आज से बदले ATM से पैसे निकालने और सेविंग अकाउंट में पैसे रखने से जुड़े नियम, नहीं जानने पर होगा बड़ा नुकसान

केंद्र सरकार की ओर से सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस और एटीएम ट्रांजैक्‍शन लिमिट की छूट 30 जून को ख्‍ज्ञत्‍म हो चुकी है. अब इन पर नए नियम लागू होंगे.
केंद्र सरकार की ओर से सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस और एटीएम ट्रांजैक्‍शन लिमिट की छूट 30 जून को ख्‍ज्ञत्‍म हो चुकी है. अब इन पर नए नियम लागू होंगे.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने लॉकडाउन के दौरान एटीएम से पैसे निकालने और बचत खाते में न्‍यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) की सीमा तीन महीने के लिए खत्‍म कर दी थी. ये अवधि 30 जून को खत्‍म हो गई है. अब मिनिमम बैलेंस 5,000 से 10,000 रुपये के बीच हो सकती है. वहीं, दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालने पर अब आपसे शुल्‍क वसूला जा सकता है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के मद्देनजर देशभर में लॉकडाउन (Lockdown) की घोषणा के ही दिन यानी 24 मार्च 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण (FM Nirmala Sitharaman) ने एटीएम चार्जेज (ATM Charges) और सेविंग अकाउंट्स में न्‍यूनतम राशि (Minimum balance) रखने की बाध्‍यता को 3 महीने ​के लिये हटा दिया था. इसके बाद ग्राहकों को किसी भी बैंक के नजदीकी एटीएम से कितनी भी बार पैसे निकालने की छूट मिल गई. साथ ही ज्‍यादा ट्रांजैक्‍शन पर अतिरिक्‍त चार्ज देने की जरूरत भी नहीं रही. सरकार ने कहा था कि ये छूट इसलिए दी गई है ताकि कैश निकालने के लिए लोगों को घर से दूर ना जाना पड़े. ये दोनों छूट 30 जून 2020 तक के लिए थीं यानी आज से ये नियम बदल जाएंगे.

अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर पेनाल्‍टी
देश में हर बैंक सेविंग अकाउंट में न्यूनतम राशि रखवाते हैं. मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर ग्राहकों पर पेनाल्‍टी (Penalty) लगाई जाती है. केंद्र की ओर से मिनिमम बैलेंस को लेकर मिली छूट खत्‍म होने के बाद अब तक किसी भी बैंक ने इसे आगे बढ़ाने की घोषणा नहीं की है. वहीं, वित्त मंत्रालय की ओर से भी इसे जारी रखने की कोई जानकारी नहीं आई है. ऐसे में माना जा रहा है कि अब एटीएम चार्जेज और मिनिमम बैलेंस की छूट बंद हो जाएगी.

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प्रीमियम अकाउंट के लिए ज्‍यादा मिनिमम बैलेंस


केंद्र की ओर से दी गई छूट खत्‍म होने के बाद कहा जा रहा है कि सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस 5,000 से 10,000 रुपये के बीच रखा जा सकता है. प्रीमियम अकाउंट्स के लिए ये ज्‍यादा भी हो सकता है. हिताची पेमेंट सर्विस के एमडी व सीईओ (कैश बिजनेस) रुस्‍तम ईरानी ने कहा कि सरकार की ओर से ये दोनों छूट देने का फैसला बहुत अच्‍छा था, लेकिन इसे आगे बढ़ाने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है.

'अभी हालात सामान्‍य होने में लगेगा कुछ वक्‍त'
कंफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्‍ट्री के डायरेक्‍टर के श्रीनिवास का कहना है कि एटीएम ट्रांजैक्‍शन लिमिट में छूट के बाद भी लॉकडाउन के कारण लेनदेन प्रभावित हुआ है. अभी भी लोग एटीएम से पैसे निकालने कम ही पहुंच रहे हैं. अनलॉक की घोषणा के साथ तमाम कारोबारी गतिविधियां धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं, लेकिन एटीएम ट्रांजैक्‍शन की स्थिति अभी तक कोविड-19 से पहले वाले स्‍तर पर नहीं पहुंच पाई है. आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, एटीएम ट्रांजैक्‍शन में कम से कम 30 फीसदी की कमी आई है. ऐसे में एटीएम ट्रांजैक्‍शन लिमिट को आगे बढ़ाया जाना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि अभी हालात सामान्‍य होने में वक्‍त लगेगा.

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क्‍या हैं एटीएम ट्रांजैक्शन लिमिट से जुड़े नियम
आमतौर पर कोई भी बैंक एक महीने में 5 बार फ्री में लेनदेन करने की सुविधा देते हैं. अन्य बैंकों के एटीएम के लिए यह लिमिट 3 बार की ही होता है. इस लिमिट से ज्यादा बार एटीएम ट्रांजैक्शन करने के लिए बैंक ग्राहकों से 8 से 20 रुपये तक का अतिरिक्त चार्ज वसूलते हैं. यह चार्ज इस बात पर भी निर्भर करता है कि ग्राहक ने कितनी रकम का लेनदेन किया है. दरअसल, जब ग्राहक तय संख्‍या से ज्‍यादा बार दूसरे बैंक के एटीएम से ट्रांजैक्‍शन करते हैं तो उनके बैंक को एटीएम चलाने वाले बैंक या कंपनी को इंटरचेंज फी देनी होती है. हालांकि, एटीएम चार्जेज काफी कम होते हैं. इसलिए अपने एटीएम से ही पैसे निकालने के चक्‍कर में कोरोना वायरस का जोखिम उठाने की जरूरत नहीं है.
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