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    धनतेरस पर भी इसलिए कम हो रही है बर्तन और क्रॉकरी की बिक्री, जानें वजह

    घर-परिवार में तो धनतेरस वाले दिन सिर्फ रस्म अदायगी के तौर पर एक-दो बर्तन खरीदे जाते हैं, लेकिन फैक्ट्री और कारखानों में गाड़ियां भरकर बर्तन जाते हैं.
    घर-परिवार में तो धनतेरस वाले दिन सिर्फ रस्म अदायगी के तौर पर एक-दो बर्तन खरीदे जाते हैं, लेकिन फैक्ट्री और कारखानों में गाड़ियां भरकर बर्तन जाते हैं.

    होलसेलर्स की मानें तो इस साल बर्तन बाजार फीका पड़ा हुआ है. उनका कहना है कि खुदरा व्यापारी 20 से 25 फीसदी माल ही लेकर गये हैं. आमतौर पर 99 फीसदी माल फैक्ट्री और कारखाना मालिक ही ले जाते हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 13, 2020, 8:30 PM IST
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    नई दिल्ली. धनतेरस और दिवाली (Diwali) पर सोने-चांदी (Gold-Silver) के साथ अगर जमकर किसी चीज़ की बिक्री होती है तो वो हैं बर्तन और क्रॉकरी. सुबह से शुरू होकर यह बिक्री देर रात तक चलती है. इस दौरान बाज़ारों (Market) में पैर रखने तक की जगह नहीं होती है. लेकिन इस बार धनतेरस पर वो ही बर्तन (Utensils) बाज़ार फीका पड़ा हुआ है. बाज़ार में पैर रखने की जगह की बात तो छोड़िए आप बाइक से घूमकर आ सकते हैं. बर्तन और क्रॉकरी (Crockery) की होलसेल कारोबारियों की मानें तो रिटेलर 20 से 25 फीसदी माल ही लेकर गए हैं.

    फैक्ट्री और कारखाना मालिक करते हैं जमकर खरीदारी
    बर्तनों और क्रॉकरी के होलसेलर अतुल अग्रवाल की मानें तो 99 फीसदी फैक्ट्री और कारखाना मालिक धनतेरस वाले दिन ही पूजा पाठ करने के बाद अपनी लेबर और स्टाफ को दिवाली का इनाम देते हैं. इसमे बड़ी संख्या बर्तन और क्रॉकरी की होती है. घर-परिवार में तो धनतेरस वाले दिन सिर्फ रस्म अदायगी के तौर पर एक-दो बर्तन खरीदे जाते हैं, लेकिन फैक्ट्री और कारखानों में गाड़ियां भरकर बर्तन जाते हैं. लेकिन कोरोना-लॉकडाउन के चलते अभी भी छोटी-बड़ी ज़्यादातर फैक्ट्री और कारखाने बंद हैं. लेबर काम करने आ नहीं रही है. जिसके चलते दिवाली की भी कोई फैक्ट्रियों में नहीं हुई है.

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    कंबल भी नहीं बिक रहे इस साल
    बहुत सारी फैक्ट्रियों और कारखानों में दिवाली की गिफ्ट के रूप में लेबर को कंबल और बड़े-बड़े जेन्टस शॉल (लोई) भी दी जाती हैं. दिल्ली के गांधी नगर में जब इस बारे में कई बड़े होलसेलर से बात की गई तो उनका कहना था कि इस बार तो ऐसा लग रहा है कि ठंड का मौसम ही नहीं आएगा. दिवाली पर गिफ्ट करने वालों की तो छोड़िए सर्दी के मौसम में जो लोई बिकती थी उसका भी ग्राहक अभी बाज़ार में निकला है. इसके साथ ही 500 से 1000 रुपये की कीमत वाले कंबल दिवाली पर लेबर को गिफ्ट में बहुत दिए जाते थे. लेकिन हकीकत तो यह है कि इस साल न तो धनतेरस जैसा कुछ लग रहा है और न ही दिवाली जैसा-
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