RIL-फ्यूचर ग्रुप की डील पर Amazon क्यों कर रहा विरोध? जानिए पूरा मामला

रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर ग्रुप और डील
रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर ग्रुप और डील

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance industries) और फ्यूचर ग्रुप (Future Group) की डील पर सिंगापुर स्थित आर्बिट्रेशन पैनल (Arbitration Panel) ने फिलहाल रोक लगा दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 6:26 PM IST
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नई दिल्ली: मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance industries) और फ्यूचर ग्रुप (Future Group) की डील पर सिंगापुर स्थित आर्बिट्रेशन पैनल (Arbitration Panel) ने फिलहाल रोक लगा दी है. जेफ बेजोस की ऑनलाइन रिटेल कंपनी Amazon की याचिका पर पैनल ने यह फैसला लिया है. रिलायंस ने फ्यूचर ग्रुप के रीटेल और होलसेल बिजनेस को खरीदने के लिए 24,713 करोड़ रूपये में सौदा किया है. ऑनलाइन रिटेल कंपनी अमेजन के मुताबिक, डील फ्यूचर ग्रुप के साथ हुए कंपनी के करार की शर्तों का उल्लंघन करती है. गौरतलब है कि अमेजन ने पिछले साल ही किशोर बियानी (Kishore Biyani) के फ्यूचर ग्रुप की कंपनी फ्यूचर कूपन्स लिमिटेड में 49 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदी थी.

बता दें कि अमेजन के पास फ्यूचर कूपन्स लिमिटेड के साथ-साथ फ्यूचर रिटेल की भी 7.3 प्रतिशत हिस्सेदारी है. गौरतलब है कि इस डील से अमेजन को भारतीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा गहराने का डर है, क्योंकि अमेजन का दुनियाभर में ऑनलाइन बाजार बहुत विशाल है. जहां लाखों व्यापारी अपने उत्पादों को लाखों लोगों को बेचते हैं. क्या अमेजन का इस डील को रद्द करवाने के पीछे का उद्देश्य ऑनलाइन बाजार में खुद का एकाधिकार स्थापित करना है.

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अमेजन ने फैसले का किया स्वागत
इस मामले में एकमात्र मध्यक्ष वीके राजा ने अमेजॉन के पक्ष में अंतरिम फैसला सुनाया है. फिलहाल फ्यूचर ग्रुप को जब तक इस मामले में मध्यस्थता अदालत अंतिम फैसला नहीं सुना देती तब तक डील रोकने के लिए कहा गया है. वहीं अमेजन ने एक बयान जारी कर कहा कि वह आर्बिट्रेशन कोर्ट के फैसले का स्वागत करता है.

सेल को बढ़ावा देने के लिए देती हैं सस्ते प्रोडक्ट
बता दें कि ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं को त्योहारी सीजन में बिक्री के माध्यम से ब्रांडों को बढ़ावा देने के लिए विशेष सौदों को तोड़ने की अनुमति नहीं है. यह पिछले कुछ वर्षों से नियम बना हुआ है जिसे अधिकांश मोबाइल फोन कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट को लॉन्च करने के लिए आगे बढ़ाने के लिए अपनाया हुआ है.

ई-कॉमर्स कंपनियां सस्ते में बेचती हैं सामान
बता दें कि भारत में कुल ई-कॉमर्स की बिक्री में स्मार्टफ़ोन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का योगदान लगभग 50 प्रतिशत है. हालांकि, अमेजन ने कथित तौर पर चीनी ब्रांड मोबाइल वनप्लस के साथ अपनी साइट पर विशेष रूप उसके फोन बेचने के लिए करार किया है जो कि नियमों का उल्लंघन है. एक साल पहले लागू हुए इन नियमों का उद्देश्य ऑनलाइन और ऑफलाइन खुदरा विक्रेताओं के बीच के क्षेत्र को समतल करना था.

ऑफलाइन सामान बेचने वालों की सेल पर बुरा प्रभाव
वहीं, ऑफलाइन खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि अमेज़ोन जैसे ई-टेलर्स बड़ी छूट पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए 'कम' और 'आकर्षित' मूल्य पर उत्पादों को बेच रहे हैं. फेस्टिव सीजन में इलेक्ट्रॉनिक चीजें और स्मार्टफोन को कम मूल्य पर बेचना इसका उदाहरण है. ऑफलाइन खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि इससे उनके कारोबार पर बड़ा असर पड़ रहा है.

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क्या है अमेजॉन-फ्यूचर का डील मामला
बता दे कि पिछले वर्ष अमेजॉन ने किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप की कंपनी फ्यूचर कूपन्स लिमिटेड में 49 फीसद की हिस्सेदारी खरीदी थी. इस कंपनी के पास फ्यूचर रिटेल की भी 7.3 फीसदी की हिस्सेदारी है. इसी के बिजनेस को किशोर बियानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह को बेचा है. जिसके खिलाफ अमेजॉन ने मध्यस्थता कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
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