Budget Explainer: पीएफ के ब्याज पर टैक्स चुकाने के बाद भी फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा मिलेगा रिटर्न

 ईपीएफ में 4.5 करोड़ से अधिक कंट्रीब्यूटर्स अकाउंट्स हैं. इनमें से 1.23 लाख अकाउंट्स मोटी तन्ख्वाह वालों के हैं.

ईपीएफ में 4.5 करोड़ से अधिक कंट्रीब्यूटर्स अकाउंट्स हैं. इनमें से 1.23 लाख अकाउंट्स मोटी तन्ख्वाह वालों के हैं.

बीते साल सरकार ने पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन की लिमिट 7.5 लाख रुपए तय कर दी थी. इससे ज्यादा जमा रकम को टैक्सबेल कर दिया था. अब ब्याज को भी टैक्सेबल कर दिया गया है.

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  • Last Updated: February 5, 2021, 3:02 PM IST
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नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने हाल ही में संसद में पेश किए गए वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड (Provident Fund, PF) को भी टैक्स के दायरे में लाने का प्रावधान किया है. इसके तहत एक वित्त वर्ष में पीएफ कांट्रीब्यूशन (PF Contribution) में ढाई लाख रुपए से ज्यादा जमा करने पर ब्याज को आय माना जाएगा. इसका मतलब हुआ कि ब्याज पर इनकम टैक्स चुकाना होगा. हालांकि सरकार के इस प्रावधान के बाद भी पीएफ में बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से ज्यादा रिटर्न मिलेगा.

चार्टर्ड अकाउंटेंड (CA) हरिगोपाल पाटीदार बताते हैं कि सरकार की मंशा ऐसे लोगों पर नकेल कसने की है जो मोटी तन्ख्वाह पाते हैं और पीएफ में ज्यादा जमा कर ज्यादा रिटर्न भी हासिल कर लेते हैं. इसलिए, पहल बार पीएफ में सालाना ढाई लाख रुपए की लिमिट तय की गई है. हालांकि यदि बैक एफडी पर मिलने वाले ब्याज और पीएफ ब्याज दर को देखे तो अभी भी यह निवेश के लिहाज से आकर्षक है. सीए विकास अग्रवाल बताते हैं कि सरकार ज्यादा वेतन वालों पर पहले से नजर रखे हुए थी. ज्यादा पीएफ से सरकार को भी ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा था और इसका असर कम वेतन वालों पर पड़ रहा था. इसलिए बीते साल सरकार ने पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन की लिमिट 7.5 लाख रुपए तय कर दी थी. इससे ज्यादा जमा रकम को टैक्सबेल कर दिया था. अब ब्याज को भी टैक्सेबल कर दिया गया है.

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इस उदाहरण से समझिए पीएफ पर कितना टैक्स चुकाना होगा
मान लीजिए कि आपकी सालाना बैसिक सैलरी 20 लाख रुपए है. बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन होता है. यानी आपका पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन 240000 रुपए होगा. अब आप ज्यादा बचत के लिए इसमें 60000 रुपए और जमा करते हैं तो यह कॉन्ट्रीब्यूशन 3 लाख रुपए हो जाएगा. नए नियम के तहत ढाई लाख रुपए से ऊपर की जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज को आपकी आय माना जाएगा. मतलब कि 50 हजार रुपए पर सालाना जितना ब्याज मिलेगा, वह आपकी आय मानी जाएगी. ईपीएफओ की ब्याज दर 8.5 फीसदी है. लेकिन अभी कोरोना की वजह से 8.15 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है. 50 हजार रुपए का ब्याज 4075 रुपए होगा. इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से इस पर सेस समेत 31.2 प्रतिशत टैक्स लगेगा. यह राशि 1271.4 रुपए होगी. इस राशि को कम करने के बाद आपको कुल रिटर्न 2803 रुपए मिलेगा.

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टैक्स चुकाने के बाद भी एफडी से इसलिए ज्यादा है रिटर्न



यदि बैंक में आप 50 हजार रुपए की फिक्सड डिपॉजिट (FD) कराते हैं तो इस पर एक साल के लिए औसत 5 प्रतिशत का ब्याज मिलता है. यह राशि 2500 रुपए होगी. जबकि पीएफ में इस पर 4075 रुपए का ब्याज मिलेगा. ब्याज पर अधिकतम दर यानी 31.2 प्रतिशत का टैक्स चुकाने के बाद भी आपको 2804 रुपए मिल जाएंगे. यानी कि आपको 304 रुपए का फायदा होगा.

राहत की बात, कंपनी के कॉन्ट्रीब्यूशन पर नहीं लगेगा टैक्स

नया नियम सिर्फ इम्पलाई के कॉन्ट्रीब्यूशन वाले हिस्से के लिए है. इम्पलायर यानी नियोक्ता अपने कर्मचारियों के लिए पीएफ में उसकी बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत बतौर अंशदान देता है. इस हिस्से को अभी भी टैक्स के दायरे से बाहर रखा हुआ है. जैसे, यदि आपकी बेसिक सैलरी 30 लाख रुपए है तो 360000 रुपए आपकी सैलरी से और इतनी ही रकम कंपनी अपने हिस्से से आपके पीएफ खाते में जमा करती है. कुल रकम 720000 रुपए होगी. यह ढाई लाख वाले नियम से ज्यादा है. चूंकि इम्पलायर का हिस्से पर छूट है, इसलिए आपके हिस्सा 360000 रुपए ही नए नियम के दायरे में आएगा. इसमें से 250000 रुपए के बाद अतिरिक्त जमा 90000 रुपए का ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम होगा. वहीं यदि आपका इस साल रिटायरमेंट है तो सिर्फ मौजूदा साल में ढाई लाख रुपए से ज्यादा के जमा वाला हिस्सा ही टैक्सेबल होगा. बाकी छूट पहले की तरह होंगी.

सरकार ने इसलिए उठाया कदम

ईपीएफ में 4.5 करोड़ से अधिक कंट्रीब्यूटर्स अकाउंट्स हैं. इनमें से 1.23 लाख अकाउंट्स मोटी तन्ख्वाह वालों के हैं जो हर महीने इनमें करोड़ों रुपए कंट्रीब्यूट करते हैं. उनका कुल योगदान 62500 करोड़ रुपए का है और सरकार को उन्हें 8.50 फीसदी की दर से ब्याज देना पड़ रहा है. यह ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री है. ईपीएफ कम और मिडिल इनकम वाले सैलरीड क्लास लोगों के लिए है लेकिन इसका फायदा हाई सैलरीड पर्सन उठा रहे हैं. इसलिए, सरकार का मौजूदा कदम कंट्रीब्यूटर्स के बीच असमानता को दूर करना और ज्यादा आय वालों को इसका दुरुपयोग करने से रोकना है. सरकारी सूत्रों ने इन मोटी सैलरीड लोगों के नाम नहीं बताए हैं लेकिन इनमें से एक के अकाउंट में 103 करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा है. दूसरे नंबर के कंट्रीब्यूटर के खाते में 86 करोड़ रुपए से अधिक रकम है. ऐसे टॉप 20 अमीर कंट्रीब्यूटर्स के खातों में कुल 825 करोड़ रुपए जमा हैं. ऐसे टॉप 100 अमीर कंट्रीब्यूटर्स की बात करें तो उनके अकाउंट्स में 2000 करोड़ रुपये से अधिक राशि है.
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