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  • RENT RECEIPT IS NOT GIVEN TO HR AND TAX IS BEING DEDUCTED SO DO NOT WORRY YOU WOULD GET REFUND IN 50 DAYS ITR PERSONAL FINANCE ACHS

एचआर को नहीं दी रेंट रिसीट और कट रहा है टैक्‍स तो ना हों परेशान, ऐसा करने पर मिल जाएगा पूरा पैसा वापस

इस कानून के तहत एचआरए पर मिलती है छूट

नौकरीपेशा करदाता (Salaried Taxpayers) को हर साल तय समय पर नियोक्‍ता (Employer) को रेंट रिसीट देनी होती है ताकि वो हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के जरिये इनकम टैक्‍स छूट (Income Tax Deduction) का दावा कर सके. आइए जानते हैं कि अगर आप इस बार अब तक रेंट रिसीट (Rent Receipt) अपनी कंपनी को नहीं दे पाएं हैं तो कैसे एचआरए पर टैक्‍स छूट का फायदा ले सकते हैं...

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    नई दिल्‍ली. कोरोना संकट के मद्देनजर केंद्र सरकार ने इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल (ITR Filing) करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी है. दूसरे शब्‍दों में समझें तो आपके पास अभी टैक्‍स सेविंग (Tax Saving) का एक मौका है. दरअसल, अगर आपने अपनी कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट को मकान के किराये की रसीद (Rent Receipt) नहीं दी है तो आप इनकम टैक्‍स रिटर्न दाखिल (ITR Filing) करते समय अपनी टैक्‍स लायबिलिटी (Tax Liability) कम कर सकते हैं. बता दें कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) आपकी सैलरी का हिस्‍सा है, जिसके जरिये आप अपनी टैक्‍सेबल इनकम कम करके टैक्‍स छूट (Tax Exemption) का लाभ ले सकते हैं.

    इस कानून के तहत एचआरए पर मिलती है छूट
    इनकम टैक्‍स एक्‍ट के सेक्‍शन-10 (13A) के तहत कुछ सीमाओं के तहत एचआरए पर टैक्स छूट ली जा सकती है. एचआरए के तहत मिलने वाली रकम पर टैक्स छूट का दावा वही नौकरीपेशा व्यक्ति कर सकता है, जिसकी सैलरी में हाउस रेंट अलाउंस शामिल हो और वह किराये के मकान में रहता हो. वेतनभोगी करदाता को हर साल कंपनी की ओर से बताए गए समय के भीतर रेंट रिसीट देनी होती है. ऐसे में अगर कंपनी की ओर से बताए गए समय पर आप किराये की रसीद नहीं दे पाए हैं तो भी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप अब भी टैक्स छूट के लिए दावा कर सकते हैं.

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    रेंट रिसीट नहीं देने के बाद भी ऐसे लें टैक्‍स छूट
    रेंट रिसीट नहीं दे पाने के बाद भी टैक्‍स छूट का दावा करने के लिए टैक्‍सपेयर्स को इनकम टैक्‍स रिटर्न दाखिल करते समय कंपनी की ओर से मिलने वाले एचआरए पर छूट की रकम की कैलकुलेशन करनी होगी. फिर उस रकम को टैक्सेबल इनकम से घटाना होगा. इसके बाद अगर पता चलता है कि आपकी कंपनी ज्‍यादा टैक्‍स काट रही है तो रिफंड के लिए दावा करें. हालांकि, टैक्‍स रिफंड के लिए दावा करते समय ध्‍यान रखें कि आपके पास रेंट रिसीट होनी चाहिए. बता दें कि अगर घर का किराया सालभर में 1 लाख रुपये से ज्यादा है तो मकान मालिक के परमानेंट अकाउंट नंबर की जरूरत भी होगी.

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    इतने समय में वापस मिल जाएगा कटा पैसा
    आईटीआर प्रोसेसिंग (ITR Processing) के बाद टैक्स रिफंड (Tax Refund) आने में करीब एक महीने का समय लगता है. सामान्य तौर पर बेंगलुरु के सेंट्रलाइज प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) से आईटीआर प्रोसेसिंग को पूरा होने में 2 से 3 महीने का समय लग जाता है. बता दें कि आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से भेजे ई-मेल में करदाताओं से उनकी बकाया मांग, उनके बैंक खाते (BANK Account) और रिफंड में किसी तरह के अंतर के बारे में जानकारी मांगी जाती है. इसकी जानकारी सही समय पर नहीं देने पर आपका रिफंड अटक सकता है.

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    माता-पिता के घर में रहते हैं तो भी मिलेगा लाभ
    टैक्‍सपेयर अगर नौकरीपेशा नहीं है, तो वह एचआरए के टैक्स लाभ का दावा नहीं कर सकता है. अगर कोई नौकरीपेशा टैक्‍सपेयर अपने माता-पिता के घर (Parents' House) में रहता है तो भी वह किराये के भुगतान (Rent Payment) के लिए एचआरए पर टैक्स छूट का फायदा ले सकता है. बता दें कि आपके माता-पिता को यह इनकम अपने टैक्स रिटर्न्स में दिखानी होगी. ऐसा नहीं करना से उनको टैक्स नोटिस (Income Tax Notice) मिल सकता है. नौकरीपेशा व्‍यक्ति टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए एचआरए और होम लोन (Home Loan) दोनों के लिए दावा कर सकता है.