Good News: रद्द किए गए राशन कार्ड फिर होंगे बहाल! सुप्रीम कोर्ट के बाद अब राज्यसभा में भी उठी मांग

कोरोनाकाल में तीन से चार करोड़ राशन कार्ड रद्द किया जाना चिंता की बात है.

कोरोनाकाल में तीन से चार करोड़ राशन कार्ड रद्द किया जाना चिंता की बात है.

कोरोना और लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से करीब 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द किए जाने का मामला जोर पकड़ने लगा है. सोमवार को यह मामला राज्यसभा (Rajaya Sabha) में गूंजा. आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा (Manoj Jha) ने इस मुद्दे को शून्यकाल में उठाते हुए कहा कि रद्द किए राशन कार्ड हर हाल में बहाल किए जाने चाहिए

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 22, 2021, 5:14 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना और लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से तकरीबन 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द (Ration Card Cancellation) किए जाने का मामला अब जोर पकड़ने लगा है. यह मामला सोमवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में गूंजा. आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा (Manoj Jha) ने इस मुद्दे को शून्यकाल में उठाते हुए कहा कि रद्द किए राशन कार्ड को हर हाल में बहाल किया जाना चाहिए. झा ने कहा कि कोरोनाकाल में तीन से चार करोड़ राशन कार्ड रद्द किया जाना चिंता की बात है. झा ने सदन में कहा कि पहले सरकार की तरफ से ये कहा गया कि यह राशन कार्ड फर्जी है, लेकिन बाद में आधार से लिंक नहीं होने का तकनीकी कारण बताया गया.'

3 करोड़ राशन कार्ड किए गए थे रद्द

आरजेडी सांसद मनोज झा ने सभापति से आग्रह किया कि इन सभी राशन कार्ड को एक बार फिर से बहाल किया जाए. क्योंकि, अगर देश में भूखमरी से एक भी मौत होती है तो यह समाज के लिए ठीक नहीं है. झा ने आगे कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश के सभी जिलों में नोडल अधिकारी की नियुक्ति होनी थी, जो अभी तक नहीं हुई है. कुछ राज्यों ने खाद्य विभाग के कर्मचारियों को ही नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त कर दिया है.

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मनोज झा ने इस मुद्दे को शून्यकाल में उठाते हुए कहा कि रद्द किए राशन कार्ड को हर हालत में बहाल किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से मांगा है जवाब

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही झारखंड की रहने वाली कोइली देवी ने आधार से लिंक नहीं होने के कारण तकरीबन तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. कोइली देवी की साल 2017 में भी खूब चर्चा हुई थी. 2017 में कोइली देवी की 11 साल की बेटी की भूख से मौत हो गई थी. भूख से हुई इस मौत पर राज्य की तत्कालीन बीजेपी की रघुवर सरकार की काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी.

क्या किसी को भोजन के अधिकार से वंचित जा सकता है?



बीते बुधवार को इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई हुई थी. कोर्ट ने आधार कार्ड से जुड़े नहीं होने के कारण करीब 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द किए जाने को ‘अत्यंत गंभीर’ मामला बताया. कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एसी बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन की बेंच ने कहा कि इसे विरोधात्मक मामले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. यह बेहद ही गंभीर मामला है. सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर सभी पक्षों से 4 सप्ताह में जवाब देने को कहा है. हालांकि, केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि आधार न होने की स्थिति में भी भोजन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.

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रद्द राशन कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है.


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आपको बता दें कि 9 दिसंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने वैध आधार कार्ड न होने पर राशन आपूर्ति से इन्कार किए जाने के आरोपों पर केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा था. उस समय कोर्ट ने राज्यों से कहा था कि वे बताएं कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के अंतगर्त शिकायत निवारण तंत्र बनाने की दिशा में आपने क्या किया है. उस समय भी केंद्र सरकार ने भुखमरी से मौत के आरोपों से साफ इन्कार किया था और कहा था कि भूख से किसी की मौत नहीं हुई है.
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