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मां का दूध बेचने पर विवादों में घिरी बेंगलुरु की कंपनी नियोलैक्टा, FSSAI ने कहा- बिक्री की अनुमति नहीं

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार- Shutterstock)

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार- Shutterstock)

नियोलैक्टा (Neolacta) को नवंबर 2021 में अपने प्रोडक्ट 'नारीक्षीरा' (मां का दूध) के लिए आयुष लाइसेंस मिला. यह एशिया की पहली कंपनी है जो प्रॉफिट के लिए मां का दूध बेचती है.

नई दिल्ली. बेंगलुरु की कंपनी नियोलैक्टा लाइफसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड (Neolacta Lifesciences Pvt Ltd.) मां का दूध (Breast Milk) बेचती है. यह एशिया की पहली कंपनी है जो प्रॉफिट के लिए मां का दूध बेचती है. अब यह विवादों में आ गई है. कई एक्टिविस्ट्स की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद फूड रेगुलेटर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई (FSSAI) ने यह कहते हुए कंपनी का लाइसेंस कैंसिल कर दिया है कि नियमों के तहत मां के दूध की बिक्री की अनुमति नहीं है.

FSSAI के कर्नाटक ऑफिस से लिया था लाइसेंस
हालांकि, एक एफएसएसएआई इंस्पेक्शन से पता चला कि कंपनी को नवंबर 2021 में अपने प्रोडक्ट ‘नारीक्षीरा’ (मां का दूध) के लिए आयुष लाइसेंस मिला. टीओआई की एक खबर के मुताबिक, नियोलैक्टा लाइफसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना साल 2016 में हुई थी. कंपनी ने डेयरी प्रोडक्ट की कैटेगरी में एफएसएसएआई के कर्नाटक ऑफिस से लाइसेंस लिया था.

ब्रेस्टफीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया (BPNI) की नूपुर बिड़ला कहती हैं, “यह पूरी तरह से चौंकाने वाला है कि एक कंपनी को माताओं से दूध कलेक्ट करने और उसे एक डेयरी प्रोडक्ट की तरह बेचने की अनुमति दी जा रही है.”

कंपनी के एमडी ने कही ये बात
नियोलैक्टा के एमडी सौरभ अग्रवाल ने बताया कि कंपनी को ऑस्ट्रेलिया में पहला मिल्क बैंक स्थापित करने के लिए ह्यूमन मिल्क की सप्लाई करने वाली टेक्नोलॉजी का अनुभव है. उन्होंने कहा कि नियोलैक्टा ने पिछले पांच सालों में 450 अस्पतालों में 51 हजार से ज्यादा प्री-मैच्योर बच्चों को फायदा पहुंचाया है.”

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बता दें कि दान किए गए मां के दूध का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्री-मैच्योर या बीमार बच्चों को पिलाने के लिए किया जाता है. आमतौर पर, दूध नॉन-प्रॉफिट के रूप में स्थापित मिल्क बैंकों के जरिए प्राप्त किया जाता है. डोनर्स से एकत्र किए गए दूध को पास्चुराइज्ड किया जाता है, पोषक तत्व की मात्रा की जांच की जाती है और फ्रोजन कर सुरक्षित रखा जाता है. सरकारी अस्पतालों से जुड़े मिल्क बैंक्स में प्राप्त हुए दूध को फ्री में जरूरतमंदों को दिया जाता है.

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Neolacta की कीमत
300 एमएल फ्रोजन ब्रेस्ट मिल्क के लिए नियोलैक्टा 4,500 रुपये चार्ज करती है. एक प्री-टर्म बच्चे को रोजाना लगभग 30 एमएल दूध जबकि एक सामान्य बच्चे को रोजाना 150 एमएल तक की जरूरत हो सकती है. नियोलैक्टा ह्यूमन मिल्क का पाउडर भी बेचती है, जो ई-कॉमर्स वेबसाइटों के अलावा कंपनी के प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है.

Tags: FSSAI, Milk

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