मार्च से आज तक GST के लंबित बकाये प्रदान करने की स्थिति में नहीं है सरकार? वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में दिया ये जवाब

मार्च से आज तक GST के लंबित बकाये प्रदान करने की स्थिति में नहीं है सरकार? वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में दिया ये जवाब
जीएसटी

ठाकुर ने बताया कि लंबित जीएसटी क्षतिपूर्ति की कमी को पूरा करने के लिए 27.8.2020 को जीएसटी परिषद की बैठक में भविष्य में की जाने वाली कार्रवाई पर चर्चा की गई है, जिसमें राज्यों को बाजार उधारी से चालू वित्त वर्ष में जीएसटी क्षतिपूर्ति की कमी को पूरा करने के लिए दो विकल्प दिए गए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2020, 3:10 PM IST
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नई दिल्ली. वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि जीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 7 में दिए गए प्रावधानों के अनुसार राज्यों को हुई. राजस्व हानि की गणना की जाएगी. राज्यों को राजस्व हानि के लिए क्षतिपूर्ति का अंतिम परिकलन किया जाएगा और 5 वर्षों तक प्रत्येक दो माह की अवधि के अंत में उसे जारी किया जाएगा.

सरकार से एक लिखित सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार मार्च 2020 से आज तक जीएसटी के लंबित बकाये प्रदान करने की स्थिति में नहीं है? इस सवाल के जवाब में अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में संग्रहीत उपकर, अप्रैल-जुलाई 2020 की अवधि के लिए स्वीकार्य जीएसटी क्षतिपूर्ति जारी करने के लिए पर्याप्त नहीं है. अप्रैल से जुलाई 2020 तक अवधि के लिए राज्यों को लंबित जीएसटी क्षतिपूर्ति की अंतिम रूप से गणना कर ली गई है.

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GST क्षतिपूर्ति के लिए राज्यों के पास दो विकल्प
ठाकुर ने बताया कि लंबित जीएसटी क्षतिपूर्ति की कमी को पूरा करने के लिए 27.8.2020 को जीएसटी परिषद की बैठक में भविष्य में की जाने वाली कार्रवाई पर चर्चा की गई है, जिसमें राज्यों को बाजार उधारी से चालू वित्त वर्ष में जीएसटी क्षतिपूर्ति की कमी को पूरा करने के लिए दो विकल्प दिए गए थे.



पहला विकल्प- जीएसटी लागू होने के कारण होने वाली कमी वित्त मंत्रालय द्वारा समन्वित स्पेशल विंडो के तहत लोन के मुद्दे के माध्यम से राज्यों द्वारा उधार ली जाएगी.

दूसरा विकल्प- बाजार लोन जारी करने के माध्यम से 235,000 करोड़ रुपये की पूरी कमी (कोविड प्रभाव वाले हिस्से सहित) राज्यों द्वारा उधार ली जा सकती है.

उन्होंने बताता, यह भी तय किया गया था कि राज्य अपनी पसंद और विचार रखेंगे. इसके बाद योजना को अंतिम रूप देने पर, राज्य या तो विकल्प 1 या विकल्प 2 चुक सकते हैं और उसके अनुसार, क्षतिपूर्ति उधार, चुकौती आदि को उनकी व्यक्तिगत पसंद के अनुसार निपटा दिया जाएगा.
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