होम /न्यूज /व्यवसाय /

संजीव गोविला: रिटायर्ड कर्नल, जो फौजियों के लिए करते हैं फाइनेंशियल प्लानिंग, फर्म करती है 780 करोड़ का एसेट मैनेजमेंट

संजीव गोविला: रिटायर्ड कर्नल, जो फौजियों के लिए करते हैं फाइनेंशियल प्लानिंग, फर्म करती है 780 करोड़ का एसेट मैनेजमेंट

संजीव गोविला की एक फर्म है, जो 750 करोड़ से अधिक के एसेट मैनेज करती है.

संजीव गोविला की एक फर्म है, जो 750 करोड़ से अधिक के एसेट मैनेज करती है.

संजीव गोविला आर्मी में कर्नल थे. 2010 में उन्होंने रिटायरमेंट ले ली. इसके बाद उन्होंने फौजियों के लिए फाइनेंशियल सर्विसेज की शुरुआत की. आज उनकी अपनी एक फर्म है, जो 750 करोड़ से अधिक के एसेट मैनेज करती है.

हाइलाइट्स

आर्मी में सेवाओं के दौरान कई साथी उनसे वित्तीय सलाह लेने के लिए आते थे.
उन्होंने महसूस किया कि फौजियों को फाइनेंशियल प्लानिंग करने में बहुत दिक्कत होती है.
इसी दिक्कत को दूर करने के लिए उन्होंने काम शुरू किया. बाद में अपनी एक फर्म भी बनाई.

नई दिल्ली. तीन दशकों तक सेना में सर्विस के बाद 2010 में कर्नल संजीव गोविला ने वॉलंटियरी रिटायरमेंट ले ली. वे उस समय 47 साल के थे. लेकिन रिटायरमेंट का मतलब सर्विस का अंत नहीं था, बल्कि एक नई तरह की सेवा की शुरुआत थी. रिटायर्ड कर्नल संजीव गोविला की कहानी काफी दिलचस्प है.

जैसा कि आप जानते ही होंगे आर्मी में सेवाएं देने वालों के लिए ड्यूटी और देश सबसे पहले होता है. उसके बाद परिवार और बाकी तमाम चीजें आती हैं. यही वजह है कि वे देश के बारे में अधिक और अपने व अपने परिवार के बारे में कम सोचते हैं. वे अपने परिवार को समय भी कम दे पाते हैं. और अगर बात की जाए फाइनेंशियल प्लानिंग की तो उसके लिए तो बिलकुल टाइम नहीं होता.

बहुत साथी लेते थे फाइनेंशियल एडवाइज
इसी बात से रिटायर्ड कर्नल संजीव गोविला की कहानी भी शुरू होती है. आर्मी में रहते हुए उन्होंने इस चीज के बारे में महसूस किया. गोविला अब 59 वर्ष के हो चुके हैं. उन्हें हमेशा से ही फाइनेंस में रूचि रही है. उन्हें आज भी याद है कि उनके कितने ही साथी उनके पास फाइनेंशियल एडवाइज लेने आते थे. धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि वे अकेले नहीं हैं. बहुत लोगों को फाइनेंशियल नॉलेज की इसकी जरूरत है. इसी के ध्यान में रखते हुए गोविला ने फाइनेंस को लेकर अपनी जानकारी बढ़ाई.

ये भी पढ़ें – भारत में 80 फीसदी लोग अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर आश्वस्त नहीं: सर्वे

किया सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर का कोर्स
रिटायरमेंट से 2 साल पहले, गोविला ने फैसला किया कि वह एक वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) बनना चाहते हैं, लेकिन सिर्फ रूप से सशस्त्र बलों (Amed Forces) के कर्मियों के लिए. जब वह नई दिल्ली में तैनात थे, तब उन्होंने वीकेंड की क्लासेज लगाईं. उन्होंने अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर कोर्स को पास किया.

इसके अलावा गोविला को खुद के द्वारा महसूस की गई चीजों ने भी मोटिवेट किया. आर्मी के लोगों के लिए अपने पैसे को मैनेज करना काफी मुश्किल भरा काम होता है. बार-बार ट्रांसफर और ड्यूटी के लिए अचानक बुलावा आ जाने के चलते वे निवेश के बारे में सोच ही नहीं पाते. जानकारियों का अभाव भी आड़े आता है.

ये भी पढ़ें – वित्‍तीय सुरक्षा के चार कदम, आज उठा लिए तो सुरक्षित होगा आपका कल

तब इंटरनेट नहीं था. हर कदम पर फिजिकल डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत होती थी. यदि किसी की नियुक्ति दूर-दराज के एरिया में हो जाती है तो उसके साइन लेने के लिए उसे खोज पाना तक मुश्किल हो जाता था. अब इंटरनेट मौजूद है. हर किसी के पास मोबाइल फोन और ईमेल का एक्सेस है. सियाचिन ग्लेशियर बेस कैंप में बैठे सिपाही भी आज अपने वित्तीय मामलों से जुड़े फैसले ले पाने में सक्षम हैं.

यूं शुरू की खुद की फर्म
रिटायर्ड कर्नल संजीव गोविला बेशक वित्तीय मामलों के जानकार थे, लेकिन उन्होंने भी निवेश को लेकर गलतियां कीं. उन्हें लगता है कि बाकी के जवानों की कहानी भी उन्हीं की तरह ही होगी. इसलिए 2010 में रिटायरमेंट के बाद गोविला ने आर्म्ड फोर्सेज के लोगों के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग का काम शुरू किया. लेकिन यह काफी नहीं था. उन्हें अपने क्लाइंट्स से फीडबैक मिलता था कि उन्हें सही में निवेश कहां करना चाहिए.

इसके बाद उन्होंने म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर का लाइसेंस लिया और एक फर्म शुरू की. इस फर्म का नाम रखा “हम फौजी फाइनेंशियल सर्विसेज़”. बाद में उन्होंने खुद को सेबी (Securities and Exchange Board of India) के साथ एक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के तौर पर रजिस्टर करवाया. इस फर्म में अभी 45 कर्मचारी हैं और वे पूरे भारत और दुनिया में 3,300 क्लाइंट्स हैं. फर्म फिलहाल 870 करोड़ रुपयों का मैंनेजमेंट कर रही है.

ये भी पढ़ें – आपके निवेश में अच्‍छे एसेट मैनेजमेंट की क्‍या भूमिका, कैसे करें एक बेहतर एसेट मैनेजर का चुनाव?

गोविला के ग्राहक केवल सशस्त्र बलों से हैं – सेना, नौसेना और वायु सेना, उनके माता-पिता और बच्चे. अपवाद के तौर पर सशस्त्र बलों और आम पृष्ठभूमि से विधवाएं हैं. मतलब ये कि विधवा महिलाएं चाहे किसी भी बैकग्राउंड की हों, उनके लिए काम करते हैं.

यह फर्म गोविला ने अपनी पत्नी बिंदु गोलिवा के साथ शुरू की थी. गोविला ने मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में बाताय कि असल में फाइनेंशियल जर्नी क्या है, उन्होंने क्या सीखा और वे किस तरह से फाइनेंशियल जागरुकता फैला रहे हैं.

सशस्त्र बलों के लिए फाइनेंशियल फ्रीडम क्या है?
गोविला ने बताया कि जब आपको जितना पैसा चाहिए हो, तब उतना मिल जाए. उन्होंने कहा- मेरा पक्का विश्वास है कि फाइनेंशियल फ्रीडम फाइनेंस से ही आ सकती है, न कि फिजिकल एसेट्स से. जब आपको कैश की जरूरत होती है तब आप अपने फाइनेंशियल एसेट्स को लिक्विडेट कर सकते हैं.

यदि सेना के जवान फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होना चाहते हैं तो आपको अपने लक्ष्य निर्धारित करके प्लानिंग करनी चाहिए. लेकिन यह दुखद है कि इस बारे में लोगों में अवेयरनेस काफी कम है. यदि वे अपने लक्ष्य निर्धारित करके चलें और अपनी तनख्वाह के हिसाब से सेविंग करना शुरू करें एक समय के बाद उनके पास वह होगा, जो उन्हें चाहिए.

जब आप आर्मी में थे तो आपको क्या समस्या होती थी?
ट्रांसफर काफी होते थे. मैं ऐसी जगह पर भी नियुक्त रहा हूं, जहां पूरे सप्ताह के न्यूजपेपर एक साथ पहुंचते थे. तब इंटरनेट नहीं था, तो फाइनेंशियल न्यूज़ और एडवाइस पाना आसान नहीं था. निवेश को लेकर सभी तरह के फैसले पुरानी जानकारियों के आधार पर लिए जाते थे.

आर्मी में लोग अपने सीनियर्स के साथ फाइनेंस के बारे में आमतौर पर बात नहीं करते. इस तरह कोई उन्हें जरूरी फाइनेंशियल फैसलों के लिए गाइड करने वाले नहीं होता. हर फैसला बस यूं ही, बिना पूरी जानकारी और एनालिसिस के ले लिया जाता है.

ये भी पढ़ें – सही तरीके से करेंगे निवेश तो NPS से 50 हजार रुपये मासिक पेंशन पाना हो जाएगा काफी आसान

आपने क्या-क्या गलतियां कीं?
मेरी पहली गलती: मैंने इंश्योरेंस को निवेश के साथ जोड़ लिया. एक इंश्योरेंस एजेंट ने मुझे इंश्योरेंस पॉलिसी बेच दी, यह कहते हुए कि आपको सालाना 12 फीसदी का रिटर्न मिल जाएगा. लेकिन 20 साल के बाद जब मैंने कैलकुलेट किया तो पाया कि रिटर्न केवल 3 फीसदी ही था. मुझे झटका लगा. मैंने इससे सीखा कि यदि आप फाइनेंशियली जागरुक नहीं हैं तो आपका पैसा मिट्टी में चला जाएगा.
दूसरी गलती: मैं अपने पेरेंट्स के निवेश का पैटर्न फॉलो करने लगा था. मैंने यह भी नहीं देखा कि क्या वह तरीका मेरे लिए सही रहेगा. मेरे पिता जी, सीधे इक्विटी शेयर्स खरीदते थे. इसलिए मैंने भी यही काम किया. बिना जानकारी के मैंने कुछ गलत शेयर खरीदे, कुछ IPOs में पैसा लगाया, जोकि कुछ ही वर्षों में खाक हो गया.
तीसरी गलती: मैं बिना लक्ष्यों के निवेश कर रह था. उस समय, मैं केवल इतना जानता था कि मुझे पैसे को बढ़ाना है. लेकिन मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि मैं सेविंग क्यों कर रहा हूं. इसलिए, जब भी मुझे पैसे की जरूरत होती थी, मैं अपने प्रोविडेंडट फंड से निकलता था या इक्विटी बेचता था. इसके पीछे कोई सोच नहीं थी. बाद में मुझे लगा कि बिना फाइनेंशियल लक्ष्यों के अपनी वैल्थ को बढ़ाया नहीं जा सकता.

अब आप अपना पैसा कहां निवेश करते हैं?
मैं अपना एसेट एलोकेशन का नियम फॉलो करता हूं. डेट् म्यूचुअल फंड्स में 25 फीसदी, इक्विटी में 65 फीसदी (20 प्रतिशत सीधे स्टॉक्स में और 45 फीसदी म्यूचुअल फंड्स में), और 10 फीसदी क्रिप्टोकरेंसी में. इसके अलावा मैंने रियल एस्टेंट में भी निवेश किया है. मेरा इरादा उसे बेचने का है. मैं केवल एक ही घर रखना चाहता हूं, जहां मैं रहूं.

Tags: Business news, Investment, Investment tips, Mutual funds, Stock tips

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर