जुलाई 2021 से बदल जाएगा आपका सैलरी स्ट्रक्चर, नए लेबर काेड पर राज्य सरकारें लेंगी फैसला

राज्याें को 2 महीने में नियम तय करने हैं

राज्याें को 2 महीने में नियम तय करने हैं

श्रम मंत्रालय की ओर से नए लेबर कानूनाें (New Labour Laws) काे लागू करने के लिए जुलाई 2021 तक की डेडलाइन तय की गई है. साथ ही उम्‍मीद की जा रही है कि एक बार में चाराे कानूनाें को अधिसूचित किया जा सकता है.

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नई दिल्ली. अगर आप नाैकरी करते हैं ताे यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. दरअसल, इस साल जुलाई से आपका सैलरी (Salary) स्ट्रक्चर बदल सकता है. नए लेबर काेड्स (New Labour Codes) से जुड़े नियम काे लेकर श्रम मंत्रालय ने राज्याें काे दाे महीने में फाइनल करने काे कहा है. सूत्राें की मानें ताे नए लेबर कानूनाें काे लागू करने के लिए श्रम मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) की ओर से जुलाई तक की डेडलाइन तय की गई है. साथ ही उम्‍मीद है कि एक बार में चाराें कानूनाें को अधिसूचित किया जाएगा. जानकारों की मानें तो नए लेबर कोड में वेतन की नई परिभाषा प्रस्तावित की गई है. इसके चलते कंपनियों को ग्रैच्‍‍‍‍‍‍युटी, छुट्टी के बदले पैसा और पीएफ के लिए ज्यादा रकम का प्रावधान करने की जरूरत होगी. नए प्रावधानों के तहत इसके वित्तीय असर के आकलन के बाद ही कंपनियां दूसरी छमाही में वेतन बजट की समीक्षा करेंगी.
 
जुलाई से नई सैलरी
श्रम मंत्रालय ने इंडस्ट्री वाले राज्यों के लिए नए लेबर कानून के लिए नियम तय करने को जून तक का समय दिया है. मालूम हाे कि पहले अप्रैल से ही नए  कानून लागू होने थे, लेकिन इंडस्ट्रीज वालेे राज्यों को जून की डेडलाइन दी गई है. केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) की नई वेतन संहिता (New Wage Code) के मुताबिक, मई 2021 से मिलने वाली आपकी पूरी सैलरी में कंपनियों को सीटीसी या कुल सैलरी में बेसिक वेतन का हिस्सा कम से कम 50 प्रतिशत करना अनिवार्य होगा.


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टेक हाेम सैलरी हाेगी कम
अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष में अधिकांश कंपनियां अपने कर्मचारियों को इंक्रिमेंट (Increment) देकर सैलरी हाइक करती हैं. नए लेबर कोड में आपकी कॉस्ट टू कंपनी (CTC) नए सिरे से तय होनी है. इसका असर यह होगा कि आपका पीएफ अंशदान (PF Contribution) बढ़ जाएगा. मतलब, कंपनियां आपको इंक्रीमेंट देंगी तो वह पीएफ अंशदान में एडजस्ट हो सकता है यानि सैलरी हाइक के बाद भी कैश इन हैंड (Cash In Hand) या टेक होम सैलरी में बढ़ोतरी के बजाय कमी होगी.




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नए कानून से आप ऐसे होंगे प्रभावित
टेक होम सैलरी घटने के कई कारण हैं. पहला, इस कोड के मुताबिक कंपनियों को सीटीसी या कुल सैलरी में बेसिक वेतन का हिस्सा कम से कम 50 प्रतिशत करना होगा. ऐसा करने पर आपकी टेक होम सैलरी तो कम हो जाएगी. हालांकि, ग्रैच्युटी की रकम और कर्मचारी व कंपनी दोनों का पीएफ अंशदान का प्रतिशत बढ़ जाएगा. ऐसे में कहा जा रहा है कि हाई और मिड सैलरी ग्रुप पर तो ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जिन लोगों की सैलरी कम है, उनकी टेक होम सैलरी पर 25 से 30 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है.
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