मुकेश अंबानी ने कहा-जीवाश्म ईंधन से ग्रीन ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए पूरी तरह से तैयार भारत

RIL के अध्यक्ष मुकेश अंबानी के साथ खास बाचतीच
RIL के अध्यक्ष मुकेश अंबानी के साथ खास बाचतीच

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL-Reliance Industries) के अध्यक्ष मुकेश अंबानी 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह की आत्मकथा (Biography) के लॉन्चिंग पर वर्चुअली बोल रहे थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 12:41 PM IST
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नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Mukesh Ambani, Chairman,Reliance Industries) के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत पूरी तरह से ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों के लिए एक पूर्ण विकल्प है. उन्होंने कहा कि ऊर्जा का परिवर्तन उनके मूल उद्देश्यों में से एक है. मुकेश अंबानी 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह की आत्मकथा (Biography) के लॉन्चिंग पर वर्चुअली बोल रहे थे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सिंगापुर में सामाजिक नीतियों के मंत्री ने भी वर्चुअल रूप से इस इवेंट में हिस्सा लिया. इस मौके पर मुकेश अंबानी से हुए कुछ सवाल-जवाब पर एक नजर डालते हैं.

सवाल- आप पहली बार एनके सिंह से कब मिले और तब से उनके साथ अपनी बातचीत के बारे में बताएं?

जवाब- मुकेश अंबानी ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा 'मैं उन्हें एनके अंकल कहता हूं, क्योंकि हमारा एक बहु-पीढ़ी संबंध है. मेरे पिता और उनके पिता एक-दूजे को जानते थे. जब उन्होंने सेवाओं में प्रवेश किया तो मेरे पिता उन्हें अपने मित्र के पुत्र के रूप में जानते थे. इस तरह आपसी रिश्तेदारी बढ़ी. जब मैं स्टेनफोर्ड से लौटा तो उनसे मेरा परिचय करवाया गया.



मुझे बताया गया कि वह एक प्रतिभाशाली आईएएस अफसर हैं जो यह देखते हैं कि देश कैसे काम करता है. यह मेरी उनसे पहली मुलाकात और बातचीत थी. मुझे आज भी याद है कि मेरी पहली धारणा यह बन गई थी कि आईएएस लोगों की अपनी अलग पहचान होती है.
मैंने उन्हें गृह मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय यहां तक कि पीएमओ में भी सेवा देते हुए देखा है. तीस वर्षों में आर्थिक परिवर्तन के वह एक मोडेस्ट रिंग मास्टर्स में से एक हैं. मैं उनके विचारों को समझने के लिए उनसे करीब से मिला यह मेरा सौभाग्य है और मुझे उनके अनुभव से अपने व्यवसाय में खूब लाभ मिला.

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सवाल- धीरूभाई ने एक बार अपने कार्यालय में एक पोस्टकार्ड निकाला और हर भारतीय इस पोस्टकार्ड के जरिए एक-दूजे से बात करें, तो सोचों भारत का कहां पहुंचा जाएगा? जियो जून में 400 मिलियन सब्सक्राइबर्स के नजदीक पहुंच गया, यह सबसे तेजी से बढ़ने वाला व्यवसाय और दूरसंचार क्षेत्र है, क्या आप जल्दी से हमें असफलताओं, सफलताओं और चुनौतियों के बारे में समझा सकते हैं?

जवाब- जैसा कि आपने मेरे पिता के बारे में बात की और जैसा कि एनके अंकल की किताब में भी उनका जिक्र किया गया है. मुझे लगता है यह बहुत अच्छा है जो मुझे खुशी देता है. मेरे पिता के पिता एक स्कूल अध्यापक थे. पिता जी 1960 में मुंबई में एक सपना लेकर आए थे.

वह सिर्फ एक हजार रुपये लेकर मुंबई निकले थे और उनका मानना था कि अगर आप पैसों को व्यवसाय में निवेश करते हैं तो आप दुनिया पर राज करने के अपने सपनों को जी सकते हैं. हमे अपना व्यवसाय बढ़ने के बाद राजनितिक रूप से भी कई समस्याएं भी झेलने पड़ी लेकिन हमने शासक वर्ग की मानसिकता को भी बदल दिया और नौकरशाही की मानसिकता को भी अधिक सशक्त होने की जरुरत है.

सवाल- आप किस रूप में याद किए जाने की इच्छा रखते हैं?

जवाब- खैर, यह मेरे सोचने की इच्छा से भी अधिक है. यह मेरे बारे में नहीं है बल्कि यह इस बारे में है कि मैं अपने समाज में योगदान करने के लिए और क्या कर सकता हूं, मुझे लगता है मैं इस ओर काम कर रहा हूं और जैसा कि हमने कहा, मैं वास्तव में तीन चीजें कर रहा हूं जिसमें देश को डिजिटल समाज बनाना है. इस डिजिटल समाज में भविष्य के सभी उद्योग शामिल हैं.

दूसरा, मुझे लगता है कि अब शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन की जरुरत है. 200 मिलियन बच्चों का भविष्य हमारी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है. शिक्षा क्षेत्र में सुगम परिवर्तन और छात्रों में दक्षता लाने में कम से 8 से 10 वर्ष का समय लगेगा. और मुझे लगता है कि आप जानते हैं कि इस ओर हम क्या कर रहे हैं जो हमारे वित्त मंत्री ने अपनी किताब में उपयुक्त रूप से वर्णन किया है.

तीसरे पहलू में हम वास्तव में ऊर्जा के परिवर्तन की दिशा में काम कर रहे हैं. मैं दोबारा कहता है कि भारत इसके लिए एक उचित प्लेटफॉर्म है. अगले कुछ दशकों में, जीवाश्म ईंधन से पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ जाएंगे. आत्मानिर्भर बनो और वास्तव में इसकी कोशिश करो और देखो कि क्या हम भारत के विकास के संदर्भ में अपना मामूली योगदान दे सकते हैं.

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सवाल- भारतीय विनिर्माण अभी भी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी नहीं बन पाया है और हम जो चाहते हैं उससे अधिक विकास धीमा क्यों है और क्या किया जा सकता है?

जवाब- हमें सिर्फ विनिर्माण पर पुनर्विचार और पुनर्निवेश करने की जरुरत है. मैं इस ओर आपके सवाल से सहमत होता लेकिन अगर आप एक बार हमारे खुद की रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों पर नजर घुमाते जहां हम विश्व स्तर पर सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी हैं तो शायद इस पर प्रश्न नहीं उठता. पारिस्थितिक रूप से सोचें तो हमारे लिए भविष्य के उद्योगों को गले लगाने के कई अवसर हैं.

नेतृत्व के लिए हम जो तीन विशिष्ट चीजें कर सकते हैं, वह है हमारे छोटे और मध्यम क्षेत्र को मजबूत करना. ठीक उसी तरह जिस तरह हमने तकनीकी क्षेत्र में विकास किया है. मुझे लगता है कि छोटे और मध्यम क्षेत्र के उद्यमियों का समर्थन करने के लिए भारत अब परिपक्व है.(Note: इस खबर को हमारी सहयोगी वेबसाइट मनीकंट्रोल से ट्रांसलेट किया गया है.)

डिस्केलमर- न्यूज18 हिंदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.
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