कोरोना काल से पहले भी लोगों की सैलरी घटी, आखिर क्यों आई ये गिरावट?

50 लाख रुपये तक की कमाई करने वालों लोगों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है.

50 लाख रुपये तक की कमाई करने वालों लोगों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है.

वित्त वर्ष 2020 में टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की कुल संख्या पिछले साल 6.5 फीसदी तक कम हुआ है. ITR-1 फाइल करने वालों लोगों की संख्या में भी 6.6 फीसदी की गिरावट आई है. जानकार इसके पीछे कई वजह बताते रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 4, 2021, 12:38 PM IST
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नई​ दिल्ली. देश की ​अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक बात सामने आई है. वित्त वर्ष 2020 में 50 लाख रुपये तक कमाई करने वाले लोगों की संख्या घटी है. इसमें से अधिकतर सैलरीड क्लास के लोग शामिल हैं. इस लिमिट तक कमाई करने वाले लोगों की संख्या में यह कमी कोरोना वायरस महामारी के पहले से ​ही देखने को मिल रही है. इस साल के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल के आंकड़ों से यह जानकारी मिलती है.

इस आंकड़े में वित्त वर्ष 2020 के लिए ITR-1 फाइल करने वाले लोगों को देखा गया. सैलरी से होने वाली कमाई, एक प्रॉपर्टी और खेती से 5,000 रुपये तक की कमाई करने वाले लोग ITR-1 भरते हैं. 10 जनवरी 2021 तक उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि ITR-1 फाइल करने वाले लोगों की संख्या पिछले साल की तुलना में करीब 6.6 फीसदी तक कम हुई है.

टैक्स फाइल करने वालों की कुल संख्या भी घटी
जनवरी तक हर कैटेगरी के तहत टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या भी 6.5 फीसदी तक कम हुई है. इसमें वित्त वर्ष 2020 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं. हालांकि, कंपनियों के टैक्स रिटर्न का डेटा अभी पूरी तरह से सामने नहीं आ सका है. कंपनियों के पास 15 फरवरी तक टैक्स आॅडिट और रिटर्न फाइल करने का समय 15 फरवरी तक था. इसलिए इसमें अंतिम समय में टैक्स फाइल करने वाली कंपनियों के आंकड़े नहीं शामिल हैं.
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हर साल क्यों कम-अधिक होती है टैक्सपेयर्स की संख्या
हर साल टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले क्लास में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं. हर साल कुछ नये लोग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की श्रेणी में जुड़ते हैं. वहीं, कुछ लोग इस श्रेणी से बाहर भी आते हैं. इसमें वे लोग होते हैं, जिनकी या तो मृत्यु हो चुकी होती है या उनकी इनकम इतनी घट जाती है कि वे टैक्स स्लैब के दायरे में नहीं आते हैं. किसी भी वित्तीय वर्ष के दौरान टैक्स फाइल करने वालों की संख्या में बड़ी कमी होने से टैक्स बेस भी कम हो जाता है.

चिंता की बात है कि टैक्स बेस में यह कमी एक ऐसे समय में हुई, जब देश की अर्थव्यवस्था 4 फीसदी की दर से बढ़ी है. इस साल अर्थव्यवस्था में 7.7 फीसदी की गिरावट का अनुमान है.

किन वजहों से टैक्स फाइलिंग की समस्या घटी
जानकारों का कहना है कि ITR-1 समेत अन्य तरह टैक्स फाइलिंग की संख्या में कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं. टैक्स फाइल करने की अंतिम तारीख से लेकर इसे आगे बढ़ाए जानें की वजह से भी यह टैक्स फाइलिंग बेस घट सकता है.

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यह भी संभव है कि बिज़नेस क्लोजर में देरी की वजह से कर्मचारियों को फॉर्म 16 समय पर उपलब्ध न हो सका हो. छोटे शहरों में फाइनेंशियल कंसल्टेंट्स की कमी भी इसकी एक वजह हो सकती है. कोविड-19 की वजह से इनकम में कमी का वास्तविक असर तो एसेसमेंट ईयर 2021-22 के रिटर्न फाइलिंग में देखने को मिलेगा.
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