Right to Repair: गर्मियों में लागू होगा नया कानून, अब कंपनियों को करनी ही होगी होम अप्‍लायंसेस की सर्विस

नए कानून के तहत कंपनियां घर पर ही होम अप्‍लायंसेस की मरम्‍मत करेंगी.

नए कानून के तहत कंपनियां घर पर ही होम अप्‍लायंसेस की मरम्‍मत करेंगी.

नए कानून के तहत होम अप्‍लायंसेस कंपनियों (Home Appliances Companies) को फ्रिज, वाशिंग मशीन और टीवी जैसे उपकरणों की रिपेयरिंग (Repairing Service) करनी ही होगी. यूरोप (Europe) में लागू होने वाले नए कानून से आम लोगों का बिजली का खर्च बचेगा और पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 5:47 PM IST
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नई दिल्‍ली. यूरोपीय संघ में इन गर्मियों से लागू होने वाले नए कानून (EU Rules) के तहत फ्रिज, वाशिंग मशीन और टीवी जैसे बड़े घरेलू उपकरण (Large Home Appliances) लंबे समय तक चलने के साथ ही ग्राहकों को सस्‍ते भी पड़ने चाहिए. सरकार ने पुष्टि की है कि ग्राहकों को गर्मियों से खरीदे गए होम अप्‍लायंसेस की मरम्‍मत का अधिकार (Right to Repair) मिल जाएगा. कुछ मंत्रियों ने कहा कि हम यूरोपीय संघ नियमों को लागू कर अपना वादा निभा रहे हैं ताकि आम लोगों के बिजली के बिल (Electricity Bill), सर्विस चार्ज (Service Charges) जैसे खर्चों को कम किया जा सके. साथ ही पुराने उपकरणों के खराब होने पर नए खरीदने की जरूरत को कम किया जा सके.

ग्राहक कर रहे थे अप्‍लायंसेस की शिकायत

यूरोप में बड़ी संख्‍या में ग्राहकों ने शिकायत की थी कि होम अप्‍लायंसेस लंबे समय तक नहीं चल पा रहे हैं. वहीं, अगर उनकी मरम्‍मत करानी हो तो घर के बजाय बाहर भेजना पड़ रहा है. नए कानून के मुताबिक, पहली बार मैन्‍युफैक्‍चरर्स को ग्राहकों के लिए रिपेयरिंग सुविधा देने को कानूनी तौर पर स्‍पेयर पार्ट्स बनाने की छूट मिलेगी. नए कानून का मकसद बड़े घरेलू उपकरणों को 10 साल तक ग्राहकों के इस्‍तेमाल लायक बनाए रखना है. अधिकारियों का अनुमान है कि समय पर सर्विस होने से ग्राहकों को जीवनभर हर साल बिजली के बिल पर औसत 6,000 रुपये (75 यूरो) से ज्‍यादा की बचत होगी.

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ग्राहकों के साथ पर्यावरण को भी नुकसान

अनुमान के मुताबिक, नए कानून की मदद से सिर्फ ब्रिटेन से ही निकलने वाले 15 लाख टन इलेक्ट्रिकल कचरे को कम किया जा सकेगा. इससे यूरोपीय संघ कार्बन उत्‍सर्जन को कम कने में भी दुनिया को योगदान कर सकेगा. दरअसल, वारंटी खत्म होते ही ज्‍यादातर इलेक्ट्रिक इक्‍यूपमेंट्स जवाब देने लगता है. जल्द ही उन्‍हें फेंकने की नौबत आ जाती है. इनकी मरम्‍मत घर पर नहीं कराई जा सकती और ना ही खराब उपकरणों को बेचा जा कसता है. ये इलेक्ट्रिकल वेस्‍ट का हिस्सा बन जाता है. साफ है कि इससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान के साथ ही पर्यावरण को भी हानि होती है. इसी को देखते हुए यूरोपीय देशों में राइट टू रिपेयर की मुहिम चली. अब नीतियों में बदलाव के जरिये मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर सख्ती बरतने की शुरुआत हो रही है.

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फेंकने के बजाय मरम्‍मत को प्रोत्‍साहन

कारोबार व ऊर्जा सचिव क्‍वासी क्‍वार्तेंग ने कहा कि नए कानून के जरिये इलेक्ट्रिकल गुड्स की मैन्‍युफैक्‍चरिंग में सभी मानकों का सख्‍ती से पालन कराया जाएगा. साथ ही इनमें कमी आने पर कचरे में फेंकने के बजाय मरम्‍मत कराने को प्रोत्‍साहित किया जाएगा. इससे ग्राहकों को पैसों की बचत होगी और पर्यावरण को कम नुकसान होगा. हम सुनिश्चित कराएंगे कि इलेक्ट्रिकल गुड्स बिजली की खपत कम करें और हर बार खराब होने पर नई खरीदारी पर अंकुश लगाकर संसाधनों के दुरुपयोग को रोका जाए. बता दें कि इस मुद्दे को कॉमन एंवॉयरमेंट ऑडिट कमेटी ने उठाया था. नया कानून ग्रेट ब्रिटेन, उत्‍तरी आयरलैंड समेत यूरोपीय संघ में लागू होगा.
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