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GST चोरी पर लगेगी लगाम, सरकार ने बनाया ये खास प्लान

News18Hindi
Updated: September 16, 2019, 7:22 PM IST

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की चोरी रोकने के लिए ई-वे बिल (E-Way Bill) के तहत RFID यानी फास्टैग (FasTag) को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल सकती है.

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  • Last Updated: September 16, 2019, 7:22 PM IST
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नई दिल्ली. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की चोरी रोकने के लिए ई-वे बिल (E-Way Bill) के तहत RFID यानी फास्टैग (FasTag) को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल सकती है. 20 सितंबर को गोवा (Goa) में होने वाली जीएसटी काउंसिल (GST Council) की बैठक इसे देश भर में लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी.

जीएसटी काउंसिल की बैठक जीएसटी चोरी पर नकेल कसने के लिए जीएसटी काउंसिल में प्रस्ताव आएगा. अगले साल अप्रैल से देश भर में लागू करने के प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने की संभवना है. कंसाइनमेंट को ही गाड़ियों पर लगे RFID टैग से जोड़ की योजना है. जीएसटी विभाग को किसी भी वाहन को ट्रैक करने में आसानी होगी. वहीं इलेक्ट्रॉनिक वेरीफिकेशन और कम्पलायंस में भी आसानी से होगी.

टोल नाके पर लंबी कतारों से मिलेगी राहत
RFID टैग लगने से टोल नाके पर लगने वाली लंबी कतारों से भी वाहनों को राहत मिलेगी. काउंसिल में राज्यों के साथ RFID लिंकिंग की स्टेट्स रिपोर्ट पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. उत्तर प्रदेश और दिल्ली इसे पायलट बेसिस पर पहले ही लागू कर चुके हैं. टैक्स चोरों की निगरानी के लिए वित्त मंत्रालय का NHAI के साथ करार है.

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क्या है फास्टैग?
FASTag एक वाहन की विंडस्क्रीन से जुड़ा हुआ एक उपकरण है. यह रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर आधारित है. इससे गाड़ी यदि चल भी रही है तो टोल बूथ से गुजरने पर अपने आप ही रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा. टोल का किराया सीधे बैंक खाते से काट लिया जाता है जो कि FASTag से जुड़ा हुआ है.
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प्वाइंटर्स-

>> ई-वे बिल के तहत RFID टैग को लागू करने की योजना को हरी झंडी संभव
>> जीएसटी चोरी पर नकेल कसने के लिए जीएसटी काउंसिल में आएगा प्रस्ताव
>> अगले साल अप्रैल से देश भर में लागू करने के प्रस्ताव पर मंजूरी संभव
>> कंसाइनमेंट को ही गाड़ियों पर लगे RFID टैग से जोड़ की योजना
>> जीएसटी विभाग को किसी भी वाहन को ट्रैक करने में होगी आसानी
>> इलेक्ट्रॉनिक वेरीफिकेशन और कम्पलायंस में भी होगी आसानी
>> टोल नाके पर लगने वाली लंबी कतारों से भी वाहनों को मिलेगी राहत
>> काउंसिल में राज्यों के साथ RFID लिंकिंग की स्टेट्स रिपोर्ट पर भी चर्चा
>> उत्तरप्रदेश और दिल्ली इसे पायलट बेसिस पर पहले ही लागू कर चुके हैं
>> टैक्स चोरों की निगरानी के लिए वित्तमंत्रालय का NHAI के साथ करार है

(आलोक प्रियदर्शी, संवाददाता- CNBC आवाज़)

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First published: September 16, 2019, 6:33 PM IST
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