Home /News /business /

salary final settlement leave encashment rules to change under new labour law see how rrmb

New Labour Code: वेतन, छुट्टियों और पीएफ पर क्‍या होगा नए कानूनों का असर? डिटेल में जानिए हर सवाल का जवाब

सरकार ने अभी नए लेबर कोड लागू करने की तारीख की घोषणा नहीं की है.

सरकार ने अभी नए लेबर कोड लागू करने की तारीख की घोषणा नहीं की है.

नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) की सबसे खास बात यह है कि इसमें वेतन को नए सिरे से परिभाषित किया गया है. इससे एक कर्मचारी की टेक होम सैलरी, यानि जो पैसा उसके बैंक अकाउंट में हर महीने आता है, वह और प्रोविडेंट फंड में जाने वाले पैसे पर बहुत असर होगा.

अधिक पढ़ें ...

नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार सरकार चार नए लेबर कोड को लागू करने की तैयारी में जुटी है. फिलहाल देश के 23 राज्‍यों ने लेबर कोड के नए प्रावधानों को स्‍वीकार कर लिया है. अगर ये चार लेबर कोड देश में लागू होते हैं तो इससे कर्मचारियों के वेतन, काम के घटों, वार्षिक छुट्टियों और फाइनल सेटलमेंट में काफी बदलाव हो जाएंगे. सरकार का मानना है कि नए लेबर कानूनों को अपनाने से जहां देश में निवेश बढ़ेगा वहीं रोजगार राजगार सृजन भी ज्‍यादा होगा.

सरकार का कहना हे कि नए लेबर कानून लागू करने का उद्देश्य कामगारों की सामाजिक सुरक्षा जिसमें पेंशन और ग्रेच्यूटी, श्रमिक कल्याण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और काम के हालातों में सुधार करना है. सरकार ने हालांकि अभी नए लेबर कोड लागू करने की तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि जुलाई 2022 में इन्‍हें लागू किय जा सकता है. आइये जानते हैं कि नए 4 लेबर कोड लागू होने पर सैलरी, छुट्टियों, ग्रेच्‍युटी और प्रोविडेंट फंड पर क्‍या असर होगा.

ये भी पढ़ें- सरकार ने बढ़ाई GST कम्पन्सेशन सेस की अवधि, समझें इस फैसले का क्‍या होगा असर

हाथ में कम आएगी सैलरी
News18.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए लेबर कोड्स की सबसे खास बात यह है कि इसमें वेतन को नए सिरे से परिभाषित किया गया है. इससे एक कर्मचारी की टेक होम सैलरी, यानि जो पैसा उसके बैंक अकाउंट में हर महीने आता है, वह और प्रोविडेंट फंड में जाने वाले पैसे पर बहुत असर होगा. इंड्सलॉ के वैभव भारद्वाज क कहना है कि नए कोड्स न केवल टेक होम सैलरी बल्कि बोनस और ग्रेच्‍यूटी को भी प्रभावित करेगा.

नए लेबर कानूनों में कामगारों की बेसिक सैलरी ग्रॉस सैलरी के कम से कम 50 प्रतिशत रखने का प्रावधान किया जा सकता है. इससे प्रोविडेंट फंड में नियोक्ता और कर्मचारी के योगदान में इजाफा हो जाएगा. लेकिन इससे टेक होम सैलरी घट जाएगी. यानि हर महीने कर्मचारियों के हाथ में कम पैसा आएगा. नए कानूनों के तहत रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली एकमुश्त राशि और ग्रेच्यूटी में भी इजाफा होगा.

छुट्टियों को हर साल भुना पाएंगे
नए लेबर कानूनों में कर्मचारियों की छुट्टियों को भी तर्कसंगत बनाया गया है. नए कानूनों के तहत कर्मचारी अपनी बची हुई छुट्टियों को हर साल भुना सकते हैं. इसका मतलब यह है कि इन छुट्टियों के बदले बन रहे पैसे ले सकते हैं. अभी कंपनी छोड़ने पर ही कर्मचारी लीव इनकैशमेंट करा सकते हैं.

भारद्वाज का कहना है कि कर्मचारी की दृष्टि से एक महत्‍वपूर्ण बदलाव है. अब वे अपनी छुट्टियों को कैलेंडर वर्ष के आखिर में भुना पाएंगे. अब हो यह रहा है कि कैरी फारवर्ड की सीमा पार होते ही कर्मचारियों की छुट्टियां लैप्‍स हो जाती हैं. इससे उन्‍हें नुकसान होता है.

CBDT का नया नियम! आय कम होने पर भी कुछ लोगों को भरनी होगी ITR, कहीं आप भी तो नहीं इनमें शामिल?

दो दिन में फाइनल सेटलमेंट
नए लेबर कोड में प्रावधान किया गया है कि अगर कोई कर्मचारी कंपनी से अलग हो जाता है तो उसे दो दिन दिन में कंपनी को उसकी बकाया सैलरी देनी होगी. अभी कंपनियां इस काम में एक से दो महीने तक लगा देती हैं. हालांकि, इस प्रावधान पर राज्‍यों को किसी कर्मचारी के इस्‍तीफा देने पर उसे दो कार्यदिवसों में बकाया सैलरी देने की बाध्‍यता पर आपत्ति जता रहे हैं.

Tags: Employee Salary Rules, Labour Law, Labour reforms

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर