रुपये में 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट, जानें कमजोर रुपया के क्या हैं फायदे और नुकसान?

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 113 पैसे लुढ़ककर 5 महीने के न्यूनतम स्तर 70.73 पर पहुंच गया. रुपये में किसी एक दिन में छह साल में बड़ी गिरावट है.

News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 10:15 PM IST
रुपये में 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट, जानें कमजोर रुपया के क्या हैं फायदे और नुकसान?
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 113 पैसे लुढ़ककर 5 महीने के न्यूनतम स्तर 70.73 पर पहुंच गया. रुपये में किसी एक दिन में छह साल में बड़ी गिरावट है.
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Updated: August 5, 2019, 10:15 PM IST
रुपये की विनिमय दर में सोमवार को बड़ी गिरावट आई. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 113 पैसे लुढ़ककर 5 महीने के न्यूनतम स्तर 70.73 पर पहुंच गया. रुपये में किसी एक दिन में छह साल में बड़ी गिरावट है. अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव को लेकर निवेशकों में चिंता से बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी, यूआन के अवमूल्यन और कश्मीर मुद्दे को लेकर अनिश्चितता से रुपये में यह गिरावट आई. यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है जब रुपये में गिरावट दर्ज की गयी. इस दौरान यह 194 पैसे लुढ़क गया है.

अगस्त 2013 के बाद किसी एक दिन में रुपये में भारी गिरावट
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार अमेरिका-चीन के बीच व्यापार संबंधित चिंताओं का निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा और घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ा. अंतरबैंक विदेशी विनिमय बाजार में उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में रुपया 70.20 पर खुला और एक समय 70.24 तक चला गया. बाद में इसमें सुधार आया और 70.18 के स्तर पर आ गया. अंत में यह शुक्रवार के बंद के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की तुलना में 113 पैसे यानी 1.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 70.73 के स्तर पर पहुंच गया. एक मार्च के बाद यह स्तर नहीं देखा गया. यह अगस्त 2013 के बाद किसी एक दिन में रुपये में भारी गिरावट है.

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क्या है नुकसान?
भारत अपनी जरूरत का करीब 80% पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता है. रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात महंगा हो जाएगा. इस वजह से तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ा सकती हैं. डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई बढ़ सकती है. इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. रुपये की कमजोरी से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं. छुट्टियां बिताने या पढ़ाई के लिए विदेश जाना महंगा हो जाएगा. कंप्यूटर्स, स्मार्टफोन और कारें महंगी हो जाएंगी, क्योंकि इनके उत्पादन में कई आयातित चीजों का इस्तेमाल होता है. आयात आधारित सभी उद्योगों पर खराब असर पडे़गा.

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क्या है फायदा?
कमजोर रुपया एक्सपोर्टर्स के लिए अच्छी खबर है. इसकी वजह यह है कि उन्हें विदेश में सामान बेचने से आय होती है. उन्हें अपने उत्पाद की ज्यादा कीमत मिलती है. उदाहरण के लिए आईटी और फार्मा कंपनियों को रुपये में कमजोरी से फायदा होता है. इसकी वजह यह है कि उनकी ज्यादातर आय विदेश से होती है.
First published: August 5, 2019, 8:09 PM IST
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