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कोरोना वायरस से बचने के लिए आ सकते हैं ये खास करेंसी नोट, SBI ने दिए सुझाव

News18Hindi
Updated: March 22, 2020, 12:01 PM IST
कोरोना वायरस से बचने के लिए आ सकते हैं ये खास करेंसी नोट, SBI ने दिए सुझाव
नोट से भी बीमारी फैलने का खतरा

एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह पेपर करेंसी नोटों के बजाय पॉलीमर करेंसी नोटों (Polymer Currency Notes) के इस्तेमाल की संभावना की जांच करे. कोरोना से बचने के लिए लेनदेन के डिजिटल मोड पर स्विच करना बेहतर है.

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  • Last Updated: March 22, 2020, 12:01 PM IST
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नई दिल्ली. नोटों से कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार बड़ा कदम उठा सकती है. एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह पेपर करेंसी नोटों के बजाय पॉलीमर करेंसी नोटों (Polymer Currency Notes) के इस्तेमाल की संभावना की जांच करे. बता दें कि ऑस्ट्रेलिया, यूके और कनाडा जैसे देशों में पॉलीमर करेंसी नोटों का इस्तेमाल होता है.  कोरोना से बचने के लिए लेनदेन के डिजिटल मोड पर स्विच करना बेहतर है. लेकिन भारत जैसे देश में पूरी तरह नकदी बंद करना संभव नहीं है.  इसलिए, कागजी मुद्रा नोटों के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प की आवश्यकता है.

क्या है पॉलीमर नोट?- पॉलीमर करेंसी नोट को एक सिंथेटिक पॉलीमर से बनाया जाता है, जिसको बाइएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (बीओपीपी) कहते हैं. इसमें मेटामेरिक स्याही का उपयोग होता है. पॉलीमर नोट ज्यादा टिकाऊ होते हैं. इसका इस्तेमाल सबसे पहले रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में शुरू किया था. अब ब्रूनेई, कनाडा, मालदीव, मॉरीशस, निकारागुआ, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, रोमानिया, त्रिनिदाद, टोबैगो और वियतनाम, यूनाइटेड किंगडम, नाइजीरिया समेत अनेक देशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है.

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नोट के जरिए वायरस फैलने के लिए तत्काल कदम उठाया जाए



फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 मार्च, 2020 को अपनी 'इकोरैप' रिपोर्ट में एसबीआई रिसर्च ने कहा, भले ही सावधानी बरती जाए, फिर भी नकद उपयोग से बचा नहीं जा सकता और यह किसी भी वायरस को फैलाने के लिए सबसे आसान कैरियर बन जाता है. इसलिए, करेंसी नोट्स के जरिए किसी भी वायरस के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए. यूके, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने करेंसी के माध्यम से संक्रमण फैलाने के जोखिम को कम करने के लिए पॉलीमर नोटों पर स्विच किया है. इसलिए, भारत में पॉलीमर नोटों के उपयोग की संभावनाओं की भी जांच की जानी चाहिए.

जेब में रखे नोट से भी बीमारी फैलने का खतरा
हालांकि, कुछ समय के लिए, डिजिटल भुगतान सहित वैकल्पिक भुगतान के तरीकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. एसबीआई रिसर्च ने रिपोर्ट में करेंसी नोटों और सूक्ष्मजीवों के संबंध को दर्शाने वाली कई शोध रिपोर्ट्स का हवाला दिया. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की एक रिपोर्ट ने संकेत दिया था कि करेंसी नोट सूक्ष्म जीवों को ले जाते हैं जो बीमारियों और संक्रमण का कारण बन सकते हैं.

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CAIT ने सुझाव दिया कि यूके, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने पॉलीमर नोटों को का इस्तेमाल शुरू कर दिया है ताकि संक्रमण की आशंक कम हो सके. ऐसे में भारत में भी पॉलिमर नोटों की संभावना को तलाशना चाहिए.

अपनाएं ये सावधानी-
>> कोशिश करें कि नोटों के बजाय डिजिटल पेमेंट करें.
>> नोट छूने के बाद आंख या मुंह पर तब तक हाथ न लगाएं जब तक सैनीटाइजर न लगा लें
>> नोट को गिनने के लिए थूक कतई न लगाएं.

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First published: March 22, 2020, 11:10 AM IST
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