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शेयर बाजार में भूचाल के बाद अब रुपये में आई भारी गिरावट, पहली बार 75/$ के नीचे फिसला, आम आदमी पर होगा ये असर

News18Hindi
Updated: March 19, 2020, 12:49 PM IST
शेयर बाजार में भूचाल के बाद अब रुपये में आई भारी गिरावट, पहली बार 75/$ के नीचे फिसला, आम आदमी पर होगा ये असर
भारतीय रुपया नीचे फिसल गया

पहले शेयर बाजार और अब रुपये में तेज गिरावट आ गई है. गुरुवार को भारतीय रुपया पहली बार 75 प्रति डॉलर के नीचे फिसल गया. देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और अर्थव्यवस्था पर इसके असर के मद्देनजर निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की, जिसका नकारात्मक असर रुपये पर देखने को मिला.

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  • Last Updated: March 19, 2020, 12:49 PM IST
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मुंबई. कोरोना के कहर का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था (Coronavirus Impact on India) पर बहुत बुरा पड़ा रहा है. पहले शेयर बाजार (Stock Market) और अब रुपये (Indian Rupee) में तेज गिरावट आ गई है. गुरुवार को भारतीय रुपया पहली बार 75 प्रति डॉलर के नीचे फिसल गया. देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और अर्थव्यवस्था पर इसके असर के मद्देनजर निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की, जिसका नकारात्मक असर रुपये पर देखने को मिला. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर 169 हो गए हैं. कारोबारियों के मुताबिक, निवेशकों में बेचैनी हैं क्योंकि दुनिया के दूसरे देशों के साथ ही घरेलू अर्थव्यवस्था भी कोरोना वायरस की महामारी के कारण गहरे संकट में घिरती हुई दिख रही है. इस बीमारी के चलते दुनिया भर में लगभग 9,000 लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग बीमार हैं.

क्यों गिर रहा है भारतीय रुपया-  घरेलू शेयर बाजार में तेज गिरावट और विदेशी निवेशकों की ओर से  बिकवाली कारोबारियों की चिंता बढ़ा रही है. इन हालात के बीच अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया पिछले सत्र के मुकाबले गुरुवार को 70 पैसे की कमजोरी के साथ 74.96 के स्तर पर खुला. रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 74.26 पर बंद हुआ था.





रेलिगेयर ब्रोकिंग में धातु, ऊर्जा तथा मुद्रा शोध की उपाध्यक्ष सुगंधा सचदेवा का कहना है कि स्थानीय मुद्रा को 74.50 के करीब एक महत्वपूर्ण समर्थन हासिल है और इसके टूटने पर रुपया और कमजोर होगा. अर्थव्यवस्था में गिरावट और कोरोना वायरस महामारी के चलते घरेलू मुद्रा के लिए व्यापक रुझान कमजोर बने रहेंगे. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशक भारतीय पूंजी बाजारों में शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं और बुधवार को उन्होंने बाजार से 5,085.35 करोड़ रुपये से अधिक निकाले.

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रुपये में गिरावट से क्या होगा- रुपये के लगातार कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल के बढ़ते दाम हैं. भारत कच्चे तेल के बड़े इंपोर्टर्स में एक है. भारत ज्यादा तेल इंपोर्ट करता है और इसका बिल भी उसे डॉलर में चुकाना पड़ता है. दूसरी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों में अक्सर जमकर बिकवाली करते हैं.

जब ऐसा होता है तो रुपये पर दबाव बनता है और यह डॉलर के मुकाबले टूट जाता है. भारतीय निर्यातकों को डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने से फायदा होता है. उनकी कमाई बढ़ जाती है. विदेश यात्रा पर जाने वालों को भी रुपया कमजोर होने का नुकसान उठाना पड़ता है. डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरने का मतलब दूसरे देश से आयात करना महंगा पड़ता है. बाहर से मंगाया जाने वाला सामान ज्यादा कीमत पर मंगावाना पड़ेगा तो नुकसान होगा.

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First published: March 19, 2020, 12:30 PM IST
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