स्पाइसजेट को SC से मिली राहत, मारन को नहीं चुकाने होंगे 243 करोड़ रुपये

सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें स्पाइसजेट को अपने पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन (Kalanithi Maran) को 243 करोड़ रुपये देने का आदेश सुनाया गया था.

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नई दिल्ली. निजी एयरलाइंस कंपनी स्पाइसजेट (Spicejet) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें स्पाइसजेट को अपने पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन (Kalanithi Maran) को 243 करोड़ रुपये देने का आदेश सुनाया गया था.

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कलानिधि मारन से जवाब भी मांगा है और उन्हें 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला स्पाइसजेट की और से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया.

स्पाइसजेट ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 22 अक्टूबर को सुनाए गए उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें हाईकोर्ट ने एयरलाइंस कंपनी को कलानिधि मारन को 243 रुपये चुकाने का आदेश दिया था. दरअसल, 243 करोड़ रुपये की यह राशि उस रिफंड का इंटरेस्ट है जिसका फैसला वर्ष 2018 में एक मध्यस्थता पैनल ने स्पाइसजेट के पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन के पक्ष में सुनाया था. लेकिन स्पाइसजेट द्वारा पैसे नहीं लौटाने पर सन ग्रुप के चेयरमैन कलानिधि मारन दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे थे.



14 अक्टूबर को खत्म हो गई डेडलाइन
सितंबर में दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पाइसजेट के इस राशि का भुगतान छह सप्ताह के अंदर करने का आदेश दिया. पैसे भुगतान करने की डेडलाइन 14 अक्टूबर को खत्म हो गई, लेकिन स्पाइसजेट ने भुगतान नहीं किया. इसके बाद मारन ने एक बार फिर 22 अक्टूबर, 2020 को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और कंपनी में अजय सिंह की शेयरहोल्डिंग को जब्त करने की मांग की. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पाइसजेट को 243 करोड़ रुपये तुरंत लौटाने का आदेश दिया. इस फैसले के बाद स्पाइसजेट सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और अब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है.

अजय सिंह की हिस्सेदारी 59.93 फीसदी
स्पाइसजेट में अजय सिंह और उनके परिवार की हिस्सेदारी 59.93 फीसदी है. लेकिन जिस समय कलानिधि मारन ने स्पाइसजेट छोड़ी थी उस समय इसमें अजय सिंह की हिस्सेदारी करीब 2 फीसदी थी. इस मामले से जुड़े सूत्रों ने मनी कंट्रोल को बताया कि अगर स्पाइसजेट में अजय सिंह की शेयरहोल्डिंग जब्त कर ली जाती है तो वे अपनी हिस्सेदारी में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकेंगे.

ये है पूरा मामला
दरअसल, यह विवाद 3 साल पुराना है जब आर्थिक तंगी से जूझ रही स्पाइसजेट परिचालन फीस नहीं चुकाने के कारण बंद हो गया था। इस समय कलानिधि मारन ने अपने शेयर कंपनी को-फाउंडर अजय सिंह को ट्रांसफर कर दिए थे। फरवरी 2015 में कलानिधि मारन और उनकी कंपनी KAL Airways ने 2 रुपये में अपने 58.46% शेयर स्पाइसजेट के मौजूदा चेयरमैन अजय सिंह को ट्रांसफर किए थे। इसके तहत अजय सिंह ने कंपनी पर बकाया 1500 करोड़ रुपये का कर्ज अपने ऊपर लेकर उसे चुकाने का समझौता किया था. कलानिधि मारन और उनकी कंपनी KAL Airways ने कहा कि उन्होंने स्पाइसजेट को वारंट और प्रिफरेंस शेयर इश्यू करने के लिए 679 करोड़ रुपये चुकाए हैं.

ये है विवाद की जड़
यही राशि सभी विवाद की जड़ है. स्पाइसजेट ने मारन को वारंट और प्रिफरेंस शेयर इश्यू नहीं किए. इसके बाद मारन मध्यस्थता पैनल चले गए और क्षतिपूर्ति के तौर पर स्पाइसजेट से 1,323 करोड़ रुपये की मांग की। लेकिन मध्यस्थता पैनल ने मारन की इस मांग को ठुकरा दिया और स्पाइसजेट को उन्हें 579 करोड़ रुपये और उसके इंटरेस्ट का भुगतान करने का आदेश दिया. इसके तहत स्पाइसजेट को 329 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी और 250 करोड़ रुपये कैश में चुकाने थे.
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