पटरी से उतर चुकी इकोनॉमी को मोदी सरकार के राहत पैकेज से मिली जान, Moody's ने की तारीफ

भारत की अर्थव्यवस्था आ रही पटरी पर
भारत की अर्थव्यवस्था आ रही पटरी पर

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मोदी सरकार ने कई राहत पैकेज की घोषणा की है. पिछले हफ्ते सरकार ने आत्मनिर्भर भारत 3.0 का ऐलान किया था. जिसका सीधा असर देखने को मिल रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 19, 2020, 5:35 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण का भारत की अर्थव्यवस्था पर अच्छा खासा असर पड़ा है. अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मोदी सरकार ने कई राहत पैकेज की घोषणा भी की है. इन राहत पैकेज का असर अब दिखने लगा है. भारत की आर्थिक ग्रोथ को लेकर दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस (Moody’s Investors Service) ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आकंलन जारी किया है. इस आंकलन के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि का अनुमान बड़ा दिया है. मूडीज ने ताजा रिपोर्ट में सरकार की तारीफ करते हुए ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया.  गुरुवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर -10.6 प्रतिशत कर दिया, जबकि उससे पहले यह आंकड़ा -11.5 प्रतिशत था.

रोजगार से लेकर रियल एस्टेट तक को मिली जान
आपको बता दें कि मोदी सरकार ने पिछले हफ्ते आत्मनिर्भर भारत 3.0 का ऐलान किया है. इसके तहत रोजगार सृजन और परेशान सेक्टर को राहत देने पर जोर है. सरकार ने रोजगार से लेकर रियल एस्टेट तक, कर्मचारियों से लेकर मकान खरीदारों तक सबको राहत दी है. आत्मनिर्भर भारत 3.0 के तहत 12 घोषणाएं की गयी हैं. अब तक सरकार कुल 29,87,641 करोड़ रुपये के पैकेज दे चुकी है. यह जीडीपी का करीब 15 फीसदी है. इसमें सरकार का खर्च जीडीपी का 9 फीसदी है और बाकी रिजर्व बैंक का है.


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सरकार के राहत पैकेज का हुआ सीधा असर
सरकार ने पिछले हफ्ते 2.7 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज की घोषणा की थी. सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों का वृद्धि पूर्वानुमानों पर सकारात्मक असर पड़ा है. मूडीज ने कहा कि सरकार का मकसद भारत के विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और रोजगार का सृजन करना है. इसके साथ ही बुनियादी ढांचे में निवेश, ऋण उपलब्धता और तनावग्रस्त क्षेत्रों की मदद पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है. सरकार द्वारा घोषित ताजा प्रोत्साहनों में विनिर्माण और रोजगार सृजन पर खासतौर से ध्यान दिया गया है.

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मूडीज ने कहा, हमने वित्त वर्ष 2020 (अप्रैल 2020-मार्च 2021) के लिए अपने वास्तविक, मुद्रास्फीति समायोजित जीडीपी पूर्वानुमान को संशोधित कर -11.5 प्रतिशत से घटाकर -10.6 प्रतिशत कर दिया है. मूडीज के मुताबिक अगले वित्त वर्ष 2021-22 के लिए वृद्धि का अनुमान 10.8 प्रतिशत है, जबकि पहले इसके 10.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था.
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