कैसे शुरू होगी इकोनॉमी? महाराष्ट्र के हर 10 में 7 इंडस्ट्रीज ने कहा- नहीं पूरा कर सकते सरकार की गाइडलाइंस

कैसे शुरू होगी इकोनॉमी? महाराष्ट्र के हर 10 में 7 इंडस्ट्रीज ने कहा- नहीं पूरा कर सकते सरकार की गाइडलाइंस
इंडस्ट्रीज के लिए केंद्र सरकार के गाइडलाइंस के आधार पर काम करना मुश्किल

20 अप्रैल से मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने के लिए केंद्र सरकार ने एक गाइडलाइन जारी​ किया है. महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) के एक सर्वे से पता चलता है कि अधिकतर ईकाईयां केंद्र के इस गाइडलाइंस का पालने करने में सक्षम नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2020, 3:48 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) द्वारा किए एक एक सर्वे में हर 10 में से 7 मैन्यु​फैक्चरिंग या इंडस्ट्रीयल ईकाई (Industries) का कहना है कि वो वर्कर्स के लिए रहने की व्यवस्था (Workers Accommodation) नहीं कर सकती हैं. साथ ही, 4 में से 3 ईकाईयों का कहना है कि वो अपने स्टाफ के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी नहीं मुहैया करा सकती हैं. केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल से मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रीया ईकाईयों को खोलने के लिए शर्त रखा था.

काम शुरू करने के लिए चाहिए 50 फीसदी वर्कर्स
केंद्र सरकार की इस शर्त को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को इस संबंध में एक सर्वे किया था, जिसमें यह बात सामने आई है. इसमें कुल 115 इंडस्ट्रीयल ईकाईयों ने भाग लिया है. इसमें अधिकतर का कहना ​है कि उन्हें प्रोडक्शन शुरू करने के लिए कम से कम 50 फीसदी वर्कफोर्स की जरूरत है.

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एक अधिकारी ने बताया कि करीब 68 फीसदी यूनिट्स का कहना है कि वो कर्मचारियों को रहने की व्यवस्था नहीं कर सकते. जबकि 115 में 29 ने कहा कि अन्य जगहों पर रहने वाले वर्कर्स के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं मुहैया करा सकते हैं. अन्य 7 फीसदी का कहना कि उनके पास कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं है.



केंद्र सरकार ने जारी किया है गाइडलाइंस
देश में सबसे अधिक इंडस्ट्रीयल ईकाईयों वाला राज्य महाराष्ट्र ही है. 17 अप्रैल को सरकार ने दूसरे चरण के लॉकडाउन के बीच मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्रीयल ईकाईयों के लिए गाइडलाइंस जारी किया था ताकि यहां पर काम शुरू किया जा सके. लेकिन, अधिकतर मैन्युैक्चरर्स का कहना है कि वो केंद्र सरकार की शर्तों को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं.

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काम शुरू करने के लिए केंद्र के गाइडलाइंस का पालन करना अनिवार्य
केंद्र द्वारा जारी किए गए गाइडलाइंस के बाद महाराष्ट्र सरकार अब प्रयास में है कि आर्थिक गतिविधियों को 20 अप्रैल से धीरे-धीरे शुरू किया जाए. इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, इंडस्ट्रीयल एस्टेट्स, इंडस्ट्रीयल टाउनशिप, स्पेशल इकोनॉमिक जोन और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स को शुरू करने की तैयारी में है. लेकिन, इससे पहले इन यूनिट्स को केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करना होगा, जिसमें वर्कर्स के लिए रहने की सुविधा, दूर रहने वाले वर्कर्स के लिए ट्रांसपोर्ट, र्थमल स्क्रीनिंग, और डिसइन्फेक्शन प्रक्रिया को पूरा करना होगा.

हालांकि, लगभग सभी ने सेनिटाइजेशन और फिजिकल डिस्टेंसिंग को लेकर हामी भर दिया है. इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में अधिकारी के हवाले से लिखा है, 'जो यूनिट्स अपने कैंपर्स में वर्कर्स के रहने की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं, हम उन्हें अब इस बात के लिए मना रहे कि वो किसी नजदीकी जगह पर वर्कर्स के लिए रहने की व्यवस्था कर सकें.'

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वर्कर्स के लिए राशन की व्यवस्था करन चुनौती
अधिकतर मैन्युफैक्चरर्स का कहना कि अगर हम रहने की व्यवस्था कर भी लेते हैं कि वर्कर्स के लिए चाय-दूध जैसे सुविधाएं कहां से आएंगी. लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण होगा. वर्कर्स के लिए राशन व खाने की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा.

महाराष्ट्र में 36 हजार से अधिक फैक्ट्रीज
इंडस्ट्रीज का कहना है कि इस समय डिमांड में कमी है. ऐसे में जब तक सरकार मांग बढ़ाने की कोशिश नहीं करेगी, तब तक प्रोडक्शन में तेजी नहीं आएगी. महाराष्ट्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का कहना है कि लगभग 70 फीसदी यूनिट्स म्युनिसिपल क्षेत्र के बाहर हैं, जहां 20 अप्रैल के बाद से काम शुरू किया जा सकता है. बता दें कि महाराष्ट्र में कुल 36,623 रजिस्टर्ड फैक्ट्रीज हैं. शनिवार तक इसमें से केवल 2,091 फैक्ट्रीज ही काम कर रही हैं.

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