‘रूसी कंपनियां चाहती हैं कि भारत सिर्फ रूसी पार्ट्स खरीदें’

भारत को रूसी कंपनियों को यह भरोसा देना चाहिए कि वह उनके भारत में बने कलपुर्जों की खरीदारी करेगा और किसी तीसरे देश से सस्ते कलपुर्जे नहीं खरीदेगा.

भाषा
Updated: December 7, 2017, 5:48 PM IST
‘रूसी कंपनियां चाहती हैं कि भारत सिर्फ रूसी पार्ट्स खरीदें’
‘रूसी कंपनियां चाहती हैं की भारत सिर्फ रूसी पार्ट्स खरीदें’
भाषा
Updated: December 7, 2017, 5:48 PM IST
भारत को रूसी कंपनियों को यह भरोसा देना चाहिए कि वह उनके भारत में बने कलपुर्जों की खरीदारी करेगा और किसी तीसरे देश से सस्ते कलपुर्जे नहीं खरीदेगा. रूस के एक शीर्ष अधिकारी ने आज यह बात कही.

अधिकारी ने कहा कि भारत को यह भरोसा दिलाना होगा कि वह रूस से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद में देरी की सैन्य बलों की शिकायतों को दूर करने के लिए तीसरे देश से खरीद नहीं करेगा.

रूस के रक्षा और उद्योग क्षेत्र के सरकारी समूह रोसटेक के निदेशक (अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं क्षेत्रीय नीति) विक्टर एन क्लादोव ने कहा कि रूस ने भारत में तकनीकी सेवा केंद्र बनाने की रणनीति बनाई है, जो विशेष उपकरणों पर केंद्रित है.

उन्होंने कहा कि भारत ने सोवियत संघ और रूस में बने रक्षा उपकरणों की बड़ी संख्या में खरीद की है. इनमें से ज्यादातर उपकरणों के आधुनिकीकरण, उन्नयन और मरम्मत की जरूरत है, जो भारत में किया जा सकता है.

क्लादोव ने कहा, ‘‘इस समस्या का हल अपने भागीदारों के साथ सुविधाएं स्थापित कर किया जा सकता है. हमें भारतीय पक्ष से यह भी आश्वासन चाहिए कि उनके उत्पादों का इस्तेमाल अंतिम उपभोक्ता द्वारा किया जाएगा.’’

भारतीय सैन्य बलों की लंबे समय से शिकायत रही है कि रूस से महत्वपूर्ण कलपुर्जों और उपकरणों की आपूर्ति में लंबा समय लगता है, जिससे रखरखाव प्रभावित होता है. इसे एक जटिल मुद्दा बताते हुए क्लादोव ने कहा कि रोसटेक, भारतीय रक्षा मंत्रालय के साथ इस समस्या के हल के लिए सहयोग कर रही है.
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