रूस ने सऊदी अरब को दिया झटका, तेल उत्‍पादन में तीसरे नंबर पर धकेल दूसरे पायदान पर पहुंचा

रूस ने सऊदी अरब को दिया झटका, तेल उत्‍पादन में तीसरे नंबर पर धकेल दूसरे पायदान पर पहुंचा
रूस कच्‍चे तेल के उत्‍पादन के मामले में सऊदी अरब को तीसरे नंबर पर धकेल कर दूसरे पायदान पर पहुंच गया है.

तेल उत्‍पादन के मामले में अमेरिका लगातार पहले पायदान पर काबिज है. अब रूस इस मामले में सऊदी अरब को पछाड़कर दूसरे पायदान पर पहुंच गया है. जून 2020 में रूस का तेल उत्पादन हर दिन 87.88 लाख बैरल रहा, जबकि सऊदी अरब का 75 लाख बैरल रहा. वहीं, अमेरिका में तेल का उत्पादन 108.79 लाख बैरल प्रतिदिन रहा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 9:07 PM IST
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नई दिल्‍ली. अमेरिका (US) के बाद अब रूस (Russia) ने भी तेल उत्‍पादन (Oil Production) के मामले में सऊदी अरब (UAE) को तगड़ा झटका दिया है. कोरोना संकट के बीच मार्च 2020 में रूस और सऊदी अरब के बीच कच्‍चे तेल की कीमतों को लेकर खींचतान (Price War) शुरू हुई थी. एक तरफ सऊदी अरब चाहता था कि रूस तेल उत्पादन घटाए, जिससे इंटरनेशनल मार्केट में तेल की गिरती कीमतों (Oil Price) को थामा जा सके. वहीं, रूस उत्पादन घटाने को तैयार नहीं था. इससे गुस्‍साए सऊदी अरब ने उत्पादन बढ़ाने और कीमतों में छूट देने का फैसला लिया था. सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको (Aramco) ने कहा कि हर दिन 1.20 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन किया जाएगा.

ओपेक सदस्‍य नहीं है रूस, उत्‍पादन घटाने से कर दिया इनकार
ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) में सऊदी अरब का दबदबा है. मार्च में सऊदी अरब ने कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के कारण तेल की मांग में आई भारी कमी के मद्देनजर ओपेक के जरिये तेल उत्पादन में कटौती का प्रस्ताव रखा. रूस ओपेक का सदस्य नहीं है. उसने उत्‍पादन घटाने के प्रस्ताव से इनकार कर दिया था. इसके बाद दोनों देशों में तेल की कीमतों को लेकर जंग छिड़ गई. बता दें कि अमेरिका 2018 में ही सऊदी अरब को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बन गया था.

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तेल बाजार से प्रभावित होती है सऊदी अरब की अर्थव्‍यवस्‍था


वैश्विक महामारी के दौरान लॉकडाउन से कारोबारी गतिविधियां ठप होने पर कच्‍चे तेल मांग (Crude Oil Demand) में भारी कमी दर्ज की गई. इस गिरावट को देखते हुए सऊदी अरब और रूस को ओपेक व ओपेक प्लस में तेल उत्पादन में कटौती पर सहमति बनानी पड़ी. अमेरिका को भी उत्पादन में हर दिन 20 लाख बैरल की कटौती करनी पड़ी. हालांकि, अमरीका और रूस पर तेल उत्पादन या निर्यात कम होने से ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ता है. वहीं, सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर (Oil Based Economy) होने से तेल का बाजार प्रभावित होते ही उसकी हालत खराब होने लगती है.

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सऊदी अरब के तेल निर्यात में भी आ रही है लगातार कमी
ज्‍वाइंट ऑर्गेनाइजेशन डेटा इनिशिएटिव (JODI) के मुताबिक, रूस ने जून महीने में तेल उत्पादन के मामले में सऊदी अरब को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है. इस दौरान रूस का तेल उत्पादन हर दिन 87.88 लाख बैरल रहा, जबकि सऊदी अरब का 75 लाख बैरल रहा. जून में भी अमेरिका तेल उत्पादन के मामले में शीर्ष पर रहा. इस दौरान अमेरिका में तेल उत्पादन 108.79 बैरल प्रतिदिन हुआ. सऊदी अरब के तेल निर्यात में भी लगातार कमी आ रही है. जून 2020 में सऊदी का तेल निर्यात हर दिन 50 लाख बैरल से भी नीचे चला गया. जून में सऊदी का तेल निर्यात हर दिन 49.8 लाख बैरल रहा. मई के मुकाबले जून में उसके तेल निर्यात में 17.3 फीसदी गिरावट दर्ज की गई.

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अमेरिका के पास है दुनिया का सबसे बड़ा तेल का भंडार
रिस्ताद एनर्जी की ओर से 2016 में जारी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिका के पास 264 अरब बैरल तेल भंडार है. इसमें मौजूदा तेल भंडार, नए प्रोजेक्ट, हाल में खोजे गए तेल भंडार और तेल के खोजे जाने वाले कुंए भी शामिल हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि रूस और सऊदी अरब से ज्‍यादा तेल भंडार अमेरिका के पास है. रिस्ताद एनर्जी के अनुमान के मुताबिक, रूस में तेल 256 अरब बैरल, सऊदी में 212 अरब बैरल, कनाडा में 167 अरब बैरल, ईरान में 143 और ब्राजील में 120 अरब बैरल तेल भंडार है.
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