से होगा मोटा मुनाफा! अब यूनिवर्सिटी में बीटेक-एमबीए के छात्र ऐसे सीखेंगे तरीका

देसी गाय पालने से होगा मोटा मुनाफा! अब यूनिवर्सिटी में बीटेक-एमबीए के छात्र ऐसे सीखेंगे तरीका

कर्नाटक सरकार ने गौ-वध विरोधी अध्यादेश जारी किया (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

कर्नाटक सरकार ने गौ-वध विरोधी अध्यादेश जारी किया (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

देशभर की कई यूनिवर्सिटी में कामधेनू पीठ (चेयर) स्थापित की जा सकती है. इसके तहत बीटेक और एमबीए के स्टूडेंट्स को भी देसी गाय के बारे में पढ़ाया जाएगा. यूजीसी समेत कई विभागों ने इस पर एक वेबीनार के जरिए चर्चा की है.

नई दिल्ली. देसी गाय (Cow) पालने से एक नहीं बल्कि कई तरह के फायदे हैं. देसी गाय पालकर आप बिजनेस करते हुए मोटा मुनाफा भी कमा सकते हैं. इतना ही नहीं, आपके इस बिजनेस को करने से पर्यावरण और समाज पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा. हेल्थ के नज़रिए से भी यह बिजनेस अच्छा है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब देशभर की सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेज में कामधेनू पीठ (चेयर) स्थापित की जा सकती है. यहां तक की बीटेक (B.Tech)-एमबीए (MBA) के छात्रों को भी देसी गाय के बारे में पढ़ाया जाएगा. राष्‍ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA), यूजीसी (UGC) और ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजूकेशन (AICTE) समेत कई विभागों ने एक वेबिनार के दौरान इस पर चर्चा की है. वहीं इस वेबिनार में शिक्षा राज्‍य मंत्री संजय धोत्रे भी मौजूद थे.

आरकेए के अध्यक्ष वेबिनार में कहीं यह बातें
आरकेए के अध्‍यक्ष वल्‍लभभाई कथीरिया ने वेबिनार के दौरान देश के सभी कुलपतियों और कॉलेज प्रमुखों से सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेज में कामधेनु पीठ स्‍थापित करने का अनुरोध किया. उन्‍होंने कहा कि हमें देसी गायों के कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्‍व के बारे में युवाओं को शिक्षित करने की जरूरत है. सरकार ने अब गायों और पंचगव्‍य की क्षमता का पता लगाने की शुरुआत की है, इसलिए स्‍वदेशी गायों और हमारी शिक्षा प्रणाली से संबंधित विज्ञान को सामने लाने के लिए मंच उपलब्‍ध कराए जाने की जरूरत है. वहीं ऊपर बताए गए फायदों के बारे में अनुसंधान को बढ़ावा देने की भी जरूरत है.

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शिक्षा मंत्री बोले- विदेशी शासकों की वजह से हम गाय के महत्व भूल गए
वेबिनार में बोलते हुए शिक्षा राज्‍य मंत्री संजय धोत्रे ने कामधेनु पीठ स्‍थापित करने की पहल की सराहना की. उन्‍होंने कहा कि हमारा समाज गाय के अनेक लाभों से समृद्ध रहा है, लेकिन विदेशी शासकों के प्रभाव के कारण हम इसे भूल गए हैं. उन्‍होंने जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम इस पहल का समर्थन करें. उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि जब कुछ कॉलेज और विश्‍वविद्यालय कामधेनु पीठ शुरू कर देंगे तो अन्‍य विश्‍वविद्यालय भी इसका अनुसरण करेंगे.

उत्‍पादों के रूप में अनुसंधान और प्रयोगात्‍मक कार्यान्‍वयन का प्रदर्शन करने की जरूरत है. विशेष रूप से यह कार्य समयबद्ध रूप से सटीक वैज्ञानिक डेटा के साथ आर्थिक रूप से प्रस्‍तुत करने की भी जरूरत है. धोत्रे ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए डॉक्‍टर वल्‍लभभाई कथीरिया के प्रयासों की सराहना भी की.

AICTE के अध्‍यक्ष बोले- गाय विज्ञान पर दिया जाए ज़ोर
एआईसीटीई के अध्‍यक्ष प्रोफेसर अनिल सहस्रबुद्धे ने इस बात पर जोर दिया कि आत्‍मनिर्भर भारत केवल आत्‍मनिर्भर गांवों से ही संभव ह.। हमें नए और चमकते हुए भारत के लिए पुरानी समझ और नई प्रौद्योगिकी को आपस में जोड़ने की जरूरत है. गायों के माध्‍यम से कृषि अर्थव्‍यवस्‍था बहुत अधिक वैज्ञानिक भी है. उन्‍होंने सासंद ऑस्‍कर फर्नांडिस द्वारा पंचगव्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में दिए गए बयानों का उल्‍लेख भी किया. प्रोफेसर सहस्रबुद्धे ने कामधेनु अनुसंधान केन्‍द्र, कामधेनु अध्‍ययन केन्‍द्र और कामधेनु उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र और कामधेनु विश्‍वविद्यालय के लिए डॉ. कथीरिया की अपील के अनुसार गाय विज्ञान के बारे में अनुसंधान और विकास किए जाने पर जोर दिया.

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वहीं दूसरी ओर यूजीसी के सचिव प्रोफेसर रजनीश जैन ने कहा कि यूजीसी कामधेनु पीठ के लिए पूरी सहायता प्रदान करेगी. यह अभियान उन कई बातों पर साक्ष्‍य आधारित वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देगा जिन बातों को हम जानते तो हैं, लेकिन उन्‍हें वैज्ञानिक रूप से साबित करने और स्‍वीकार योग्‍य बनाने की जरूरत है.undefined

Tags: Business news in hindi, Cow

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