विदेशों में कसे जा रहे हैं हरियाणा के इस शहर में बने नट-बोल्ट, NASA-ISRO भी हैं इसके ग्राहक

इसरो के साथ ही डीआरडीओ भी रोहतक के बने नट-बोल्ट का इस्तेमाल करते हैं.
इसरो के साथ ही डीआरडीओ भी रोहतक के बने नट-बोल्ट का इस्तेमाल करते हैं.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) पहले से ही यहां के बने नट-बोल्ट (Fastener) का इस्मेमाल अपने मिशन और परियोजनाओं में कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 17, 2020, 8:18 AM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा का शहर रोहतक (Rohtak) बेशक देश में इतनी चर्चा नहीं पाता हो, लेकिन विदेशों में इसका खूब नाम है. इतना ही नहीं अमेरिका (America) की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और आर्मी भी रोहतक के नाम से वाकिफ हैं. हाल ही में नासा और अमेरिकन आर्मी (ARMY) को नट-बोल्ट की सप्लाई देने वाली अमेरिका की एक कंपनी और रोहतक की एरो फास्टनर के बीच कारोबारी करार हुआ है. कुछेक देशों को छोड़ विदेशों में हरियाणा (Haryana) के बने नट-बोल्ट ही कसे जा रहे हैं.

अमेरिकन कंपनी की निगाह में ऐसे आया था हरियाणा का नट-बोल्ट  

ऐरो फास्टनर प्राइवेट लिमिटेड के 44 वर्षीय मैनेजिंग डायरेक्टर जसमेर लाठर की कंपनी पिछले 5 साल से इसरो और 8 साल से डीआरडीओ के लिए नट-बोल्ट तैयार किए जाते हैं. अमेरिका की कंपनी के साथ हुए करार के बारे में बात करते हुए लाठर ने बताया, कुछ नए डिजाइन के फास्टनर (नट-बोल्ट) हमने तैयार किए हैं. फरवरी 2020 में रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उपकरणों से संबंधित एक प्रदर्शनी का आयोजन किया था.



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हमने भी वहां अपने नट-बोल्ट का स्टॉल लगाया था. इसी दौरान अमेरिका की कंपनी की निगाह हमारे प्रोडक्ट पर पड़ी. मैटल और मैटल में मिलाए जाने वाले खास तरह के कैमिकल के चलते उन्हें हमारे नट-बोल्ट बेहद पसंद आए. अभी कुछ वक्त पहले ही हमारी कंपनी और अमेरिकन कंपनी के साथ कागजी करार साइन हुआ है.

पीएम मोदी के सपने को ऐसे पूरा किया एरो फास्टनर ने

जसमेर बताते हैं कि टैंक, मिसाइल, सेटेलाइट में उपयोग होने वाले फास्टनर के लिए केमिकल का मिश्रण बहुत मायने रखता है. रूस व अन्य कुछ देशों में सेना की डिमांड के मुताबिक रॉ-मैटेरियल मिलता है. लेकिन सप्लाई में परेशानी आती थी. रक्षा मंत्रालय की कई ऐसी योजनाएं थीं, जिनमें रूस से नट-बोल्ट या फिर रॉ-मैटेरियल के लिए आश्रित थे. रूस डिमांड के बावजूद तैयार नट-बोल्ट या फिर रॉ-मैटेरियल देरी से भेजता था. इस कारण योजनाएं समय पर पूरी करने में देरी होती. लेकिन अब हम अपने यहां तैयार कर रहे हैं. आत्मनिर्भर बनकर पीएम नरेन्द्र मोदी के सपने को भी पूरा किया.

कोरोना काल में वेंटिलेटर के लिए रक्षा मंत्रालय को दी नट-बोल्ट की सप्लाई

कोरोना संक्रमण काल में रक्षामंत्रालय की भारत इलेक्ट्रानिक्स कंपनी वेंटीलेटर बना रही थी. ऐसे में नट-बोल्ट की जरूरत भी थी. लॉकडाउन के जिस दौर में छोटी-बड़ी सैकड़ों कंपनियां बंद थी, तो एरो फास्टनर ने  30 हजार नट-बोल्ट व कुछ अन्य उपकरण तैयार कर रक्षामंत्रालय को सप्लाई दी. जसमेर लाठर सेना के लिए आठ लाख बोटिंग मशीनों के कल-पुर्जे भी तैयार कर चुके हैं.
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