डॉलर के मुकाबले रुपये में 20 महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी, आपकी जेब पर होगा सीधा असर

डॉलर के मुकाबले रुपये में 20 महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी, आपकी जेब पर होगा सीधा असर
बीते के सप्ताह में डॉलर के मुकाबले रुपये में 2 फीसदी की तेजी आई है.

Dollar v/s Rupees: शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूती के साथ 73.40 के स्तर पर पहुंच चुका है. बीते एक सप्ताह की बात करें तो रुपये में करीब 2 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. यह 21 दिसंबर 2018 के बाद किसी एक सप्ताह में सबसे बड़ी तेजी है. इससे आम लोगों को भी फायदा होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 5:13 PM IST
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नई दिल्ली. शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले 6 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू इक्विटी मार्केट (Equity Market) में इनफ्लो बढ़ाने के बाद रुपये में तीन सत्रों से लगातार तेजी देखने को मिली है. फिलहाल, डॉलर के मुकाबले रुपये का भाव .60 फीसदी बढ़कर 73.40 के स्तर पर है. इसके पहले सत्र में यह 73.81 के स्तर पर बंद हुआ था. पिछले सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपये में 73.28 का स्तर भी देख गया, जोकि 5 मार्च के बाद का उच्चतम स्तर है. इस दौरान प्रति अमेरिकी डॉलर रुपया 73.28 से 73.87 के रेंज में ट्रेड करते नजर आया.

20 महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी
बीते एक सप्ताह की बात करें तो रुपये में करीब 2 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. यह 21 दिसंबर 2018 के बाद किसी एक सप्ताह में सबसे बड़ी तेजी है. दरअसल, यह खबरें थीं कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर खरीद रहा ताकि रुपये में बड़ी गिरावट को रोका जा सके. इस खबर के बाद पिछले एक सप्ताह में रुपये में थोड़ी टाइट रेंज में ट्रेडिंग देखने को मिली.

फेड की पॉलिसी के बाद जोखिम उठाने की क्षमता को बल
आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, 'सरकारी बैंकों द्वारा बिड से पीछे हटने की वजह से रुपये में मजबूती देखने को मिली. जबकि, केंद्रीय बैंक अक्रामकता से डॉलर खरीद रहा है.' एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के कंरसी रिसर्च हेड राहुल गुप्ता का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में यह तेजी अप्रत्याशित है और ट्रेडर्स भी इसे लेकर अंचभित हैं. पहले आरबीआई 74.50 के स्तर को आरबीआई बचा रहा था. लेकिन अब इसमें फ्री फॉल देखने को मिल रहा है. वैश्विक स्तर पर देखें तो फेड के प्रोत्साहन के बाद जोखिम उठाने की क्षमता को बल मिला है. यही कारण है कि लोकल स्टॉक्स में इनफ्लो भी देखने को मिल रहा है.



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सेंसेक्स में भी 5 फीसदी की तेजी
घरेलू स्टॉक मार्केट में डॉलर का इनफ्लो (Dollar inflow in Stock Market) और अन्य एशियाई करंसी में बढ़त से रुपये को मजबूती मिली है. इस महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 6.2 अरब डॉलर लेकर आए हैं. इस महीने अब बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) में 5 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है.

535 अरब डॉलर से ज्यादा है फॉरेक्स रिज़र्व
एनलिस्ट्स का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की हालिया पॉलिसी से विदेशी फंड इनफ्लो को बढ़ावा मिल सकेगा. हालांकि, यह भी उम्मीद की जा रही है कि फॉरेक्स रिज़र्व (Forex Reserve) को मजबूत करने के​ लिए RBI भी समय-समय पर डॉलर की खरीद करता रहेगा. अप्रैल के बाद इसमें 60 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जिसके बाद अब यह 535.35 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.

आम आदमी पर क्या होगा असर?
>> भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी से ज्यादा पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है. रुपये में मजबूती से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात सस्ता हो जाएगा.

>> तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में कमी कर सकती हैं. डीजल के दाम गिरने से माल ढुलाई सस्ता हो जाएगा, जिसके चलते महंगाई में कमी आ सकती है.

>> इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. रुपये के मजबूत होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें घट सकती हैं.

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कैसे मजबूत और कमजोर होता है भारतीय रुपया?
रुपये की कीमत पूरी तरह डिमांड एवं सप्लाई पर निर्भर करती है. इस पर इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का भी असर पड़ता है. हर देश के पास दूसरे देशों की मुद्रा का भंडार होता है, जिससे वे लेनदेन यानी सौदा (आयात-निर्यात) करते हैं. इसे विदेशी मुद्रा भंडार कहते हैं. समय-समय पर इसके आंकड़े रिजर्व बैंक की तरफ से जारी होते हैं.

(1) अगर आसान शब्दों में समझें तो मान लीजिए भारत अमेरिका से कुछ कारोबार कर रहा हैं. अमेरिका के पास 67,000 रुपये हैं और हमारे पास 1000 डॉलर. अगर आज डॉलर का भाव 67 रुपये है तो दोनों के पास फिलहाल बराबर रकम है. अब अगर हमें अमेरिका से भारत में कोई ऐसी चीज मंगानी है, जिसका भाव हमारी करेंसी के हिसाब से 6,700 रुपये है तो हमें इसके लिए 100 डॉलर चुकाने होंगे.

(2) अब हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 900 डॉलर बचे हैं. अमेरिका के पास 74,800 रुपये. इस हिसाब से अमेरिका के विदेशी मुद्रा भंडार में भारत के जो 67,000 रुपये थे, वो तो हैं ही, लेकिन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में पड़े 100 डॉलर भी उसके पास पहुंच गए.

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(3) अगर भारत इतनी ही इनकम यानी 100 डॉलर का सामान अमेरिका को दे देगा तो उसकी स्थिति ठीक हो जाएगी. यह स्थिति जब बड़े पैमाने पर होती है तो हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूद करेंसी में कमजोरी आती है. इस समय अगर हम अंतरराष्ट्रीय बाजार से डॉलर खरीदना चाहते हैं, तो हमें उसके लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इस तरह की स्थितियों में देश का केंद्रीय बैंक RBI अपने भंडार और विदेश से खरीदकर बाजार में डॉलर की आपूर्ति सुनिश्चित करता है. (एजेंसी इनपुट के साथ)
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