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संजीवनी लगातार जागरुकता फैला रही है और भारत को टीकाकरण में कर रही है मदद

Sanjeevani- A shot of life प्रोजेक्ट वर्तमान में देश के 5 जिलों में चल रहा है.

Sanjeevani- A shot of life प्रोजेक्ट वर्तमान में देश के 5 जिलों में चल रहा है.

कैंपेन का मकसद वैक्सीन के प्रति झिझक कम करना, वैक्सीन केंद्रों की क्षमता का निर्माण करना और सबसे मुश्किल इलाकों में वैक्सीन की आसान पहुंच सुनिश्चित करना है

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    कोविड-19 संक्रमण ने पूरी दुनिया में कहर बरपा रखा है. अब तक पूरी दुनिया में संक्रमण के 187 मिलियन पुष्ट मामले और 4 मिलियन मौतें हो चुकी हैं. भारत का नंबर दूसरा है जहां सबसे ज्यादा 30 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं और 4.1 मिलियन लोग वायरस की वजह से अपनी जान गवां चुके हैं. दुनिया जहां कोविड-19 का इलाज ढूंढ़ने के लिए संघर्ष कर रही है. वहीं वैक्सीन बहुत से लोगों के लिए एक उम्मीद लेकर आई है जिसकी बदौलत वह खुद को और अपने परिवार को जानलेवा संक्रमण से बचा सकते हैं.

    भारत ने 16 जनवरी 2021 को टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया था और फिलहाल टीकाकरण के मामले में यह विश्व में दूसरे नंबर पर है. टीके के खुराक की संख्या भले ही अधिक हो, लेकिन भारत की आबादी के लिहाज से जो 1.38 बिलियन है, सिर्फ 22.3% लोगों को ही टीके की पहली खुराक और मात्र 5.52% लोगों को ही दोनों खुराक लगी है. यह संख्या मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में ही अधिक है, जबकि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जहां कि आबादी 65% से अधिक है, टीकाकरण की रफ्तार बहुत धीमी है. धीमे टीकाकरण के लिए कई चीज़ें ज़िम्मेदार हैं जिनमें सबसे अहम है वैक्सीन के प्रति झिझक.

    कोविड-19 टीकाकरण अभियान के लिए भारत के पास पर्याप्त संसाधन है, लेकिन फिर भी लोगों में वैक्सीन को लेकर गलत जानकारी और मिथक व्याप्त है. तकनीकी संसाधनों और शिक्षा की कमी वाले इलाकों में लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए फेडरल बैंक ने नेटवर्क 18 (Network 18), यूनाइटेड वे मुंबई (United Way Mumbai) और अपोलो हॉस्पिटल (Apollo Hospitals) के साथ मिलकर प्रोजेक्ट Sanjeevani- A shot of life शुरू किया. प्रोजेक्ट का मकसद वैक्सीन के प्रति झिझक कम करना, वैक्सीन केंद्रों की क्षमता का निर्माण करना और सबसे मुश्किल पहुंच वाले इलाकों में कोविड वैक्सीन की आसान पहुंच सुनिश्चित करना है.

    यह प्रोजेक्ट वर्तमान में देश के 5 जिलों में चल रहा है जिसमें अमृतसर, दक्षिण कन्नड़, गुंटूर, इंदौर और नासिक के 1000 गावों के 5 लाख लोगों को टारगेट किया गया है. यह कैंपेन 7 अप्रैल 2021 को वर्ल्ड हेल्थ डे के मौके पर लॉन्च हुआ, जो सामुदायिक जागरुकता गतिविधियों और वन टू वन हेल्थ इन्क्वायरी के जरिए अब तक 2 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है.

    Cowin पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए 10735 लोगों की मदद की गई और 4304 लोगों ने परिवहन सुविधा का लाभ उठाया जिसका आयोजन वैक्सीन केंद्र पर पहुंचने के लिए किया गया था. कैंपेन और टीम जहां टीकाकरण में सहायता के लिए जमीनी स्तर पर लोगों की मदद कर रहे हैं, वैक्सीन को लेकर अब भी उन इलाकों में झिझक है, जहां तकनीक से जुड़ाव सही तरीके से नहीं है. गलत जानकारी की वजह से बहुत से लोग टीम के सदस्यों से बातचीत के लिए और टीकाकरण के लिए तैयार नहीं होते हैं.

    लेकिन जैसे-जैसे कैंपेन आगे बढ़ रहा है, सफलता की कई कहानियां सामने आ रही है और एक अहम सीख यह है कि सही संवाद के ज़रिए वैक्सीन के प्रति झिझक कम की जा सकती है. अधिकांश इलाकों में लोगों ने तथ्यों को समझने के लिए टीम के सदस्यों से बातचीत की. टीम को आंगनवाड़ी सेविका, आशा (ASHA) वर्कर जैसे सरकारी कार्यकर्ताओं से भी मदद मिली जिन्होंने लोगों को कैंपेन की अहमियत समझाने में मदद की.

    Sanjeevani- A shot of life कैंपेन ने ऐसे राष्ट्रव्यापी प्रोग्राम के दौरान संवाद की अहमियत और जमीन से जुड़े रहने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला ताकि लोगों के सवालों का जवाब दिया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह गलत जानकारी के झांसे में न आएं.

    जहां टीके के प्रति झिझक को कम करना और टीकाकरण को आसान बनाना जरूरी है, वहीं यह भी महत्वपूर्ण है कि वैक्सीन केंद्रों पर आने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जाए ताकि वह संक्रमण के स्रोत न बनें. ऐसा करने के लिए हाइजीन, सैनिटाइजेशन और कचरे का सावधानीपूर्वक निपटान जरूरी है. Sanjeevani कैंपेन 5 जिलों के 100 केंद्रों पर मेडिकल स्टाफ और लाभार्थियों की सुरक्षा के लिए जरूरी मेडिकल सामग्री देकर इस दिशा में काम कर रही है. आज तक, दक्षिण कन्न्ड़ जिले के 18 केंद्रों को मास्क, सैनिटाइज़र, सफाई सामग्री और अन्य चीजें दी गई हैं.

    कैंपेन एक्टिविटी के दौरान कई सकारात्मक कहानियां सामने आईं, जिससे वैक्सीन के खिलाफ अटकलों को कम करने में मदद की. ऐसी ही एक कहानी अमृतसर के बल्लारवाल गांव से आती है जहां जसकरन व उसके परिवार पर समुदाय के लोगों ने वैक्सीन न लेने और ऑन-ग्राउंड टीम से संपर्क न करने का दवाब बनाया, मगर पड़ोसियों के खिलाफ जाकर उन्होंने वैक्सीन लगवाई. जसकरन ने एक मिसाल पेश की जिसके बाद समुदाय के अन्य लोगों ने भी टीकाकरण करवाया और टीम को उन पर गर्व है.

    दूसरा उदाहरण दिखाता है कि कैसे स्थानीय हितधारक समुदाय के नज़रिए को प्रभावित कर सकता है. आंध्र प्रदेश के गुंटुर की विजया रानी एक आशा वर्कर हैं जिन्हें 8 साल का अनुभव है। संजीवनी टीम के लिए वह एक प्रेरक शक्ति रहीं और संजीवनी गाड़ी की मदद से वह समुदाय के उन सदस्यों की मानसिकता बदल सकती थीं जो वैक्सीन नहीं लेना चाहते थे. वह टीम को आसपास के आशा कार्यकर्ताओं से जोड़ने में सफल रहीं जहां टीम पड़ोस के गांव में जागरुकता अभियान चला रही थी.

    अगले कदम के रूप में, कैंपेन और तेज़ हो रहा है और ज्यादा से ज्यादा स्थानीय हितधारक इसमें शामिल हो रहे हैं, इसकी पहुंच का तेज़ी से विस्तार हो रहा है. टीम ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लेने पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिससे संक्रमण की आने वाली तीसरी लहर के दौरान नुकसान से बचा जा सके. टीकाकरण केंद्रों को अधिक मजबूत किया जाएगा ताकि वह जनसंख्या की जरूरतों को पूरा कर सके और जिले में टीकाकरण के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त कर सके.

    (डॉ. शैलेस वाघले, मैनेजर, कम्यूनिटी इन्वेस्टमेंट, यूनाइटेड वे मुंबई)

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