SBI चीफ से जब पूछा कि क्या आपकी सैलरी कटेगी? जवाब मिला- ...फिर रोड पर रहना पड़ेगा

SBI चीफ से जब पूछा कि क्या आपकी सैलरी कटेगी? जवाब मिला- ...फिर रोड पर रहना पड़ेगा
भारतीय स्टेट बैंक चेयरमैन रजनीश कुमार

SBI चीफ रजनीश कुमार (Rajnish Kumar) से एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पूछा गया कि क्या लीडरशीप टीम्स की सैलरी में कटौती की जाएगी तो उन्होंने यह जवाब दिया है. पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर बैंकर्स की सैलरी में बड़ा अंतर है.

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नई दिल्ली. भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) दुनिया के 50 सबसे बड़े उधारकर्ता में से एक है. SBI की कुल संपत्ति करीब 30 लाख करोड़ रुपये है और इस कंपनी में तकरीबन 2.5 लाख कर्मचारी काम करते हैं. शुक्रवार को एनलिस्ट्स के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान SBI  चेयरमैन रजनीश कुमार (SBI Chairman Rajnish Kumar) ने अपनी सैलरी कटौती को लेकर मजाकिया लहजे में कहा कि ऐसा हुआ तो उन्हें रोड पर रहना पड़ेगा.

इस वीडियो कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान जब रजनीश कुमार से पूछा गया कि क्या प्राइवेट बैंकों की तर्ज पर वो भी अपने लीडरशीप टीम्स की सैलरी काटेंगे. इस पर उन्होंने मजा​किया लहजे में जवाब दिया, 'रोड पर आके रहना पड़ेगा, पहले ही इतनी कम मिलती है.'

कितनी है रजनीश कुमार को सैलरी?
देश के सबसे बड़े बैंक चीफ का यह जवाब भले ही मजाकिया हो, लेकिन इस बात ने एक बार फिर दर्शाया है कि प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंकर्स की सैलरी में कितना बड़ा अंतर है. एसबीआई की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2019 में रजनीश कुमार को पारिश्रमिक के तौर पर 29,53,750 रुपये मिला है.



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HDFC प्रमुख की सैलरी 55 करोड़ रुपये
देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक यानी HDFC Bank की बात करें तो इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी को फाइनेंशियल ईयर 2019 में 55 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला है. बता दें कि एसबीआई की तुलना में एचडीएफसी बैंक का कुल एसेट करीब तीन गुना कम है.

प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंकर्स की सैलरी में बड़ा अंतर
देश के प्राइवेट और पब्लिक बैंकों के प्रमुखों की सैलरी में यह बड़ा अंतर एक लंबे समय से है. हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि सरकारी बैंक प्रमुखों को कई अन्य सहूलियतें भी मिलती हैं, जिसमें प्राइम लोकेशन पर आवास भी शामिल है. जबकि, प्राइवेट बैंक प्रमुखों को यह सुविधा नहीं मिलती.

CNBC TV18 ने अपनी एक रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखा है कि कई कमिटी और बैंक बोर्ड ब्यूरो ने भी पब्लिक सेक्टर बैंकों में परिश्रमिक संरचना में बदलाव की सलाह दी है. ​लेकिन, इसके बावजूद भी बीते कुछ सालों में यह अंतर बढ़ता ही गया है.

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First published: June 6, 2020, 8:10 PM IST
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