राजस्व विभाग ने 8200 करोड़ रुपये टैक्स चोरी का खुलासा किया, BSE से जुड़ा है मामला


बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज

आयकर विभाग ने पिछले महीने सेबी (SEBI) को एक प्रारभिंक रिपोर्ट भेजी थी जिसमें में लगभग 20,000 ऐसे लाभार्थियों की पहचान की गई थी, जिसके आधार पर इस घोटाले का पता चला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 7:08 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. राजस्व विभाग (Revenue Department) ने 8,200 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा किया है. कई व्यक्तियों और संस्थाओं पर बीएसई के विकल्पों में बड़ा उलटफेर कर टैक्स चोरी (Tax Evasion) को अंजाम देने का आरोप है. शेयर दलालों और प्रवेश ऑपरेटरों के एक समूह को इस घोटालों के पीछे का बड़ा कारण बताया है. आयकर विभाग (Income Tax Department) ने देश के प्रमुख शहरों में 22 ब्रोकरेज हाउस का पता लगाया है. पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है.

आयकर विभाग ने पिछले महीने सेबी (SEBI) को एक प्रारभिंक रिपोर्ट भेजी थी जिसमें में लगभग 20,000 ऐसे लाभार्थियों की पहचान की गई थी, जिसके आधार पर इस घोटाले का पता चला है. जुलाई 2019 में आयकर विभाग ने ऑपरेशन फॉल्कोन के जरिए इन सभी लाभार्थियों का पता लगाया था. इसमें देश के अन्य शहरों से 22 ब्रोक्रेज ऑफिस का खुलासा हुआ था. इसमें मुंबई, कोलकाता, कानपुर, हैदराबाद और राष्टीय राजधानी क्षेत्र शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, बीईसी ऐसी किसी रिपोर्ट और किसी जानकारी से अवगत नहीं है. बीएसई ने इसपर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

ब्रोकर्स ने कबूला जुर्म
आयकर विभाग की पूछताछ के दौरान कई ब्रोकर्स ने एफ एंड ओ सेजमेंट (F&O) में टैक्स चोरी के जुर्म को कबूला है और इसमें अपनी 2 से 3 फीसदी हिस्सेदारी की बात कही है. छापे के दौरान विभाग ने पाया है कि इस घोटाले के पीछे शेयर दलाल और प्रवेश ऑपरेटर हैं जो पैसों के बदले में विभिन्न संस्थाओं के लाभ/हानि का रिकॉर्ड रखते हैं. बता दें कि एंट्री ऑपरेटर वे हैं जो बिल जनरेट करके लाभ और हानि के चालान प्रदान करते हैं।
यह भी पढ़ें: Small Finance Banks: क्या इनमें अकाउंट खुलवाना सेफ है? जानिए इससे जुड़े ऐसे ही अहम सवालों के जवाब



सेबी भी जांच में शामिल
घोटाले की जांच को और प्रभावी बनाने के लिए आयकर विभाग, पूंजी बाजार नियामक प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ मिलकर काम कर रहा है। पश्चिम बंगाल में एक स्रोत के मुताबिक, दलालों का एक समूह स्थानीय मशीनरी से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ था। दरअसल, कई दलालों ने आयकर विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई थी जिन्होंने दिसंबर 2019 में इन दलालों के यहां तलाशी ली थी.

विकल्पों पर कैसे होता काम है ?
आमतौर पर विकल्पों को अंतर्निहित लाभांश की स्थिति में बेचा जाता है. लेकिन, उलटफेर के पहले चरण में विकल्पों को अनुचित रूप से कम कीमत पर बेचा गया और कभी-कभी इन्हें आंतरिक मूल्य से भी कम में बेचा गया. सामान्य स्थिति में इनका कम से कम मूल्य विकल्प के आंतरिक मूल्य के बराबर होता है. दूसरे चरण में, कारोबारी दिनों में उसी विकल्प को बिक्री मूल्य की तुलना में काफी अधिक कीमत पर उसी इकाई द्वारा वापस खरीदा जाता है.

यह भी पढ़ें: Harshad Mehta Scam: 1992 से भारतीय शेयर बाजार में बदल गईं ये 8 चीजें

विकल्प, विकल्प लेखक, इन-द-मनी, आउट-ऑफ-द-मनी
विकल्प वित्तीय साधन हैं जो स्टॉक जैसे अंतर्निहित प्रतिभूतियों के मूल्य के आधार पर व्यूत्पन्न होते हैं। एक विकल्प अनुबंध खरीदार को खरीदने या बेचने का अवसर प्रदान करता है. लेखक (Writer) जिसे अनुदाता भी कहते हैं, एक विकल्प का विक्रेता होता है जो खरीदार से प्रीमियम भुगतान लेता है. राइटर्स कॉल या पुट ऑप्शन को बेच सकते हैं जो कवर या अनकवर्ड हो सकते हैं। यदि बाजार मूल्य स्ट्राइक प्राइस से अधिक है तो पैसा, कॉल विकल्प में है और यदि बाजार मूल्य स्ट्राइक प्राइस से कम हो तो पैसा पुट ऑप्शन में होता है. एक विकल्प इन दोनों अवस्थाओं से बाहर का भी होता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज