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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले टूटा रुपया, अब तक के सबसे निचले स्तर 73.34/$ पर

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और बाजार से पूंजी निकासी जारी रहने से रुपया सोमवार को 26 पैसे लुढ़ककर करीब दो हफ्ते के निम्न स्तर 72.91 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

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    अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया फिर से लुढ़क गया है. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लगातार महंगा होता कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की ओर से शेयर बाजार, बॉन्ड मार्केट से पैसों की निकासी का असर रुपये पर है. बुधवार को पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर रिकॉर्ड 73 के नीचे आ गया. घरेलू मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 73.34 रुपये पर पहुंच गया. रुपया 73.26 पर खुला तथा आगे और गिरकर डॉलर के मुकाबले 73.34 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया.

    क्यों गिर रहा है रुपया-ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल का भाव 4 साल की ऊंचाई पर पहुंच गया है. ओपेक के उत्पादन नहीं बढ़ाने के फैसले से क्रूड में उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड 81 डॉलर प्रति बैरल को पार गया है. जिससे रुपए पर दबाव बढ़ा है.
    वहीं, चीन द्वारा अमेरिका से ट्रेड पर बातचीत रद्द किए जाने का भी असर हुआ है. इसके अलावा बुधवार को फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद भी से रुपया कमजोर हुआ है.(ये भी पढ़ें-LIC की नई पॉलिसी 'जीवन शांति' लॉन्च: हर साल पाएं 65 हजार रुपये पेंशन)

    आम आदमी पर क्या होगा असर
    > भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है.
    > रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा.
    > तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
    > डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है.
    > इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है.
    > रुपये के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

    14 फीसदी टूटा रुपया- इस साल रुपए में करीब 14 फीसदी तक कमजोरी आई है. क्रूड की कीमतें बढ़ने, ट्रेड वार, कैड बढ़ने की आशंका, डॉलर में मजबूती, घरेलू स्तर पर निर्यात घटने और राजनीतिक अस्थिरता जैसे फैक्टर्स की वजह से रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है.ये भी पढ़ें-नहीं चुरा पाएगा कोई भी आपका Aadhaar कार्ड, ये हैं सेफ करने का प्रोसेस

    अब क्या करेगा RBI-एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है और सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है. ऐसे में आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाकर इस पर लगाम लगा सकता है. इससे पहले सन 2013 में भी रुपये की गिरावट को रोकने के लिए उस समय के आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने यहीं कदम उठाया था.

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