कोरोना संकट के बीच अच्छी खबर: चीन की वजह से भारत का चावल एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा

भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर देश है.
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर देश है.

India Rice Export 2020: साल 2020 में चावल का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 42% बढ़कर 1.4 करोड़ टन हो सकती है. जबकि पिछले साल चावल का एक्सपोर्ट 99 लाख टन रहा था. भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर देश है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 8:51 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना संकट के बीच भारत के चावल एक्सपोर्ट (Rice Export) के लिए अच्छी खबर आई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इस साल चावल का एक्सपोर्ट रिकॉर्ड (India Rice Export) स्तर पर पहुंच सकता है. इसके पीछे मुख्य कारण थाईलैंड में सूखे के कारण चावल का उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसके अलावा चीन और वियतनाम में आई बाढ़ से वहां की फसल खराब हो गई है. इसके अलावा भारत के अन्य देशों से कम कीमत पर चावल का निर्यात करता है.आपको बता दें कि 25 फीसदी ग्लोबल शेयर के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा राइस एक्सपोर्ट करने वाला देश है.एपीडा के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात 38.36 लाख टन का हुआ है जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 38.55 लाख टन से थोड़ा कम है.

भारत मुख्य रूप से बांग्लादेश, नेपाल, बेनिन और सेनेगल को गैर-बासमती चावल का निर्यात करता है. जबकि बासमती चावल मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट के देशों जैसे ईरान, सऊदी अरब और इराक को निर्यात करता है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है चावल एक्सपोर्ट-साल 2020 में भारत से चावल का एक्सपोर्ट 1.4 करोड़ टन हो सकता है, जो पिछले साल 99 लाख टन था. उन्होंने कहा कि सूखे कारण थाईलैंड में चावल का उत्पादन घटा है, जिससे निर्यात भी कम होने का अनुमान है. इसके अलावा वियतनाम कम फसल के कारण निर्यात में कटौती कर रहा है. ऐसी स्थिति में भारत ही चावल की आपूर्ति करेगा. आपको बता दें कि बीते महीने केंद्र सरकार (Government of India) ने फैसला लेते हुए बासमती (Basmati Rice Export) और गैर बासमती चावल (Non Basmati Rice Export) के एक्सपोर्ट की शर्तों में ढील दी है. ये छूट यूरोपीयन देशों के लिए एक्सपोर्ट में दी गई है.



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अफ्रीकी देशों में गैर-बासमती चावल की मांग बढ़ने से इस साल भारत का निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद है. आगे उन्होंने कहा कि, बासमती चावल के निर्यात में एक तरह से स्थिर हो गया है लेकिन अन्य देशों के मुकाबले कम कीमत के कारण गैर-बासमती चावल की डिमांड बढ़ी है.अनुमान है कि भारतीय गैर-बासमती चावल का निर्यात एक साल पहले के 95 लाख टन से दोगुना हो सकता है, जबकि बासमती चावल का निर्यात करीब 45 लाख टन के आसपास स्थिर रह सकता है.

बाढ़ से प्रभावित हुआ है चीन में चावल का उत्पादन- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की कम कीमत से चावल के निर्यात को सपोर्ट मिलेगा. इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया 3% फिसला है. इसके अलावा चीन में बाढ़ के संकट के कारण फसल प्रभावित हुआ है. इससे चीन, अफ्रीका को कम चावल निर्यात करेगा. इससे भी भारतीय चावल निर्यात को सपोर्ट मिलेगा.

थाईलैंड और वियतनाम में बाढ़ से नुकसान-रॉयटर्स के मुताबिक, इस साल थाईलैंड से चावल का निर्यात घटकर 65 लाख टन रहने की उम्मीद है, जो 20 साल के न्यूनतम स्तर से भी कम है. इसके अलावा वियतनाम से भी चावल निर्यात में कमी देखी जा सकती है. इसकी वजह मीकोंग डेल्टा में जल स्तर की कमी है. क्योंकि यह डेल्टा वियतनाम का सबसे बड़ा चावल उत्पादक क्षेत्र है.
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